कब है बहुला चतुर्थी? जानें महत्व, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय
बहुला चतुर्थी 2026 इस बार 31 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी. यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से रखा जाता है.
कब है बहुला चतुर्थी
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से जाना जाता है. हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. इस दिन भगवान गणेश के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गाय-बछड़े की पूजा करने की परंपरा है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला चतुर्थी का व्रत करने से संतान की सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है. खासतौर पर संतान की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण माना जाता है.
कब है बहुला चतुर्थी?
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 8 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 1 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर होगा. बहुला चतुर्थी के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है. इसी वजह से चतुर्थी तिथि के अनुसार 31 अगस्त को बहुला चौथ का व्रत रखना उचित होगा.
बहुला चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय
बहुला चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है. व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को पूजा करने के बाद चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य देती हैं. इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है. 2026 में बहुला चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 29 मिनट पर होने की संभावना है. हालांकि, चंद्रोदय का वास्तविक समय अलग-अलग शहरों और स्थानों के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है.
बहुला चतुर्थी की पूजा विधि
बहुला चतुर्थी के दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद साफ और पवित्र वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें. महिलाएं पूरे दिन निराहार रहकर व्रत रखती हैं. शाम के समय गाय और उसके बछड़े की पूजा करने की परंपरा है. पूजा के लिए घर में विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार किए जाते हैं. इनका भोग भगवान गणेश और श्रीकृष्ण को लगाया जाता है. इसके बाद भोग गाय और बछड़े को खिलाया जाता है. पूजा के दौरान हाथ में चावल के कुछ दाने लेकर बहुला चतुर्थी की कथा सुनें. कथा पूरी होने के बाद गाय और बछड़े की परिक्रमा करें और परिवार की सुख-शांति तथा संतान के मंगल की कामना करें. रात में चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य दें. इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है.
बहुला चतुर्थी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बहुला चतुर्थी का व्रत संतान के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए किया जाता है. माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को जीवन में आने वाली परेशानियों से सुरक्षा मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए भी इस व्रत को विशेष फलदायी माना गया है. मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान गणेश, श्रीकृष्ण तथा गाय-बछड़े की पूजा करने से संतान सुख की कामना पूरी हो सकती है. इसके साथ ही घर में धन-धान्य और समृद्धि बढ़ने का आशीर्वाद प्राप्त होता है.




