आज हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व, जानिए 5 प्रमुख धार्मिक मान्यताएं
तीज भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और पावन पर्व है, जिसे विशेष रूप से महिलाएं बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाती हैं. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन तथा अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है.
हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है. यह पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. हरियाली तीज को मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं के पर्व के रूप में देखा जाता है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं.
वहीं अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं. धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है. आइए जानते हैं हरियाली तीज से जुड़ी 5 प्रमुख धार्मिक मान्यताओं के बारे में.
1. शिव-पार्वती के मिलन का प्रतीक है हरियाली तीज
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया. धार्मिक मान्यता है कि सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया का दिन शिव और पार्वती के दिव्य मिलन से जुड़ा है. इसी वजह से हरियाली तीज को पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है. इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ने की मान्यता है.
2. सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व
हरियाली तीज का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करने से पति की दीर्घायु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना पूरी होती है. महिलाएं माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित कर अपने अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं. कई स्थानों पर महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं और हरे रंग के वस्त्र व चूड़ियां पहनती हैं.
3. अविवाहित कन्याएं करती हैं मनचाहे वर की कामना
हरियाली तीज केवल विवाहित महिलाओं के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है. अविवाहित कन्याएं भी इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने जिस तरह कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया, उसी तरह श्रद्धापूर्वक पूजा करने वाली कन्याओं को भी मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है.
4. मेहंदी, झूले और श्रृंगार का भी है धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व
हरियाली तीज पर महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं, हरी चूड़ियां पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं. सावन में पेड़ों पर झूले डालने और लोकगीत गाने की भी पुरानी परंपरा रही है. महिलाएं समूह में तीज के गीत गाकर और झूला झूलकर इस पर्व का आनंद लेती हैं.
5. सिंजारा की परंपरा
हरियाली तीज के अवसर पर नवविवाहित बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है. बेटी के ससुराल पक्ष की ओर से भी सिंजारा भेजा जाता है. इसमें कपड़े, आभूषण, मेहंदी, चूड़ियां, श्रृंगार की वस्तुएं, मिठाइयां और घेवर जैसी चीजें शामिल की जाती हैं.




