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अजिंक्य रहाणे: जिसने शोर नहीं, अपने खेल से बनाई पहचान; कहानी भारत के 'अजेय कप्तान' की

भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल अजिंक्य रहाणे ने 38 साल की उम्र में क्रिकेट से संन्यास ले लिया. 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 खेलने वाले रहाणे ने अपने शांत स्वभाव, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत और विदेशी दौरों पर शानदार प्रदर्शन से भारतीय क्रिकेट में अमिट छाप छोड़ीहै.

Ajinkya Rahane retirement
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Ajinkya Rahane Retirement: भारतीय क्रिकेट में कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जो सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन जब भी टीम मुश्किल में होती है तो सबसे पहले वही याद आते हैं. अजिंक्य रहाणे उन्हीं खिलाड़ियों में से एक रहे. जिस दौर में क्रिकेट बड़े-बड़े शॉट्स, आक्रामक अंदाज और स्टारडम के लिए जाना जाता था, उस दौर में रहाणे ने अपनी सादगी, अनुशासन और भरोसेमंद बल्लेबाजी से अलग पहचान बनाई.

गुरुवार को 38 वर्षीय अजिंक्य रहाणे ने क्रिकेट को अलविदा कह दिया. इसके साथ ही एक ऐसे खिलाड़ी का सफर खत्म हुआ, जिसने एक दशक से ज्यादा समय तक भारतीय क्रिकेट की सेवा की और कई ऐसी यादें दीं, जिन्हें क्रिकेट प्रेमी लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे.

आंकड़ों से कहीं बड़ी है रहाणे की कहानी

अजिंक्य रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले. इस दौरान उन्होंने 8,414 अंतरराष्ट्रीय रन, 15 शतक और 51 अर्धशतक लगाए... लेकिन उनके करियर की असली पहचान सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में टीम के लिए निभाई गई जिम्मेदारी रही. संन्यास की घोषणा करते हुए रहाणे ने कहा, "जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत होती है और उसका अंत भी होता है. जब वह समय आता है तो उसका सम्मान करना चाहिए और आगे बढ़ जाना चाहिए. बल्लेबाजी में मैंने हमेशा सही टाइमिंग पर भरोसा किया और जिंदगी में भी यही सीखा है."

जब रहाणे ने ऑस्ट्रेलिया में रच दिया इतिहास

अगर रहाणे के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय चुनना हो तो वह निश्चित तौर पर 2020-21 की ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज होगी. एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गया था. इसके बाद विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर स्वदेश लौट आए. टीम चोटों से जूझ रही थी और दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञ मान चुके थे कि भारत सीरीज हार जाएगा... लेकिन यहीं से कप्तान अजिंक्य रहाणे ने कहानी बदल दी. उन्होंने बेहद युवा और चोटिल भारतीय टीम का नेतृत्व करते हुए ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर इतिहास रच दिया. इसे भारतीय क्रिकेट की सबसे महान टेस्ट जीतों में गिना जाता है.

एक भी टेस्ट नहीं हारे रहाणे

मेलबर्न बॉक्सिंग डे टेस्ट में लगाया गया उनका शतक भारत की वापसी की नींव बना. इसी के साथ वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खिलाड़ी और कप्तान, दोनों के रूप में बॉक्सिंग डे टेस्ट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी बने. सबसे खास बात यह रही कि उनकी कप्तानी में भारत ने 6 टेस्ट खेले, जिनमें 4 जीते और 2 ड्रॉ रहे. यानी अंतरराष्ट्रीय टेस्ट कप्तान के रूप में रहाणे कभी कोई मैच नहीं हारे.

विदेशी सरजमीं पर सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में एक

रहाणे को हमेशा विदेशी परिस्थितियों का विशेषज्ञ बल्लेबाज माना गया. उन्होंने अपने करियर का पहला टेस्ट और पहला वनडे शतक SENA देशों (दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया) में लगाया. यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज बने. उनके 12 टेस्ट शतकों की खास बात यह रही कि जब-जब रहाणे ने टेस्ट शतक लगाया, भारत वह मैच कभी नहीं हारा. इतना ही नहीं, विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज भी बने.

जब नंबर-5 पर खेलकर बना दिया रिकॉर्ड

रहाणे ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऐसा कारनामा किया, जिसे आज भी भारतीय क्रिकेट में बेहद खास माना जाता है. वह नंबर-5 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए टेस्ट की दोनों पारियों में शतक लगाने वाले इकलौते भारतीय बल्लेबाज बने. यह उपलब्धि उनके धैर्य, तकनीक और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की क्षमता का सबसे बड़ा उदाहरण मानी जाती है.

सिर्फ बल्लेबाज नहीं, शानदार फील्डर भी थे रहाणे

रहाणे का योगदान सिर्फ बल्ले तक सीमित नहीं रहा. वह एक टेस्ट मैच में 8 कैच पकड़ने वाले इकलौते भारतीय फील्डर हैं. स्लिप में उनकी फुर्ती और सुरक्षित हाथ भारतीय टीम के लिए कई वर्षों तक बड़ी ताकत रहे. टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत भी उन्होंने यादगार अंदाज में की थी. डेब्यू मैच में 61 रन बनाकर उस समय किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा टी20 डेब्यू पर सबसे बड़ा स्कोर बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया.

टीम इंडिया से बाहर होने के बाद भी नहीं रुके

राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बावजूद रहाणे ने क्रिकेट से दूरी नहीं बनाई. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मुंबई की कप्तानी करते हुए 2023-24 रणजी ट्रॉफी में टीम को रिकॉर्ड 42वां खिताब दिलाया. इससे साबित हुआ कि उनका नेतृत्व और अनुभव अब भी भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

रहाणे ने किस फॉर्मेट में कितने रन बनाए?

विदाई भी वैसी ही, जैसी उनकी पूरी क्रिकेट यात्रा रही

रहाणे का विदाई संदेश भी उनके व्यक्तित्व की तरह बेहद शांत, विनम्र और भावुक रहा. उन्होंने कहा, "उन शुरुआती दिनों से, जब मैं छोटा था और डोंबिवली से सिर्फ़ प्रैक्टिस के लिए आता था, मैंने इस गेम में अपना सब कुछ लगा दिया. हर एक दिन, हर इनिंग, हर मौके पर जब मुझे बैटिंग करने का मौका मिला, तो मेरा सपना हमेशा इंडिया कैप पहनने का था." उन्होंने आगे कहा, "मैं एक ही नियम पर जीता था, खुद से पहले सिर्फ़ अपने देश और अपनी टीम को सपोर्ट करना. मैंने यह गेम पूरी ईमानदारी से खेला, और मेरा हमेशा से मानना ​​है कि अगर आपका इरादा सही है, तो गेम हमेशा आपका ख्याल रखेगा."

क्रिकेट से रिश्ता अभी खत्म नहीं हुआ

रहाणे ने साफ कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने का मतलब क्रिकेट से दूरी बनाना नहीं है. उन्होंने कहा, "एक भारतीय क्रिकेटर के तौर पर मेरा यह अध्याय भले ही खत्म हो रहा हो, लेकिन इस खेल के साथ मेरा सफ़र जारी रहेगा. मैं अगली पीढ़ी की मदद करने, खेल से सीखी गई सीखों को साझा करने और उस खेल को कुछ वापस देने के लिए उत्सुक हूं, जिसने मुझे सब कुछ दिया है."

सबसे भावुक पल...

अपने करियर के सबसे भावुक हिस्से को याद करते हुए रहाणे ने कहा, "अजिंक्य का मतलब है जिसे हराया न जा सके, लेकिन क्रिकेट ने मुझे कई बार हार का स्वाद चखाया है. क्रिकेटर के तौर पर, हम सफल होने से ज़्यादा बार नाकाम होते हैं." और आखिर में उन्होंने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के नाम ऐसा संदेश दिया, जिसने हर क्रिकेट प्रेमी को भावुक कर दिया. रहाणे ने कहा, "मेरी टीम मैच हारी है. मैंने भी गलतियां की हैं, लेकिन एक जगह ऐसी है जहां मैं कभी नहीं हारा, और वह है आपके दिल में... आपने हमेशा मुझे अपना समझा. आपके प्यार, आपके भरोसे और आपके सपोर्ट के लिए धन्यवाद. कैप नंबर 278, अब विदा लेता हूं."

यही संदेश शायद अजिंक्य रहाणे के पूरे करियर का सबसे सटीक परिचय है. मैदान पर वह कई बार हार-जीत का हिस्सा बने, लेकिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में उन्होंने हमेशा सम्मान, भरोसा और सादगी की जगह बनाई. शायद यही वजह है कि रहाणे को सिर्फ एक बल्लेबाज नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में गिना जाएगा.

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