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Sawan 2026: सावन में क्यों किया जाता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप? जानें कितनी बार जाप करने से मिलेगा फायदा

जल्द ही सावन का महीना शुरू होने वाला है. इस महीने महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, मन को शांति मिलती है और अच्छे स्वास्थ्य व लंबी आयु की कामना की जाती है.

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सावन में क्यों किया जाता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत5 Mins Read

Updated on: 22 July 2026 3:11 PM IST

30 जुलाई से सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है. इस पूरे महीने भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है. इन्हीं में से महामृत्युंजय मंत्र सबसे प्रभावशाली मंत्रों में एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसका जाप करने से मन को शांति मिलती है, भय और नकारात्मकता दूर होती है तथा भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.

मान्यता के अनुसार, सावन में श्रद्धा के साथ महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है. कई लोग इसे लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और मानसिक मजबूती के लिए भी करते हैं.

क्या है महामृत्युंजय मंत्र?

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन वैदिक मंत्र है. इसका उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है. इसे मृत्यु पर विजय दिलाने वाला मंत्र भी कहा जाता है. हालांकि, इसका अर्थ केवल लंबी उम्र की कामना करना नहीं है, बल्कि जीवन के डर, दुख और नकारात्मकता से मुक्त होने की प्रार्थना भी है. मंत्र इस प्रकार है-

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

महामृत्युंजय मंत्र का क्या है अर्थ?

इस मंत्र में भगवान शिव के तीन नेत्रों वाले स्वरूप की स्तुति की गई है. इसमें उनसे प्रार्थना की जाती है कि जैसे पका हुआ फल या खीरा अपनी बेल से आसानी से अलग हो जाता है, वैसे ही भक्त को भय, दुख और जीवन के बंधनों से मुक्त करें.यह मंत्र केवल मृत्यु से बचाने की प्रार्थना नहीं है, बल्कि मन को मजबूत बनाने, डर पर जीत पाने और ईश्वर पर विश्वास बढ़ाने का संदेश भी देता है.

क्या है इस मंत्र की कहानी?

धार्मिक कथा के अनुसार, ऋषि मार्कंडेय का जीवन केवल 16 वर्ष तक ही तय था. लेकिन वे भगवान शिव के परम भक्त थे. जब उनकी आयु पूरी होने पर मृत्यु के देवता यमराज उन्हें लेने आए, तब ऋषि मार्कंडेय ने शिवलिंग को गले लगा लिया और पूरी श्रद्धा से महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने लगे. कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और यमराज को रोक दिया. इसके बाद उन्होंने ऋषि मार्कंडेय को लंबी आयु का आशीर्वाद दिया. इसी कारण इस मंत्र को जीवन, सुरक्षा और भगवान शिव की कृपा से जोड़कर देखा जाता है.

सावन में क्यों किया जाता है इसका जाप?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिससे उनका गला नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए. माना जाता है कि उन्होंने पूरी सृष्टि की रक्षा के लिए यह बलिदान दिया था. इसी कारण सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना विशेष शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें?

  • अगर आप सावन में इस मंत्र का जाप करना चाहते हैं, तो कुछ आसान बातों का ध्यान रखा जा सकता है.
  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें.
  • पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें.
  • भगवान शिव का ध्यान करें.
  • मन को शांत रखकर श्रद्धा के साथ मंत्र का जाप करें.
  • यदि संभव हो तो रुद्राक्ष की माला से 108 बार मंत्र का जाप करें.
  • ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय इस जाप के लिए शुभ माना जाता है.

महामृत्युंजय मंत्र के क्या है फायदे?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र का नियमित जाप करने से कई आध्यात्मिक लाभ मिल सकते हैं.

  • मन को शांति और मानसिक मजबूती मिलती है.
  • डर, चिंता और नकारात्मक विचार कम करने में मदद मिलती है.
  • भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है.
  • कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास बढ़ता है.
  • स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना के लिए भी इसका जाप किया जाता है.
  • घर में सकारात्मक वातावरण बना रहने की मान्यता है.

कौन कर सकता है महामृत्युंजय मंत्र का जाप?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंत्र का जाप कोई भी व्यक्ति कर सकता है. इसके लिए किसी विशेष उम्र, जाति या लिंग की बाध्यता नहीं बताई गई है.खासतौर पर जो लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों, मानसिक तनाव, डर या चिंता से जूझ रहे हों, वे श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का जाप कर सकते हैं.

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की आराधना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्र माना जाता है. सावन के पवित्र महीने में इसका जाप विशेष फलदायी माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यह मंत्र मन को शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस मंत्र का जाप केवल नियमों से नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा, विश्वास और भक्ति के साथ करना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है.

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