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सिर्फ सिख ही नहीं हिंदुओं के लिए भी खास है हेमकुंड, जानें रामयाण काल से क्या है इस जगह का संबंध

इस साल गुरुदारे के कपाट 25 मई 2025 से खुलेंगे. हेमकुंड दो शब्दों से बना है. पहला हिम यानी बर्फ कुंड मतलब तालाब और इस स्थान के पास एक सुंदर बर्फीली झील भी है. इस पवित्र स्थान का संबंध रामायण से भी है.

सिर्फ सिख ही नहीं हिंदुओं के लिए भी खास है हेमकुंड, जानें रामयाण काल से क्या है इस जगह का संबंध
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( Image Source:  x-ParveenKaswan )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत2 Mins Read

Updated on: 26 April 2025 6:00 AM IST

हेमकुंड साहिब को सिखों के दसवें गुरू गुरू गोबिंद सिंह जी से जुड़ा हुआ स्थान माना जाता है. कहा जाता है कि गुरू गोबिंद सिंह जी ने यहां पर अपने पिछले जन्म में ध्यान और तपस्या की थी. उन्हें विश्वास था कि हेमकुंड वही स्थान है, जहां वे अपने पिछले जन्म में भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए साधना किया करते थे.

हेमकुंड साहिब सिखों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है, लेकिन इसका हिंदू धर्म से भी गहरा संबंध है. इस जगह से जुड़ी कुछ धार्मिक मान्यताएं भी हैं, जो इस इस स्थान को और भी विशेष बनाती हैं. इस साल गुरुदारे के कपाट 25 मई 2025 से खुलेंगे. हेमकुंड दो शब्दों से बना है. पहला हिम यानी बर्फ कुंड मतलब तालाब और इस स्थान के पास एक सुंदर बर्फीली झील भी है.

रामायण काल से जुड़ी कथा

हेमकुंड साहिब का हिंदू धर्म से भी संबंध है, क्योंकि इसे भगवान लक्ष्मण से जोड़ा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, हेमकुंड वही स्थान है जहाँ भगवान लक्ष्मण ने युद्ध के दौरान घायल होने के बाद अपनी चोटों का उपचार करने के लिए तपस्या की थी. कहा जाता है कि लक्ष्मण जी ने यहां पर ध्यान और साधना की थी, ताकि वे अपनी शक्तियों को फिर से प्राप्त कर सकें. यह कथा इस स्थान को हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए भी पवित्र बनाती है.

हेमकुंड साहिब का समय

हेमकुंड साहिब मई से अक्टूबर तक खोला जाता है, क्योंकि इस समय यहां का मौसम ठीक रहता है और बर्फ की चादर थोड़ा कम होती है. ठंड में यहां भारी बर्फबारी होती है और रास्ते बंद हो जाते हैं.



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