हरितालिका तीज पर मिट्टी से ही क्यों बनाते हैं शिव-पार्वती की प्रतिमा? जानें महत्व और पूजा विधि
हरितालिका तीज इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी. भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस पर्व पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. वहीं कुंवारी कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं. तीज की पूजा में मिट्टी या बालू से शिवलिंग और शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाने की खास परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसका संबंध माता पार्वती की कठोर तपस्या से है. कहा जाता है कि माता पार्वती ने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर महादेव की आराधना की थी. इसी परंपरा का पालन आज भी तीज पूजा में किया जाता है.
हरितालिका तीज इस वर्ष 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी. यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी के लिए यह व्रत करती हैं.
हरितालिका तीज की पूजा में मिट्टी या बालू से शिवलिंग और भगवान शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाने की परंपरा है. इसके पीछे माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी धार्मिक मान्यता बताई जाती है.
माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है परंपरा
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं. विवाह की चर्चा भगवान विष्णु से होने पर उनकी सखियां उन्हें वन में ले गईं. वहां माता पार्वती ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की.
मान्यता है कि उन्होंने मिट्टी या बालू से शिवलिंग बनाया और रातभर जागकर भगवान शिव की आराधना की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया. तभी से हरितालिका तीज पर मिट्टी से शिवलिंग बनाने की परंपरा मानी जाती है.
मिट्टी के शिवलिंग का महत्व
मिट्टी पृथ्वी तत्व का प्रतीक मानी जाती है. इससे शिवलिंग बनाकर पूजा करने का भाव यह है कि ईश्वर की आराधना में भौतिक वैभव से अधिक श्रद्धा और भावना महत्वपूर्ण है. पूजा के बाद मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन जीवन की नश्वरता और प्रकृति में विलीन होने का संदेश भी देता है.
ऐसे करें पूजा
* मिट्टी या बालू से शिवलिंग, शिव-पार्वती और गणेशजी की प्रतिमा बनाकर चौकी पर स्थापित करें.
* सबसे पहले गणेशजी और फिर शिव-पार्वती का पूजन करें.
* शिवलिंग पर जल, पंचामृत, चंदन, अक्षत, फूल और बेलपत्र अर्पित करें.
* बालू के शिवलिंग पर अधिक जल न चढ़ाएं, केवल प्रतीकात्मक अभिषेक करें.
* माता पार्वती को सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी और सुहाग सामग्री अर्पित करें.
* हरितालिका तीज की कथा सुनें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें. अंत में आरती करें.




