'बचपन में मां के कपड़े पहनकर खुद को आईने में देखती थीं', Anaya Bangar ने सुनाई ट्रांजिशन की कहानी; वॉशरूम विवाद पर क्या बोलीं?
अनाया बांगर ने एक इंटरव्यू में अपनी जेंडर पहचान, बचपन के संघर्ष, ट्रांजिशन, समाज के भेदभाव और भारत में दस्तावेज बदलवाने के दौरान सामने आई परेशानियों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि पहचान छिपाने से लेकर खुद को स्वीकार करने तक का सफर आसान नहीं था.
Anaya Bangar
पूर्व क्रिकेटर, कोच और कमेंटेटर संजय बांगड़ की बेटी अनाया बांगड़ ने अपनी जिंदगी के उस सफर के बारे में खुलकर बात की है, जिसे उन्होंने लंबे समय तक अपने तक सीमित रखा. एक इंटरव्यू में अनाया ने जेंडर आइडेंटिटी, ट्रांजिशन, परिवार, समाज के रवैये और ट्रांस महिला के तौर पर अपने अनुभवों को साझा किया.
अनाया के मुताबिक, बचपन से ही उनके मन में अपनी पहचान को लेकर कई सवाल उठते थे. उन्होंने बताया कि वह खुद से पूछती थीं कि उन्हें एक खास तरह से क्यों रहना है और समाज की उम्मीदों के मुताबिक ही क्यों व्यवहार करना है. बचपन में वह अपनी मां के कपड़े पहनकर आईने में खुद को देखा करती थीं. उस वक्त उन्हें यह समझ नहीं आता था कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं, लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि यह उनकी जेंडर पहचान से जुड़ी भावनाएं थीं.
‘मैन अप’ करने का दबाव महसूस होता था
अनाया ने बताया कि समाज लड़कों से अक्सर अपनी भावनाओं को दबाने और मजबूत दिखने की उम्मीद करता है. उनके मुताबिक, खासकर भारत जैसे समाज में पुरुषों पर परिवार की जिम्मेदारी उठाने और ‘मर्द’ की तय भूमिका निभाने का दबाव रहता है. उन्होंने कहा कि पुरुषों को भी अपनी भावनाओं को समझने और उन्हें स्वस्थ तरीके से व्यक्त करने का अधिकार होना चाहिए. उनके लिए यह सफर सिर्फ शरीर में बदलाव का नहीं, बल्कि अपनी पहचान और खुद को समझने का सफर भी रहा.
स्कूल और समाज में झेलनी पड़ीं परेशानियां
अनाया ने अपने शुरुआती दिनों में होने वाली ट्रोलिंग और भेदभाव का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि उन्हें अलग-अलग नामों से बुलाया जाता था और उनके तौर-तरीकों को लेकर मजाक बनाया जाता था. अनाया ने कहा कि अपनी पहचान को लेकर शर्म और सामाजिक दबाव के कारण लंबे समय तक उन्होंने खुद को छिपाने की कोशिश की. क्रिकेट और उससे जुड़ी गतिविधियों में ज्यादा व्यस्त रहना भी उनके लिए उस समय खुद से जुड़े सवालों से बचने का एक तरीका था.
ट्रांजिशन के बाद बदली लोगों की नजर
अनाया के मुताबिक, ट्रांजिशन के दौरान सबसे मुश्किल चीजों में से एक लोगों की नजर का बदल जाना था. उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति अपनी जेंडर पहचान के मुताबिक कपड़े, मेकअप या दूसरे तरीकों से खुद को व्यक्त करना शुरू करता है, तो समाज की प्रतिक्रिया काफी अलग हो सकती है. उन्होंने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि ट्रांस महिला के तौर पर उन्हें कई बार लोगों की असहज और निजी नजरों का सामना करना पड़ा. सोशल मीडिया पर भी उन्हें ट्रोलिंग और तरह-तरह की टिप्पणियां झेलनी पड़ीं.
क्रिकेट और लॉकर रूम का अनुभव भी आसान नहीं रहा
अनाया ने स्पोर्ट्स की दुनिया के माहौल पर भी बात की. उन्होंने कहा कि क्रिकेट जैसी जगह, जिसे वह काफी ‘हाइपर-मस्क्युलिन’ माहौल मानती हैं, वहां पुरुषों के बीच होने वाला मजाक और लॉकर रूम कल्चर कई बार काफी मुश्किल हो सकता है. उनके मुताबिक, पुरुषों के बीच एक तरह की ‘बॉयज बैंटर’ संस्कृति होती है, जिसमें अलग नजर आने वाले व्यक्ति के लिए अपनी बात रखना आसान नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर कोई इस माहौल का विरोध करता है तो उसे ग्रुप से अलग किए जाने का डर भी रहता है.
सर्जरी और नई जिंदगी की शुरुआत
अनाया ने अपने ट्रांजिशन से जुड़ी मेडिकल प्रक्रिया और उसके बाद की जिंदगी के बारे में भी बात की. उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद शुरुआती महीनों में उन्हें काफी दर्द और असहजता का सामना करना पड़ा, हालांकि समय के साथ स्थिति बेहतर हुई. उन्होंने यह भी बताया कि हार्मोन थेरेपी शुरू करने से पहले उन्होंने स्पर्म फ्रीजिंग कराई थी, क्योंकि भविष्य में वह बच्चे चाहती हैं. अनाया ने ट्रांस लोगों की सर्जरी को लेकर कहा कि ये सिर्फ कॉस्मेटिक प्रक्रिया नहीं हैं. उनके मुताबिक, कई लोगों के लिए ऐसी सर्जरी उनकी पहचान और मानसिक-भावनात्मक स्थिति से गहराई से जुड़ी होती हैं. इसलिए स्वास्थ्य बीमा में भी इनके लिए उचित कवरेज पर विचार होना चाहिए.
भारत में डेटिंग भी बड़ी चुनौती
अनाया ने बताया कि ट्रांजिशन के बाद भारत में डेटिंग का अनुभव भी आसान नहीं रहा. उनके मुताबिक, डेटिंग ऐप्स पर उनके प्रोफाइल को कई बार फर्जी समझकर रिपोर्ट या बैन कर दिया गया. उन्होंने कहा कि अगर कोई पुरुष ट्रांस महिला को स्वीकार भी करता है, तो कई बार उसे परिवार और समाज की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ता है. उनके मुताबिक, सार्वजनिक पहचान होने की वजह से यह चुनौती और बढ़ जाती है.
दस्तावेजों में पुरानी पहचान की परेशानी
अनाया ने अपने दस्तावेज बदलवाने के अनुभव को बेहद परेशान करने वाला बताया. उन्होंने कहा कि ट्रांजिशन के बाद भी उनके कुछ आधिकारिक दस्तावेजों में पुरानी फोटो, पुराना नाम और पुराना जेंडर मार्कर मौजूद था. उन्होंने बताया कि पहचान बदलने के लिए सरकारी अस्पताल में मेडिकल पैनल के सामने जाने के दौरान उन्हें बेहद असहज स्थिति का सामना करना पड़ा. अनाया के मुताबिक, उनसे मेडिकल जांच के दौरान कपड़े उतारकर अपने शरीर को दिखाने के लिए कहा गया और कमरे में कई डॉक्टर मौजूद थे.
अनाया ने बताया कि बाद में उन्हें पता चला कि उनके साथ जिस तरह की प्रक्रिया की गई, वह कथित तौर पर नियमों के अनुरूप नहीं थी. उन्होंने इस मामले पर कार्रवाई करने की इच्छा भी जाहिर की.
‘आप अकेले नहीं हैं’
अनाया ने अपने पुराने रूप और आज की पहचान के बीच के सफर को याद करते हुए कहा कि ट्रांजिशन के बाद उन्हें अपनी भावनाओं को नए तरीके से समझने का मौका मिला. उन्होंने उन लोगों के लिए भी संदेश दिया जो अपनी जेंडर पहचान को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. अनाया के मुताबिक, रास्ता मुश्किल हो सकता है, लेकिन दुनिया में ऐसे लोग मौजूद हैं जो आपको समझेंगे और आपकी पहचान को स्वीकार करेंगे. उनका कहना है कि खुद को स्वीकार करने के बाद जिंदगी पहले से ज्यादा स्वतंत्र और खुली हुई महसूस हो सकती है.
वॉशरूम विवाद पर भी दिया जवाब
इंटरव्यू के दौरान अनाया ने महिलाओं के वॉशरूम को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि ट्रांस महिला को महिला के तौर पर देखा जाना चाहिए और किसी व्यक्ति के शरीर या जेंडर को लेकर बार-बार सवाल उठाकर उसके खिलाफ माहौल बनाना सही नहीं है. अनाया ने समानता की बात करते हुए कहा कि उनके लिए फेमिनिज्म का मतलब किसी एक जेंडर को दूसरे से ऊपर रखना नहीं, बल्कि सभी को बराबरी का अधिकार और सम्मान देना है. उन्होंने लोगों से अपील की कि ट्रांस लोगों को लेकर डर या पूर्वाग्रह रखने के बजाय उनके बारे में जानकारी हासिल करें, सही सर्वनाम का इस्तेमाल करें और उनके आसपास ऐसा माहौल बनाएं जिसमें वे सुरक्षित महसूस कर सकें.




