Explainer: कॉमनवेल्थ गेम्स में गीले ट्रैक पर भींगते हुए दौड़ते रहे खिलाड़ी, आखिर बारिश में क्यों नहीं रुकते मुकाबले? जानें नियम
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो की लगातार बारिश के बीच भी एथलेटिक्स मुकाबले जारी रहे. इससे सवाल उठ रहे हैं कि अगर खिलाड़ियों को चोट लग जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता...
गुलवीर सिंह ने जीता सिल्वर मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो का मौसम खिलाड़ियों और दर्शकों, दोनों के लिए बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है. लगातार हो रही बारिश के बीच भी ट्रैक एंड फील्ड के मुकाबले बिना रुके जारी हैं. गुलवीर सिंह को बारिश में भींगते हुए दौड़ना पड़ा. हालांकि, फिर भी उन्होंने इतिहास रचते हुए सिल्वर मेडल जीता. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बारिश में प्रतियोगिता क्यों नहीं रोकी जाती? क्या इससे खिलाड़ियों को चोट लगने का खतरा नहीं बढ़ता? और क्या क्रिकेट की तरह एथलेटिक्स में भी रिजर्व डे नहीं रखा जा सकता? आइए, इन सभी सवालों का जवाब जानते हैं...
विश्व एथलेटिक्स (World Athletics) के नियमों के मुताबिक, केवल बारिश होना प्रतियोगिता रोकने की वजह नहीं माना जाता. जब तक ट्रैक और प्रतियोगिता स्थल सुरक्षित हैं, बिजली गिरने, तेज तूफान या बेहद खराब दृश्यता जैसी गंभीर स्थिति नहीं बनती, तब तक मुकाबले जारी रहते हैं. आज इस्तेमाल होने वाले आधुनिक सिंथेटिक ट्रैक विशेष ड्रेनेज सिस्टम से लैस होते हैं. इससे पानी जमा नहीं होता और खिलाड़ियों को बेहतर ग्रिप मिलती है. इसी वजह से हल्की या मध्यम बारिश में भी प्रतियोगिताएं सुरक्षित तरीके से कराई जा सकती हैं.
क्या बारिश में चोट का खतरा बढ़ जाता है?
बारिश निश्चित रूप से खिलाड़ियों की चुनौती बढ़ा देती है. स्प्रिंट में स्टार्ट लेना मुश्किल हो जाता है, लॉन्ग जंप और जैवलिन जैसे इवेंट्स में रन-अप फिसलन भरा हो सकता है, जबकि थ्रो इवेंट्स में खिलाड़ियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पूरे साल अलग-अलग मौसम में अभ्यास करते हैं. उन्हें बारिश, ठंड और तेज हवा जैसी परिस्थितियों के अनुसार अपनी तकनीक बदलने की ट्रेनिंग दी जाती है.
खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए जाते हैं?
आयोजक खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाते हैं. थ्रो सर्किल और जंप रनवे को लगातार सुखाया जाता है. हर इवेंट से पहले ट्रैक का निरीक्षण किया जाता है. जरूरत पड़ने पर खिलाड़ियों को अतिरिक्त वार्म-अप का समय दिया जाता है. सभी उपकरणों की जांच की जाती है ताकि वे सुरक्षित और प्रतियोगिता के अनुरूप रहें. मौसम की स्थिति पर अधिकारी लगातार नजर रखते हैं. यदि किसी समय ट्रैक असुरक्षित हो जाए या मौसम गंभीर खतरा पैदा करे, तो मुकाबला तुरंत रोका या स्थगित किया जा सकता है.
एथलेटिक्स में रिजर्व डे क्यों नहीं रखा जाता?
यही सबसे बड़ा सवाल है. एथलेटिक्स किसी एक मैच का खेल नहीं है. इसमें कई दिनों तक सुबह और शाम के सत्रों में दर्जनों प्रतियोगिताएं होती हैं. सैकड़ों खिलाड़ी हीट, सेमीफाइनल और फाइनल खेलते हैं. कई खिलाड़ी एक से अधिक स्पर्धाओं में भी हिस्सा लेते हैं. अगर किसी एक दिन के मुकाबले आगे बढ़ाए जाएं, तो पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है.
- टीवी प्रसारण का शेड्यूल बदल जाएगा.
- पदक समारोह टालने पड़ेंगे.
- कई खिलाड़ियों के मुकाबले आपस में टकरा सकते हैं.
- हजारों खिलाड़ियों, अधिकारियों और स्वयंसेवकों की यात्रा और ठहरने की व्यवस्था प्रभावित होगी.
यही वजह है कि क्रिकेट या टेनिस की तरह एथलेटिक्स में रिजर्व डे रखना व्यावहारिक नहीं माना जाता.
क्या भविष्य में नियम बदल सकते हैं?
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में अत्यधिक बारिश और खराब मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं. ऐसे में मौसम से जुड़े नियमों पर लगातार चर्चा हो रही है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि एथलेटिक्स में रिजर्व डे जोड़ना बेहद कठिन होगा. इसके बजाय आयोजक बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, अधिक सटीक मौसम पूर्वानुमान और मजबूत सुरक्षा व्यवस्थाओं पर निवेश कर रहे हैं.
दर्शकों की चिंता भी जायज
ग्लासगो स्टेडियम में कई दर्शकों का कहना है कि खिलाड़ियों की सुरक्षा किसी भी कार्यक्रम से ज्यादा महत्वपूर्ण होनी चाहिए. उनका सवाल है कि अगर बारिश बहुत तेज हो तो मुकाबला अगले दिन क्यों नहीं कराया जा सकता. यह चिंता पूरी तरह स्वाभाविक है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार केवल बारिश को प्रतियोगिता रोकने का आधार नहीं माना जाता. जब तक मौसम खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा नहीं बनता, तब तक मुकाबले जारी रहते हैं.




