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होलाष्टक के दिनों में शुभ कार्य क्यों वर्जित होता है? जानिए भक्त प्रह्लाद की कथा

होलाष्टक होली से पहले आने वाले आठ दिन होते हैं, जिन्हें शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है. इसके पीछे प्रह्लाद-हिरण्यकशिपु की कथा और ज्योतिषीय कारण जुड़े हैं.

होलाष्टक के दिनों में शुभ कार्य क्यों वर्जित होता है? जानिए भक्त प्रह्लाद की कथा
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( Image Source:  Sora AI )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 21 Feb 2026 6:30 AM IST

होली के पहले आठ दिन के समय को होलाष्टक के नाम से जाना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार यह होलाष्टक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि लेकर फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि तक चलता है. होलाष्टक को अच्छा नहीं माना जाता है, जिसके कारण किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है. ऐसे में होलाष्टक के दिन शुरू होने पर आठ दिनों तक विवाह, गृह प्रवेश, मंडन, अन्नप्राशन संस्कार, मुंडन और दूसरे किसी तरह के शुभ कार्य वर्जित होते हैं.

इस वर्ष होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा. 3 मार्च को होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक खत्म होगा और दोबारा से शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे. आइए जानते हैं होलाष्टक को क्यों अशुभ माना जाता है. क्या है इसके पीछे की पौराणिक मान्यताएं.

क्यों माने जाते हैं होलाष्टक के दिन अशुभ?

होली के पहले आठ दिन के समय को होलाष्टक के नाम से जाना जाता है. होलाष्टक का संबंध विष्णु भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु की कथा से जुड़ा है. प्रह्लाद जहां भगवान विष्णु के बड़े भक्त थे, वहीं इनके पिता हिरण्यकशिपु भगवान विष्णु के विरोधी थे. भक्त प्रह्राद हर दिन भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते हैं इस कारण से हिरण्यकशिपु अपने पुत्र भगवान विष्णु की भक्ति से रोकना चाहते हैं लेकिन दिन प्रतिदिन भक्त प्रह्लाद की भक्ति बढ़ती जा रही थी.

तब हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए तरह-तरह की यातनाएँ दीं, प्रह्लाद को फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक उसे विभिन्न प्रकार के कष्ट दिए गए. अंत में फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में होलिका अग्नि में भस्म हुई और भक्त प्रह्लाद की भक्ति की विजय हुई. इसी कारण इन आठ दिनों को उग्र और अशांत ऊर्जा का समय माना जाता है. इसके अलावा ज्योतिष में भी इसकी एक खास वजह है जिससे चलते शुभ कार्यो के लिए आठ दिन वर्जित माने जाते हैं. इस अवधि में ग्रहों की स्थिति कुछ अस्थिर मानी जाती है, जिससे शुभ कार्य टाल दिए जाते हैं.

होलाष्टक में नहीं करना चाहिए ऐसे काम

होलाष्टक के दौरान नए कार्यों की शुरुआत, सगाई-विवाह, भूमि पूजन, नया व्यापार प्रारंभ करना अथवा कोई बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए.

होलाष्टक में जरूर करें ये काम

होलाष्टक को मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है, लेकिन इस दौरान साधना, जप, तप और भक्ति करना अत्यंत उत्तम समय बताया गया है. इन दिनों भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और नरसिंह भगवान की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है.

होलाष्टक में छिपा है ये संदेश

होलाष्टक का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह हमें संयम और धैर्य का पाठ भी पढ़ाता है. जब पूर्णिमा की रात्रि में होलिका दहन होता है, तब यह केवल लकड़ियों का दहन नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और नकारात्मकता का अंत भी माना जाता है. इस प्रकार होलाष्टक आस्था, अनुशासन और साधना का संगम है.

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