World Cup के लिए ICC कैसे तैयार करता है शेड्यूल, क्यों हर बार एक ही ग्रुप में होते हैं भारत और पाकिस्तान; FAQ से जानें सब
आखिर आईसीसी कैसे वर्ल्ड कप का शेड्यूल जारी करता है, क्या उसके पीछे का प्रोसेस होता है और क्यों हर बार भारत-पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा जाता है ये सवाल हर किसी के मन में उठता है.
ICC World Cup schedule
आईसीसी ने वनडे वर्ल्ड कप 2027 का शेड्यूल जारी कर दिया है. इस बार वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे की धरती पर खेला जाएगा. 2 अक्टूबर से टूर्नामेंट की शुरुआत होगी. इस बार इसमें 14 टीमें हिस्सा लेने वाली है. वहीं एकबार फिर से भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है और भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला 10 अक्टूबर को खेला जाएगा. अब वर्ल्ड कप के शेड्यूल को लेकर हर किसी के मन में सवाल उठता है कि आखिर आईसीसी कैसे इस टूर्नामेंट का शेड्यूल बनाती है और हर बार क्यों भारत-पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा जाता है, इससे किसको और क्या फायदा होता है. चलिए हम आपको हर सवाल का जवाब देने वाले हैं.
आईसीसी का वर्ल्ड कप शेड्यूल तैयार करने का प्रोसेस काफी लंबा होता है. इसमें क्रिकेट के नियमों के साथ-साथ मैदान, यात्रा, खिलाड़ियों के आराम, प्रसारण, सुरक्षा और मेजबान देशों की व्यवस्थाओं को भी ध्यान में रखा जाता है. आईसीसी मेजबान क्रिकेट बोर्ड और संबंधित पक्षों के साथ मिलकर शेड्यूल का ड्राफ्ट तैयार करता है. इसके बाद चर्चा और जरूरी बदलाव किए जाते हैं.
सबसे पहले उन शहरों और स्टेडियमों की पहचान की जाती है जहां मुकाबले आयोजित किए जा सकते हैं. मैदान की सुविधाएं, पिच, दर्शक क्षमता, खिलाड़ियों के लिए जरूरी इंतजाम और आयोजन से जुड़ी दूसरी व्यवस्थाएं देखी जाती हैं.
वर्ल्ड कप कई शहरों और कभी-कभी कई देशों में खेला जाता है. ऐसे में टीमों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए पर्याप्त समय देना जरूरी होता है. शेड्यूल बनाते समय कोशिश की जाती है कि टीमों को लगातार लंबी यात्राएं न करनी पड़ें. मैचों के बीच खिलाड़ियों को आराम और अभ्यास का समय मिले, साथ ही उड़ानों, होटल और दूसरी लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं को भी संभाला जा सके.
मौसम किसी भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की योजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बारिश की संभावना, तापमान और स्थानीय मौसम को ध्यान में रखकर मैचों की तारीख और समय तय किए जाते हैं. जरूरत पड़ने पर नॉकआउट मुकाबलों के लिए रिजर्व डे जैसी व्यवस्था भी रखी जाती है.
इतने बड़े टूर्नामेंट के दौरान अलग-अलग देशों से खिलाड़ी, अधिकारी और लाखों फैंस पहुंच सकते हैं. इसलिए वीजा, सुरक्षा, टैक्स से जुड़े नियम और अन्य सरकारी व्यवस्थाएं भी शेड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं. मेजबान देशों की सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ बातचीत करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि मैचों के आयोजन में किसी तरह की बड़ी प्रशासनिक या सुरक्षा समस्या न आए.
भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखने का सबसे बड़ा कारण है उससे होने वाली कमाई. क्योंकि इस मैच की रिकॉर्ड-तोड़ व्यूअरशिप आती है, जिससे ब्रॉडकास्टर्स को काफी लाभ होता है. आईसीसी के लिए भी ये मैच सबसे ज्यादा कमाई करने का जरिया होता है. ICC खुद भी यह बात खुले तौर पर स्वीकार कर चुकी है.
भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों की बड़ी दिलचस्पी रहती है. ज्यादा दर्शकों का मतलब प्रसारण अधिकारों, विज्ञापन और स्पॉन्सरशिप से बिजनेस के लिए भी बड़ा बाजार होता है. भारत-पाकिस्तान मैच होने वाली कमाई का आंकड़ा भी काफी ज्यादा माना जाता है. मैच के टिकट भी मिनटों में बिक जाते हैं.
ग्रुप के लिए टीमों का चयन करने के लिए आईसीसी टीमों की वर्ल्ड रैंकिंग और स्नेक सीडिंग फॉर्मेूले का इस्तेमाल करती है. जिससे ग्रुप का संतुलन बना रहता है. उदाहरण के तौर पर अगर 4 टीमें हैं तो पहले ग्रुप नंबर-1 और नंबर-4 रैंकिंग वाली टीम और दूसरे ग्रुप में नंबर-2 और नंबर-3 रैंकिंग वाली टीमों को रखा जाता है.




