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ओडिशा GM Open जीतने के महीनों बाद भी नहीं मिले 5.5 लाख रुपये! अर्जुन अवॉर्डी अभिजीत गुप्ता का फूटा गुस्सा, AICF पर उठाए गंभीर सवाल

भारतीय शतरंज के दिग्गज और अर्जुन अवॉर्डी ग्रैंडमास्टर Abhijeet Gupta ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जनवरी 2026 में ओडिशा GM ओपन जीतने के बावजूद उन्हें अब तक 5.5 लाख रुपये की प्राइज मनी नहीं मिली है. उन्होंने आयोजकों और AICF पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर अर्जुन अवॉर्ड विजेता खिलाड़ी के साथ ऐसा हो सकता है, तो युवा खिलाड़ियों का क्या होगा.

GM Abhijeet Gupta Prize Money Controversy
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GM Abhijeet Gupta 

( Image Source:  x.com/iam_abhijeet )

Grandmaster Abhijeet Gupta Prize Money Controversy: भारतीय शतरंज जगत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पांच बार के कॉमनवेल्थ चेस चैंपियन और अर्जुन अवॉर्डी ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता ने दावा किया है कि जनवरी 2026 में ओडिशा GM ओपन जीतने के बावजूद उन्हें अब तक उनकी प्राइज मनी नहीं मिली है. इस मुद्दे को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर खेल प्रशासन और ऑल इंडिया चेस फेडरेशन (AICF) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि, उनके पोस्ट के बाद AICF के अध्यक्ष Nitin Narang ने उन्हें फोन किया और आश्वस्त किया कि आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है!

अभिजीत गुप्ता ने बताया कि ओडिशा GM ओपन टूर्नामेंट 24 जनवरी 2026 को खत्म हुआ था. इस टूर्नामेंट के कैटेगरी-A में कुल 25 लाख रुपये की प्राइज मनी रखी गई थी, जिसमें विजेता को 5.5 लाख रुपये मिलने थे. अभिजीत ने 10 में से 8 अंक हासिल कर खिताब अपने नाम किया था.

अभिजीत ने क्या बताया?

  • अभिजीत ने बताया कि टूर्नामेंट खत्म होने के बाद आयोजकों ने भरोसा दिलाया था कि दो हफ्तों के अंदर प्राइज मनी ट्रांसफर कर दी जाएगी. शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया मानकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि भारत में अक्सर खिलाड़ियों को कैश के बजाय बाद में भुगतान किया जाता है, लेकिन जब कई हफ्ते बीत गए और मार्च में उन्होंने दोबारा संपर्क किया, तो आयोजकों ने जवाब देना ही बंद कर दिया.
  • 36 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने कहा कि मामला सिर्फ उनके पैसे का नहीं है, बल्कि यह देश के युवा खिलाड़ियों के भविष्य और भरोसे से जुड़ा है.
  • अभिजीत ने कहा, “मैं अपने करियर के उस मुकाम पर हूं जहां पैसे से ज्यादा सम्मान मायने रखता है. लेकिन सोचिए, अगर कोई 10 साल का बच्चा पहली बार कोई टूर्नामेंट जीतता है और उसे इनाम ही न मिले, तो इससे क्या संदेश जाएगा?”
  • अभिजीत गुप्ता ने ऑल इंडिया चेस फेडरेशन पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि चूंकि टूर्नामेंट AICF से संबद्ध था, इसलिए फेडरेशन की भी जिम्मेदारी बनती है कि खिलाड़ियों को उनका हक दिलाए.
  • अभिजीत ने बताया कि मार्च से लेकर अब तक उन्होंने AICF अध्यक्ष और सचिव को कई ईमेल भेजे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

सोशल मीडिया पर खेल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर बहस तेज

इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया पर खेल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है. कई खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने अभिजीत गुप्ता का समर्थन किया और कहा कि अगर अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी को भी अपना पुरस्कार पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो जमीनी स्तर के खिलाड़ियों की स्थिति कितनी मुश्किल होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

अभिजीत गुप्ता ने अपने X पोस्ट में खेल मंत्रालय से भी हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने लिखा कि खिलाड़ियों की गरिमा और विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है. फिलहाल उन्होंने आगे की कानूनी कार्रवाई पर कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन साफ कहा है कि वह इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं.

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