कौन हैं Preeti Pawar और Jaismine Lamboria, जिन्होंने CWG 2026 में बॉक्सिंग में भारत को दिलाया डबल गोल्ड?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सर्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए. प्रीति पवार ने महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग में, जबकि वर्ल्ड चैंपियन जैस्मिन लम्बोरिया ने 57 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता.
Preeti Pawar and Jaismine Lamboria
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय बॉक्सर्स का जलवा देखने को मिला. ग्लासगो में हुए मुकाबलों में भारत की प्रीति पवार और जैस्मिन लम्बोरिया ने अपने-अपने फाइनल जीतकर देश के खाते में लगातार दो गोल्ड मेडल जोड़ दिए. दो फाइनल, दो भारतीय बॉक्सर और दोनों के नाम गोल्ड... भारतीय बॉक्सिंग के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि दोनों खिलाड़ियों ने फाइनल में अपने विरोधियों को कोई मौका नहीं दिया.
प्रीति ने महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग में कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को सर्वसम्मत फैसले यानी Unanimous Decision से हराया. इसके बाद जैस्मिन लम्बोरिया ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वॉल्श को 5-0 से मात दी.
प्रीति पवार ने शुरुआत से बनाया दबदबा
महिलाओं के 54 किग्रा फाइनल में प्रीति पवार का मुकाबला कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो से था. मुकाबला शुरू होते ही प्रीति ने अपनी रणनीति साफ कर दी. उन्होंने सटीक पंच लगाए, दूरी को अच्छी तरह नियंत्रित किया और पूरे मुकाबले के दौरान धैर्य बनाए रखा. उनकी Accuracy, composure और ring craft ने उन्हें लगातार बढ़त में रखा.
प्रीति ने मुकाबले के दौरान जल्दबाजी नहीं दिखाई. वह सही समय पर पंच लगाने और अपने प्रतिद्वंद्वी के हमलों से बचने में सफल रहीं. जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, उनका आत्मविश्वास और नियंत्रण साफ नजर आया. अंतिम घंटी बजने के बाद नतीजे को लेकर ज्यादा संशय नहीं था. जजों ने सर्वसम्मति से प्रीति पवार को विजेता घोषित किया और उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया.
प्रीति का शानदार अभियान गोल्ड के साथ खत्म
फाइनल जीतने के साथ ही प्रीति पवार ने इस टूर्नामेंट में अपने शानदार अभियान को गोल्ड मेडल के साथ समाप्त किया. उनका प्रदर्शन पूरे मुकाबले में इतना प्रभावशाली रहा कि फाइनल के बाद भी नतीजे को लेकर कोई विवाद नहीं रहा. सर्वसम्मत फैसला इस बात का संकेत था कि भारतीय बॉक्सर ने मुकाबले पर किस तरह नियंत्रण बनाए रखा. यह भारत के लिए 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में बॉक्सिंग का पहला गोल्ड मेडल था... लेकिन भारतीय फैंस को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा.
कौन हैं प्रीति पवार?
- प्रीति पवार एक स्टार मुक्केबाज (बॉक्सर) हैं. वह विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर हैं.
- प्रीति भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं. वह सेना में सीधे जूनियर कमिशन्ड ऑफिसर (JCO) के रूप में शामिल होने वाली देश की पहली महिला हैं.
- प्रीति पवार का जन्म 23 अक्टूबर 2003 को हरियाणा के भिवानी जिले में हुआ था, जिसे भारतीय मुक्केबाजी की नर्सरी कहा जाता है. उनके पिता हरियाणा पुलिस में अधिकारी हैं.
- शुरुआत में मुक्केबाजी में रुचि न होने के बावजूद, अपने चाचा (पूर्व राष्ट्रीय पदक विजेता और कोच विनोद) की प्रेरणा से उन्होंने 14 साल की उम्र में ग्लव्स पहने.
- प्रीति ने विश्व कप 2025 के फाइनल में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक, जबकि एशियाई खेल 2022 (हांगझोऊ) में महिलाओं के 54 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीता था.
- पेरिस ओलंपिक 2024 में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया था. इसके अलावा, वह खेलो इंडिया गेम्स (2020 में रजत, 2021 में स्वर्ण) और यूथ नेशनल चैंपियनशिप की शीर्ष विजेता रही हैं.
जैस्मिन लम्बोरिया ने भी जड़ा गोल्डन पंच
प्रीति पवार के बाद रिंग में उतरीं भारत की वर्ल्ड चैंपियन जैस्मिन लम्बोरिया... उनके सामने थीं नॉर्दर्न आयरलैंड की माइकेला वॉल्श, जो पिछली कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन थीं. यानी जैस्मिन के सामने सिर्फ एक मजबूत बॉक्सर नहीं, बल्कि मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन की चुनौती थी... लेकिन भारतीय बॉक्सर ने पूरे मुकाबले में अपना दबदबा बनाए रखा..
जैस्मिन ने तीनों राउंड में अपनी रणनीति के मुताबिक बॉक्सिंग की. खास तौर पर तीसरे राउंड में उन्होंने 4-1 से बढ़त बनाई और अंत में सभी जजों के सर्वसम्मत फैसले से 5-0 की जीत दर्ज कर ली. इस जीत के साथ जैस्मिन वर्ल्ड चैंपियन के बाद अब कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन भी बन गईं.
दो फाइनल, भारत के खाते में दो गोल्ड
ग्लासगो में भारतीय बॉक्सिंग के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि अब तक भारत ने जिन दो महिला बॉक्सिंग फाइनल में हिस्सा लिया, दोनों में गोल्ड अपने नाम किया. यानी दो बॉक्सिंग फाइनल और भारत के नाम दो गोल्ड मेडल... जैस्मिन की जीत के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का गोल्ड मेडल नंबर 7 भी पूरा हो गया.
जैस्मिन के सामने थीं पिछली चैंपियन
जैस्मिन की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी विपक्षी माइकेला वॉल्श पिछली कॉमनवेल्थ गेम्स की चैंपियन थीं. ऐसे खिलाड़ी के खिलाफ फाइनल में उतरना अपने आप में बड़ा दबाव होता है, लेकिन जैस्मिन ने मुकाबले में संयम नहीं खोया और राउंड-दर-राउंड अपनी पकड़ मजबूत करती गईं. तीसरे राउंड में 4-1 की बढ़त ने उनके पक्ष में फैसला लगभग तय कर दिया. आखिर में सभी जजों ने जैस्मिन को विजेता माना और भारतीय बॉक्सर ने 5-0 के सर्वसम्मत फैसले के साथ गोल्ड मेडल जीत लिया.
कौन हैं जैस्मिन लम्बोरिया?
- जैस्मिन लम्बोरिया एक स्टार मुक्केबाज हैं. जून 2026 की रैंकिंग के अनुसार, वह वर्तमान में इस भार वर्ग में दुनिया की नंबर 1 मुक्केबाज हैं.
- प्रीति पवार की ही तरह, जैस्मिन भी भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं. वह कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP) में शामिल होने वाली और भारतीय सेना की पहली महिला मुक्केबाज हैं.
- जैस्मिन का जन्म 30 अगस्त 2001 को हरियाणा के भिवानी जिले के एक सामान्य परिवार में हुआ था. उनके पिता होमगार्ड के रूप में काम करते थे.
- जैस्मिन का परिवार मुक्केबाजी की समृद्ध विरासत रखता है. वह भारत के दिग्गज हेवीवेट मुक्केबाज और एशियाई खेलों के दोहरे स्वर्ण पदक विजेता हवा सिंह की परपोती हैं. हवा सिंह प्रसिद्ध 'भिवानी बॉक्सिंग क्लब' के सह-संस्थापक भी थे.
- जैस्मिन ने 2016 में अपने चाचाओं (संदीप सिंह और परविंदर सिंह, जो खुद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता हैं) को देखकर मुक्केबाजी शुरू की और उन्हीं से ट्रेनिंग ली.
- विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2025 (लिवरपूल) में उन्होंने 57 किग्रा वर्ग में इतिहास का पहला स्वर्ण पदक जीता था. फाइनल में उन्होंने पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता पोलैंड की जूलिया ज़ेरेमेटा को हराया था.
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (बर्मिंघम) में जैस्मिन ने 60 किग्रा (लाइटवेट) श्रेणी में भारत के लिए कांस्य पदक जीता था.
- पेरिस ओलंपिक 2024 के लिए उन्होंने वर्ल्ड ओलंपिक क्वालिफायर में शानदार जीत दर्ज कर क्वालिफाई किया और वहां भारत का प्रतिनिधित्व किया.
- जैस्मिन ने 2025 में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप और वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भी गोल्ड जीता है.
भारत की नजर अब और बॉक्सिंग गोल्ड पर
प्रीति पवार और जैस्मिन लम्बोरिया की जीत के बाद भारत की नजर अब बॉक्सिंग के बाकी फाइनल मुकाबलों पर है. दो फाइनल में दो गोल्ड ने भारतीय दल का आत्मविश्वास बढ़ाया है. ग्लासगो में भारतीय बॉक्सर लगातार मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं और अब बाकी मुकाबलों में भी मेडल की उम्मीदें बढ़ गई हैं.
एक तरफ प्रीति ने 54 किग्रा वर्ग में अपनी सटीक और नियंत्रित बॉक्सिंग से गोल्ड जीता, तो दूसरी तरफ जैस्मिन ने मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन को हराकर अपना दबदबा कायम किया. भारत के लिए बॉक्सिंग रिंग से फिलहाल खबर साफ है- दो फाइनल, दो गोल्ड और गोल्ड मेडल की संख्या 7.




