Begin typing your search...

कब है निर्जला एकादशी? जानिए व्रत का महत्व और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता हैय मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और पूजा करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के समान पुण्य फल प्राप्त हो सकता है.

कब है निर्जला एकादशी? जानिए व्रत का महत्व और किन बातों का रखें विशेष ध्यान
X

कब है निर्जला एकादशी

State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 18 Jun 2026 7:30 AM IST

सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है, लेकिन सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी को सबसे अधिक कठिन और पुण्यदायी व्रतों में से एक माना जाता है. यह व्रत भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है. इस दिन श्रद्धालु अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखते हैं तथा विधि-विधान से श्रीहरि की पूजा-अर्चना करते हैं.

वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत का पालन श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ किया जाए तो भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है. वहीं कुछ ऐसी बातें भी हैं जिनका ध्यान रखना आवश्यक माना गया है, क्योंकि इनके कारण व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने में बाधा आ सकती है.

निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में भीमसेन को भोजन के बिना रहना कठिन लगता था. तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें वर्ष में केवल एक बार निर्जला एकादशी का व्रत रखने का उपदेश दिया. कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से उन्हें सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त हुआ था. मान्यता है कि निर्जला एकादशी का विधिपूर्वक पालन करने से पापों का क्षय होता है, भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है. इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है.

1. जल का सेवन न करें

निर्जला एकादशी का मुख्य नियम जल का त्याग माना गया है. इस व्रत में दिनभर और रात्रि तक पानी नहीं पिया जाता. इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को जल ग्रहण करने से बचना चाहिए. हालांकि स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर अपनी क्षमता और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्रत का पालन करना उचित माना जाता है.

2. अन्न और चावल खाने से बचें

एकादशी के दिन अन्न का सेवन वर्जित माना गया है. विशेष रूप से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन अन्न ग्रहण करने से व्रत का महत्व कम हो सकता है. इसलिए व्रत के नियमों का पालन करते हुए अन्न से दूरी बनाए रखना शुभ माना जाता है.

3. तुलसी दल न तोड़ें

भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी का विशेष महत्व है, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना उचित नहीं माना गया है. इसलिए पूजा के लिए आवश्यक तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी पर तुलसी माता को विश्राम प्राप्त होता है.

4. तामसिक वस्तुओं और नशे से दूर रहें

निर्जला एकादशी का दिन आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का माना जाता है. ऐसे में मांसाहार, लहसुन, प्याज, शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन सात्विक विचार और पवित्र आचरण अपनाना शुभ माना जाता है.

5. क्रोध, झूठ और विवाद से बचें

व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धि का भी माध्यम माना गया है. इसलिए इस दिन क्रोध करना, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या अनावश्यक विवाद में पड़ना उचित नहीं माना जाता. भगवान विष्णु का स्मरण, भजन-कीर्तन और सकारात्मक विचारों के साथ दिन व्यतीत करना अधिक फलदायी माना जाता है.

अगला लेख