Shubh Labh: घर में 2 शालिग्राम तो समझें लक्ष्मी नारायण का रूप, महिलाओं को बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए स्पर्श
जिस घर में शालिग्राम विराजमान होते हैं, वहां विशेष पूजा-पाठ, सात्विकता और नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. हालांकि खाना खाने से पहले शालिग्राम की पूजा करना अनिवार्य नहीं बताया गया है, लेकिन भोजन भगवान को अर्पित करने यानी भोग लगाने की परंपरा जरूर रही है.
हिंदू धर्म में शालिग्राम भगवान विष्णु का स्वरूप माने जाते हैं. मान्यता है कि जिस घर में शालिग्राम विराजमान होते हैं, वहां विशेष पूजा-पाठ, सात्विकता और नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है. हालांकि खाना खाने से पहले शालिग्राम की पूजा करना अनिवार्य नहीं बताया गया है, लेकिन भोजन भगवान को अर्पित करने यानी भोग लगाने की परंपरा जरूर रही है.
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार, यदि घर में शालिग्राम स्थापित हैं तो भोजन करने से पहले भगवान को सात्विक भोजन का भोग लगाना शुभ माना जाता है. खासतौर पर तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते, इसलिए नैवेद्य में तुलसी दल जरूर रखना चाहिए. इसी के साथ देवकीनंदन ठाकुर एक वीडियो में बताते हैं कि घर में कितने शालिग्राम का होना शुभ और कितनों का अशुभ तो साथ उन्होंने ये भी बताया कि महिलाओं को शालिग्राम छूना चाहिए की नहीं...
कितने शालिग्राम रखना शुभ माना गया?
देवकीनंदन ठाकुर के अनुसार-
1 शालिग्राम : भगवान विष्णु का प्रतीक
2 शालिग्राम : लक्ष्मी-नारायण स्वरूप
3 शालिग्राम : धन और सौभाग्य में वृद्धि
4 शालिग्राम : चतुर्भुजी विष्णु का रूप
उन्होंने कहा कि घर में पांच से अधिक शालिग्राम नहीं रखने चाहिए और सामान्य गृहस्थ के लिए एक या दो शालिग्राम पर्याप्त माने जाते हैं.
शालिग्राम पूजा से जुड़े जरूरी नियम
1. तुलसी के बिना न रखें
शालिग्राम भगवान को हमेशा तुलसी के साथ रखना चाहिए. स्नान कराने के बाद भी तुलसी का आसन देना शुभ माना जाता है.
2. सात्विक भोजन ही चढ़ाएं
भोग में सात्विक भोजन होना चाहिए. कई वैष्णव परंपराओं में प्याज-लहसुन, मांस और मदिरा वर्जित माने जाते हैं.
3. पहले भोग फिर भोजन
भगवान को भोग लगाने के बाद ही परिवार को भोजन ग्रहण करना चाहिए. इसके बाद वही भोजन प्रसाद माना जाता है.
4. महिलाओं को लेकर क्या मान्यता?
कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं द्वारा शालिग्राम को स्पर्श न करने की बात कही जाती है, हालांकि यह अलग-अलग संप्रदायों और मान्यताओं पर निर्भर करता है. कई परिवारों में महिलाएं भी श्रद्धा से पूजा करती हैं.




