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जानें कैसे मां गंगा बनी पापों के प्रायश्चित और मोक्ष का मार्ग, राजा भगीरथ की तपस्या से ऐसे हुईं धरती पर अवतरित

मां गंगा न सिर्फ भारत की एक पवित्र नदी हैं, बल्कि उन्हें मोक्षदायिनी भी कहा जाता है. यानी वह जो पापों का प्रायश्चित कर मुक्ति प्रदान करती हैं. इसलिए हिंदू धर्म में कहा जाता है कि गंगा में डुबकी लगाने मात्र से कष्ट और पाप धुल जाते हैं.

जानें कैसे मां गंगा बनी पापों के प्रायश्चित और मोक्ष का मार्ग, राजा भगीरथ की तपस्या से ऐसे हुईं धरती पर अवतरित
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत2 Mins Read

Updated on: 3 Dec 2025 6:56 PM IST

हिंदू धर्म में गंगा को देवी के रूप में पूजा की जाती है. मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है. खासतौर पर गंगा सप्तमी के दिन गंगा में डुबकी लगाने से आत्मा को मोक्ष की ओर ले जा सकता है. इस साल 3 मई को गंगा सप्तमी का त्यौहार मनाया जाएगा. चलिए जानते हैं धरती पर कैसे हुई मां गंगा अवतरित.

मां गंगा के धरती पर अवतरण की कथा हिंदू धर्मग्रंथों, विशेष रूप से वाल्मीकि रामायण और पुराणों में विस्तार से बताई गई है. बहुत समय पहले राजा सगर नाम के एक प्रतापी राजा थे. उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया, जिसमें एक घोड़ा छोड़ा जाता है, जो जहां-जहां जाता है, वहां-वहां यज्ञ की सीमाएं तय होती हैं. परंतु इंद्र ने यह देखकर डर के मारे वह यज्ञ का घोड़ा चुरा लिया और उसे पाताल लोक में कपिल मुनि के आश्रम के पास छोड़ दिया.

कपिल मुनि ने किया भस्म

राजा सगर के 60,000 पुत्र उस घोड़े की खोज में निकले और अंत में वे कपिल मुनि के पास पहुंचे. उन्होंने मुनि पर घोड़ा चुराने का झूठा आरोप लगा दिया. क्रोधित होकर कपिल मुनि ने उन्हें भस्म कर दिया. राजा सगर दुखी हुए और चाहते थे कि उनके पुत्रों को मोक्ष मिले. लेकिन तभी एक दिव्य वाणी हुई 'जब तक स्वर्ग की नदी गंगा पृथ्वी पर नहीं आती और उनके अस्थियों को स्पर्श नहीं करती, तब तक उन्हें मोक्ष नहीं मिल सकता है.'

तपस्या का दौर

राजा सगर के बाद उनके पुत्र अंशुमान और फिर दिलीप ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए तप किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके. अंत में राजा भगीरथ ने कठिन तपस्या की. वर्षों तक उन्होंने भगवान ब्रह्मा और फिर शिव की उपासना की.

शिव की जटाओं में गंगा

ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी, लेकिन गंगा का वेग इतना तीव्र था कि अगर वह सीधे पृथ्वी पर आती, तो पूरी धरती डूब जाती. इसलिए भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समेट लिया और फिर धीरे-धीरे उसे पृथ्वी पर प्रवाहित किया. इस प्रकार, गंगा मां का धरती पर अवतरण हुआ और उन्होंने राजा सगर के पुत्रों की राख को छूकर उन्हें मोक्ष प्रदान किया.


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