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Raksha Bandhan 2026: राखी की थाली में क्यों रखी जाती है हल्दी, अक्षत और रोली? जानें हर चीज का खास महत्व

रक्षाबंधन की पूजा की थाली में अक्षत यानी साबुत चावल रखना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता में अक्षत को पूर्णता और अखंडता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए तिलक के बाद भाई के माथे पर अक्षत लगाए जाते हैं.

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राखी की थाली में क्यों रखी जाती है हल्दी

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 18 Aug 2026 9:30 AM IST

रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए थाली सजाना भी त्योहार की खास परंपराओं में शामिल है. इसमें राखी के साथ रोली, अक्षत, हल्दी, दीपक और मिठाई जैसी चीजें रखी जाती हैं. इन सभी चीजों को शुभ माना जाता है और इनके जरिए भाई की सुख-समृद्धि, लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की जाती है.

हल्दी को खास तौर पर शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसका पीला रंग खुशहाली और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है. यही वजह है कि रक्षाबंधन की पूजा की थाली में हल्दी को जगह दी जाती है. कई घरों में हल्दी का इस्तेमाल रोली के साथ तिलक में भी किया जाता है, जिसे भाई के लिए मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है.

राखी की थाली में हल्दी क्यों रखी जाती है?

हल्दी भारतीय परंपरा में लंबे समय से शुभ मानी जाती है. शादी-ब्याह से लेकर कई धार्मिक कार्यक्रमों में इसका इस्तेमाल होता है. इसका पीला रंग भी शुभता और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है. राखी की थाली में हल्दी रखने का मतलब भाई-बहन के जीवन में सुख, समृद्धि और शुभता की कामना से जोड़ा जाता है. कुछ परिवारों में रोली के साथ हल्दी मिलाकर तिलक भी तैयार किया जाता है.

रोली से क्यों लगाया जाता है तिलक?

रक्षाबंधन पर बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाती है. हिंदू परंपरा में तिलक को शुभता और सम्मान से जोड़ा जाता है. इसे भाई के लिए मंगल और अच्छे भविष्य की कामना के रूप में भी देखा जाता है. तिलक लगाने का यह छोटा-सा रिवाज भाई-बहन के बीच प्यार और अपनापन भी दिखाता है. कई जगह रोली के साथ अक्षत लगाकर तिलक पूरा किया जाता है.

अक्षत का क्या है महत्व?

अक्षत यानी साबुत चावल, जिन्हें पूजा में शुभ माना जाता है. 'अक्षत' शब्द का अर्थ ही है ऐसा जो टूटा न हो. इसी वजह से धार्मिक मान्यताओं में इसे पूर्णता और स्थिरता से जोड़ा जाता है. रक्षाबंधन पर भाई के माथे पर रोली के साथ अक्षत लगाए जाते हैं. इसके पीछे भाई की लंबी उम्र, सुख और जीवन में स्थिरता की कामना की भावना मानी जाती है. पूजा की थाली में चावल रखने से इसे एक शुभ और पूर्ण पूजा का हिस्सा माना जाता है.

दीपक भी होता है थाली का हिस्सा

राखी की थाली में दीपक रखने की परंपरा भी कई घरों में है. भाई को तिलक लगाने और राखी बांधने के बाद बहन उसकी आरती करती है. दीपक को प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. आरती करते समय बहन अपने भाई की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन की कामना करती है.

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