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जब जहाज पकड़ने के लिए इंग्लैंड ने बीच में ही छोड़ दिया टेस्ट, साउथ अफ्रीका के खिलाफ 12 दिन तक चला था मैच; कहानी Timeless Test की

क्या कोई टेस्ट मैच 12 दिन तक चल सकता है? शायद आप कहेंगे- नहीं... लेकिन 1939 में ऐसा हो चुका है. ईस्ट अफ्रीका और इंग्लैडं के बीच खेला गया ‘टाइमलेस टेस्ट’ 12 दिन तक चला, फिर भी मैच का कोई नतीजा नहीं निकला. इंग्लैंड को जहाज पकड़ने के लिए मैच बीच में ही छोड़ना पड़ा, जबकि जीत सिर्फ 42 रन दूर थी.

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जब जहाज की वजह से रोकना पड़ा टेस्ट मैच, 12 दिन बाद भी नहीं निकला रिजल्ट

( Image Source:  Sora_ AI )

Timeless Test 1939 East Africa vs England: क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है. कई बार ये खेल ऐसी कहानी लिख देता है, जिस पर आम लोगों को यकीन करना बेहद मुश्किल हो जाता है. कभी जीतती हुई टीम हार जाती है, तो कभी हार की कगार पर खड़ी टीम मैच पलट देती है. यही रोमांच क्रिकेट को दुनिया का सबसे दिलचस्प खेल बनाता है.

आज हम आपको क्रिकेट इतिहास के उस टेस्ट मैच के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने खेल की परिभाषा ही बदल दी. एक ऐसा मुकाबला जो 5 दिन नहीं… 7 दिन नहीं… बल्कि पूरे 12 दिन तक चला, और हैरानी की बात ये कि इसके बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला.

असली क्रिकेट किस फॉर्मेट को माना जाता है?

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीन फॉर्मेट खेले जाते हैं- टेस्ट, वनडे और टी-20. टेस्ट क्रिकेट 5 दिन, वनडे 50 ओवर और टी-20 20 ओवर तक चलता है. टेस्ट क्रिकेट को हमेशा से असली क्रिकेट माना गया है. यह खिलाड़ी की तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती की सबसे बड़ी परीक्षा होती है, लेकिन आज भले ही टेस्ट मैच 5 दिन में खत्म होते हों, एक समय ऐसा भी था जब मैच बिना समय सीमा के खेले जाते थे... और इसी दौर में खेला गया क्रिकेट इतिहास का सबसे लंबा मुकाबला - Timeless Test.

कितने दिन तक चला ऐतिहासिक मैच?

यह ऐतिहासिक मैच 1939 में इंग्लैंड और ईस्ट अफ्रीका (जिसे अब साउथ अफ्रीका कहा जाता है) के बीच खेला गया था. उस समय मैच की कोई तय समय सीमा नहीं होती थी- यानी जब तक परिणाम न निकल जाए, खेल जारी रहता था. दोनों टीमों के बीच मुकाबला शुरू हुआ और खेल चलता ही चला गया… एक दिन… पांच दिन… आठ दिन 8… 10 दिन… और फिर 12वां दिन भी आ गया... लेकिन इसके बाद जो हुआ वो और भी चौंकाने वाला था.

मैच को 12वें दिन क्यों रोकना पड़ गया?

12 दिन तक मैच चलने के बावजूद भी नतीजा नहीं निकला. आखिरकार मैच को इसलिए रोकना पड़ा क्योंकि इंग्लैंड की टीम को अपने देश वापस लौटने के लिए जहाज पकड़ना था. जी हां... अगर टीम जहाज मिस कर देती, तो उन्हें कई दिन और रुकना पड़ता. इसी वजह से 12 दिन तक चले इस मैच को ड्रा घोषित करना पड़ा.

Guinness World Record में दर्ज हुआ मैच

यह मुकाबला क्रिकेट इतिहास का सबसे लंबा टेस्ट मैच बन गया और इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया. आज के दौर में ऐसा मैच खेलना नामुमकिन है. हालांकि, अब भी बड़े मुकाबलों में रिजर्व डे रखा जाता है, जैसे आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में... लेकिन 12 दिन तक चलने वाला टेस्ट मैच का ये रिकॉर्ड आज भी बरकरार है.

क्रिकेट के 150 साल के इतिहास में इससे ज्यादा अजीब और रोमांचक कहानी शायद ही कोई हो... और यही वजह है कि इसे 'द अबैंडन्ड टाइमलेस टेस्ट' (The Abandoned Timeless Test) के नाम से जाना जाता है. यह मैच 3 मार्च से 14 मार्च 1939 के बीच डरबन, दक्षिण अफ्रीका में खेला गया था.

1. 'टाइमलेस टेस्ट' का क्या मतलब था?

उस दौर में कुछ टेस्ट मैचों के लिए कोई समय सीमा (जैसे आज 5 दिन होती है) तय नहीं की जाती थी. नियम यह था कि मैच तब तक चलेगा जब तक कोई एक टीम जीत न जाए. इसका मकसद ड्रॉ की संभावना को खत्म करना था.

2. मैच में क्या-क्या हुआ? (10 दिनों का खेल)

  • दक्षिण अफ्रीका ने पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए 202.6 ओवर में 530 रन बनाए, जिसके जवाब में इंग्लैंड की पहली पारी 117.6 ओवर में 316 रन पर सिमट गई.
  • दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में 142.1 ओवर में 481 रन बनाए और इंग्लैंड को जीत के लिए 696 रनों का विशाल लक्ष्य दिया.
  • इंग्लैंड ने इस असंभव लक्ष्य का पीछा करते हुए जबरदस्त बल्लेबाजी की. खेल के 10वें दिन तक इंग्लैंड ने 218.2 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 654 रन बना लिए थे. उन्हें जीत के लिए केवल 42 रनों की जरूरत थी और उनके 5 विकेट सुरक्षित थे.
  • दक्षिण अफ्रीका की तरफ से पहली पारी में पीटर वैन डेर बिजल (125) और डूडले नोर्स (103) ने शानदार शतकीय पारी खेली. वहीं, इंग्लैंड की ओर से लेस एम्स ने 84 और एडी पेंटर ने 62 रन बनाए.
  • दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका की ओर से एलन मेलविल ने 103 और पीटर वैन डेर बिजल ने 97 बनाए, जबकि इंग्लैंड की ओर से एडी एडरिच ने 219 और वैली हैमंड ने 140 रन बनाए.

3. मैच क्यों रोकना पड़ा?

14 मार्च को मैच के 10वें दिन शाम को भारी बारिश शुरू हो गई. इंग्लैंड की टीम को केप टाउन से 'आरएमएस एथलोन कैसल' (RMS Athlone Castle) नामक जहाज पकड़ना था, जो उन्हें वापस इंग्लैंड ले जाने वाला था. अगर वे उस दिन शाम को ट्रेन नहीं पकड़ते, तो उनका जहाज छूट जाता. अगला जहाज काफी हफ्तों बाद उपलब्ध था. कप्तान और अधिकारियों की आपसी सहमति से मैच को 'ड्रॉ' घोषित कर दिया गया, क्योंकि इंग्लैंड की टीम को मैदान छोड़कर जहाज पकड़ने के लिए भागना पड़ा.

4. मैच के कुछ अनोखे आंकड़े

मैच कुल 12 दिनों तक चला, जिसमें 2 दिन आराम के और 10 दिन खेल के थे. हालांकि, एक दिन बारिश की वजह से धुल गया. इस दौरान रिकॉर्ड 1,981 रन बने. पूरे मैच में कुल 5,447 गेंदें फेंकी गईं. इंग्लैंड के विलियम एडरिच ने दूसरी पारी में 219 रन बनाए, जो दोनों टीमों की तरफ से एक पारी में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर रहा.

5. क्रिकेट पर क्या असर हुआ?

इस मैच की थकान और इसके परिणामहीन अंत को देखते हुए आईसीसी ने फैसला किया कि भविष्य में टेस्ट मैचों के लिए एक निश्चित समय सीमा (5 दिन) तय की जाएगी. इसके बाद से 'टाइमलेस टेस्ट' का कॉन्सेप्ट हमेशा के लिए खत्म हो गया.

किस जहाज ने रुकवा दिया टाइमलेस टेस्ट?

  • 1939 के उस ऐतिहासिक 'टाइमलेस टेस्ट' ने न केवल क्रिकेट के नियम बदल दिए, बल्कि उस 'जहाज' की कहानी आज भी क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित करती है. इंग्लैंड की टीम को जिस जहाज से वापस लौटना था, उसका नाम RMS Athlone Castle (आरएमएस एथलोन कैसल) था. यह एक ब्रिटिश पैसेंजर लाइनर था, जिसे 1935 में उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में बनाया गया था.
  • यह जहाज 220 मीटर लंबा था. इसमें लगभग 780 यात्रियों के रहने की व्यवस्था थी. इसकी रफ्तार करीब 20 नोट्स थी.
  • 14 मार्च 1939 को मैच के 10वें दिन, इंग्लैंड को यह जहाज पकड़ने के लिए रात 8:05 बजे डरबन से ट्रेन लेनी थी. अगर वे वह ट्रेन छोड़ देते, तो उनका जहाज छूट जाता, जो केपटाउन से रवाना होने वाला था.
  • 1939 में इस दौरे के बाद, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस जहाज का इस्तेमाल सैनिकों को लाने-ले जाने (Troopship) के लिए किया गया था.

Timeless Test के बाद नियम में क्या-क्या बदलाव किए गए.

Timeless Test के बाद क्रिकेट के कई नियमों में बड़े बदलाव किए गए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने. इन नियमों में शामिल हैं;

  • समय सीमा: 1939 के इस मैच के बाद 'टाइमलेस टेस्ट' (बिना समय सीमा वाले मैच) हमेशा के लिए बंद कर दिए गए और 5-दिवसीय टेस्ट का प्रारूप अनिवार्य हो गया.
  • ओवर की लंबाई: पुराने समय में एक ओवर में गेंदों की संख्या निश्चित नहीं थी. 1889 तक 4 गेंदें, फिर 1900 तक 5 गेंदें और ऑस्ट्रेलिया में कभी-कभी 8 गेंदों के ओवर भी होते थे. अब यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 गेंदों का ही होता है.
  • बॉलिंग स्टाइल: शुरुआती दौर में केवल 'अंडरआर्म' बॉलिंग की अनुमति थी. 1864 में पहली बार 'ओवरआर्म' बॉलिंग (हाथ को कंधे से ऊपर ले जाकर गेंद फेंकना) को मान्यता मिली.
  • डिक्लेरेशन (पारी घोषित करना): 1889 से पहले कोई कप्तान अपनी पारी घोषित नहीं कर सकता था. टीम को तब तक खेलना पड़ता था जब तक सब आउट न हो जाएं.
क्रिकेट न्‍यूजस्टेट मिरर स्पेशल
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