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Kalashtami 2026: कालाष्टमी आज, जानिए इसका महत्व, पूजा विधि, धार्मिक मान्यताएं और उपाय

कालाष्टमी का दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है और इसे नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति दिलाने वाला विशेष दिन माना जाता है. आज के दिन पूजा-विधि और उपाय करने से भय, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं.

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कालाष्टमी महत्व और पूजा विधि

( Image Source:  AI SORA )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 10 April 2026 6:30 AM IST

शुक्रवार, 10 अप्रैल को कालाष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाली कालाष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है. इस दिन भैरव बाबा की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है.

कालाष्टमी पर भैरव बाबा की पूजा, आराधना करने से भय, शत्रुओं का नाश और नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है. काल भैरव के प्रति श्रद्धा और व्रत रखने से भगवान शिव के विशेष आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं कालाष्टमी का महत्व, मान्यताएं, पूजा विधि और उपाय.

कालाष्टमी का महत्व

कालाष्टमी भगवान काल भैरव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है. काल भैरव को भगवान भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना जाता है, जो अन्याय और अधर्म का नाश करते हैं. मान्यता है कि इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के संकट, रोग, शत्रु और भय समाप्त होते हैं. इसके अलावा कालाष्टमी पर पूजा करने से काल दोष, पितृ दोष और शनि से जुड़े कष्टों में भी राहत मिलती है. भक्तों को दीर्घायु, समृद्धि और मानसिक संतुलन का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के अहंकार को समाप्त करने के लिए काल भैरव का रूप धारण किया था. इस रूप में वे समय और मृत्यु के नियंत्रक माने जाते हैं और न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं. ऐसा विश्वास है कि कालाष्टमी पर उनकी आराधना करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है.

पूजा विधि

कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. यदि संभव हो तो मंदिर जाकर भी पूजा कर सकते हैं. पूजा के दौरान दीपक जलाएं और गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद भगवान को पुष्प (विशेष रूप से गुलाब या आक), बिल्व पत्र, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. गुड़, तिल और तेल से बनी चीजें भोग में चढ़ाना शुभ माना जाता है. मंत्र जाप के लिए “ॐ कालभैरवाय नमः” का जप करें और भैरव स्तुति का पाठ करें. पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद अर्पित करें. इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना तथा जरूरतमंदों को तिल, तेल और काले वस्त्र दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है.

कालाष्टमी के आसान उपाय

  • भगवान काल भैरव की कृपा पाने के लिए काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ खिलाएं.
  • नकारात्मक शक्तियों से बचाव के लिए “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप करें और कालभैरवाष्टक का पाठ करें.
  • भैरव बाबा को प्रसन्न करने के लिए चना, पेड़ा, काली उड़द और उड़द से बने व्यंजन का भोग लगाएं.
  • इस दिन देवी दुर्गा की पूजा और दुर्गा चालीसा का पाठ करने से भी संकटों से मुक्ति मिलती है.
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