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रंगभरी एकादशी कल, इन 7 उपायों से धन में होगी वृद्धि और मिलेगा दांपत्य जीवन में सुख

रंगभरी एकादशी का पर्व भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है.

rangbhari ekadashi 2026
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( Image Source:  AI SORA )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 27 Feb 2026 7:30 AM IST

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली आमलकी या रंगभरी एकादशी का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव विवाह के बाद माता पार्वती को काशी लेकर आए थे और नगरवासियों ने अबीर-गुलाल से उनका स्वागत किया था.

तभी से यह दिन दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और खुशहाली बढ़ाने वाला माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए कुछ उपाय वैवाहिक जीवन की कटुता को दूर कर रिश्तों में मधुरता लाते हैं. साथ ही घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

शिव-पार्वती का संयुक्त पूजन

इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर जाए और उनका पूजन करें . और ये सम्भव न हो तो प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजन करें. उन्हें बेलपत्र, अक्षत, चंदन और गुलाल अर्पित करें. पति-पत्नी साथ बैठकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें. इससे आपसी समझ और प्रेम में वृद्धि होती है.

एक-दूसरे को गुलाल लगाएं

रंगभरी एकादशी पर पति-पत्नी एक-दूसरे को हल्का गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दें. यह प्रेम, सम्मान और विश्वास का प्रतीक है. इससे रिश्तों में नई ऊर्जा आती है और मनमुटाव दूर होते हैं.

राधा-कृष्ण की आराधना

इस दिन राधा और कृष्ण की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है. उन्हें पीले या गुलाबी पुष्प अर्पित करें और प्रेमभाव से नाम-स्मरण करें. धार्मिक विश्वास है कि इससे दांपत्य जीवन में मधुरता और समर्पण की भावना बढ़ती है.

सुहाग सामग्री का दान

विवाहित महिलाएं इस दिन किसी सुहागिन को श्रृंगार सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी, सिन्दूर या चुनरी दान करें. इससे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में स्थिरता बनी रहती है.

घर में पुष्प और रंगों से सजावट

घर के पूजा स्थान या मुख्य द्वार को फूलों और हल्के गुलाल से सजाएं. माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है और पारिवारिक वातावरण सौम्य बनता है.

व्रत और सात्विक आहार

एकादशी का व्रत रखकर फलाहार करें या सात्विक भोजन ग्रहण करें. व्रत से मन और विचार शुद्ध होते हैं, जिससे दांपत्य जीवन में धैर्य और समझदारी बढ़ती है.

जरूरतमंद दंपति की सहायता

यदि संभव हो तो किसी जरूरतमंद दंपति को अन्न, वस्त्र या आवश्यक सामग्री दान करें. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है. श्रद्धा और सकारात्मक भावना के साथ किए गए ये उपाय जीवन में स्थायी खुशहाली लाने वाले माने जाते हैं.

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