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Vande Mataram: अटल जी ने सही कहा था! कांग्रेस नहीं समझी लोकतंत्र की चक्की, वंदे मातरम् पर आज फिर घिरी, वायरल Video

वंदे मातरम् विवाद के बीच अटल बिहारी वाजपेयी का पुराना वीडियो वायरल, बीजेपी के आरोप और कांग्रेस की सफाई के साथ जानिए पूरे विवाद की राजनीतिक कहानी.

Vande Mataram: अटल जी ने सही कहा था! कांग्रेस नहीं समझी लोकतंत्र की चक्की, वंदे मातरम् पर आज फिर घिरी, वायरल Video
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15 अगस्त 2026 को देश आजादी का 80वां पर्व मना रहा था. दिल्ली में लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराकर देश को संबोधित किया तो कांग्रेस मुख्यालय में भी स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम आयोजित हुआ. लेकिन इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सियासी पारा चढ़ गया. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने वंदे मातरम् के पूरे गायन पर आपत्ति जताई, जबकि कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करते हुए अलग वजह बताई.

इसी बीच अटल बिहारी वाजपेयी का पुराना वीडियो फिर चर्चा में आ गया. वही वीडियो जिसमें वह कहते सुनाई देते हैं कि “लोकतंत्र की चक्की धीमी चलती है, लेकिन बारीक पीसती है. दूसरी तरफ कांग्रेस को लोग सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं. समझें पूरा मामला क्या?

वंदे मातरम् पर कांग्रेस मुख्यालय में हुआ विवाद?

कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर सवाल खड़े किए. आरोप लगाया गया कि जब वंदे मातरम् का गायन आगे बढ़ा तो कांग्रेस के शीर्ष नेताओं में असहजता दिखाई दी और इसे रोकने का संकेत दिया गया. वीडियो वायरल होते ही बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रगीत के प्रति कांग्रेस के रवैये से जोड़कर हमला शुरू कर दिया.

हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विवादित वीडियो की राजनीतिक व्याख्या और कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष अलग-अलग है. कांग्रेस ने इसे वंदे मातरम् रोकने की कोशिश मानने से इनकार किया है.

कांग्रेस ने क्या सफाई दी?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने वंदे मातरम् रोकने के लिए नहीं, बल्कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कहा था, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे. यानी कांग्रेस के मुताबिक वायरल वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है.

दूसरी ओर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर पार्टी की पुरानी परंपरा का हवाला दिया. उनका कहना है कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वही हिस्सा गाया जाता है जिसे अक्टूबर 1937 की कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में तय किया गया था और जिसमें रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद शुरुआती पंक्तियों के इस्तेमाल की परंपरा बनी.

इसलिए इस पूरे विवाद में दो दावे आमने-सामने हैं. बीजेपी का आरोप कि कांग्रेस नेतृत्व वंदे मातरम् के पूरे गायन से असहज हुआ और कांग्रेस की सफाई कि मामला खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था से जुड़ा था. पाठकों के लिए यह अंतर समझना जरूरी है.

अटल जी का पुराना वीडियो अब क्यों वायरल हो रहा है?

वंदे मातरम् विवाद के बीच अटल बिहारी वाजपेयी का वह पुराना वीडियो फिर चर्चा में आ गया, जिसे केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 5 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर साझा किया था. रिजिजू ने वीडियो के साथ कांग्रेस पर हमला करते हुए लिखा था कि कांग्रेस अपने ही “दुष्ट कर्मों का परिणाम” भुगत रही है और अटल जी ने बहुत पहले ही कांग्रेस को उसके अहंकार के बुरे नतीजों को लेकर आगाह कर दिया था. वीडियो में वाजपेयी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहते सुनाई देते हैं. “लोकतंत्र की चक्की धीमी चलती है, लेकिन बारीक पीसती है. वो पीस रही है.” कांग्रेस समझती नहीं है. न ही तर्क को मानने का तैयार है.

रिजिजू का यह पोस्ट उस समय आया था, जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा टकराव चल रहा था. इसलिए अटल जी के कथन को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए रिजिजू ने कांग्रेस को यह संदेश देने की कोशिश की कि राजनीतिक संघर्ष का अंतिम फैसला सदन के हंगामे से नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनता के फैसले से होता है.

क्या सुषमा स्वराज ने भी संसद ठप करने को जायज ठहराया था?

यहां इतिहास का एक दिलचस्प राजनीतिक विरोधाभास सामने आता है. 30 अप्रैल 2013 को तत्कालीन लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संसद में गतिरोध को लेकर कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया था. उस समय बीजेपी और अन्य विपक्षी दल कोयला घोटाले सहित कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे थे. सुषमा ने कहा था कि संसद के कामकाज में बाधा के लिए विपक्ष को गैर-जिम्मेदार ठहराना गलत है और “सरकार ही इस स्थिति के लिए पूरी तरह जिम्मेदार” है. उन्होंने सरकार पर लगातार घोटालों और उन्हें दबाने के आरोप लगाए.

सुषमा ने यह भी स्पष्ट किया था कि विपक्ष वित्त विधेयकों को पारित होने से नहीं रोकेगा, लेकिन सरकार को आगे उसका सहयोग मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. यानी उस दौर में बीजेपी विपक्ष में रहते हुए संसद में विरोध और वॉकआउट को राजनीतिक हथियार मानती थी.

क्या अटल की ‘लोकतंत्र की चक्की’ वाली बात आज कांग्रेस पर लागू होती है?

यही मौजूदा विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है. अटल जी का पुराना वीडियो आज इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि बीजेपी उसी कथन को कांग्रेस के वर्तमान राजनीतिक व्यवहार से जोड़ रही है. वंदे मातरम् विवाद ने इस पुराने वीडियो को एक नया राजनीतिक संदर्भ दे दिया है.

आज वंदे मातरम् को लेकर उठे विवाद ने अटलजी के पुराने बयान को फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है. बीजेपी के लिए यह कांग्रेस पर वैचारिक हमला करने का मौका है, जबकि कांग्रेस इसे गलत राजनीतिक व्याख्या बता रही है. ऐसे में असली सवाल सिर्फ यह नहीं कि वायरल वीडियो में क्या दिख रहा है, बल्कि यह भी है कि क्या राष्ट्रीय प्रतीकों पर राजनीति करने के बजाय दोनों दल अपने-अपने ऐतिहासिक रिकॉर्ड और मौजूदा बयानों का सामना करने को तैयार हैं?

यही सवाल इस पूरे विवाद को वंदे मातरम् से आगे ले जाकर भारतीय राजनीति में लोकतंत्र, राष्ट्रवाद और राजनीतिक विरोध की बदलती भाषा से जोड़ देता है. बीजेपी का भी आरोप है कि कांग्रेस लोकतंत्र के बेसिक प्रिंसिपल से दूर हो गई, वो जनमानस के नब्ज को टटोलन में लगातार नाकामयाब साबित हो रही है.

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