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Dussehra 2024: इस गांव में दशहरा के दिन होती है रावण की पूजा, जानें क्यों मंदसौर में नहीं होता रावण दहन

दशहरा पूरे भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जहां रावण के पुतले जलाकर बुराई को समाप्त करने की कामना की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है? इस अनोखी परंपरा के पीछे की वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

Dussehra 2024: इस गांव में दशहरा के दिन होती है रावण की पूजा, जानें क्यों मंदसौर में नहीं होता रावण दहन
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( Image Source:  meta ai )
स्टेट मिरर डेस्क
By: स्टेट मिरर डेस्क

Updated on: 27 Dec 2025 8:51 PM IST

Dussehra 2024: दशहरा पूरे भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जहां रावण के पुतले जलाकर बुराई को समाप्त करने की कामना की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है? इस अनोखी परंपरा के पीछे की वजह जानकर आप हैरान रह जाएंगे. आइए जानते हैं मंदसौर में दशहरे पर रावण की पूजा क्यों होती है और इसके पीछे की मान्यताएं.

मंदसौर

मंदसौर, जिसे प्राचीन काल में दशपुर के नाम से जाना जाता था, रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है. यही कारण है कि यहां के लोग रावण को दामाद मानते हैं और दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन करने की बजाय उसकी पूजा करते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंदसौर के लोग रावण को मंदोदरी का पति होने के नाते विशेष सम्मान देते हैं. यहां के लोग मानते हैं कि रावण एक विद्वान और महान शासक था, और उसकी पूजा करना शुभ माना जाता है.

घूंघट में होती है रावण की पूजा

मंदसौर में दशहरे के दिन नामदेव समाज की महिलाएं रावण की पूजा पूरी विधि-विधान से करती हैं. यह पूजा पारंपरिक रूप से घूंघट में की जाती है.महिलाएं रावण के पैरों में धागा बांधती हैं और संतान प्राप्ति की कामना करती हैं. यहां का विश्वास है कि रावण की पूजा करने से न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि कई बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है. खासकर जो महिलाएं संतान की इच्छा रखती हैं, वे इस दिन रावण की पूजा जरूर करती हैं.

रावण से माफी मांगने की परंपरा

दशहरे के दिन मंदसौर में रावण की पूजा के बाद, शाम को उसका दहन किया जाता है, लेकिन इस दहन से पहले वहां के लोग रावण से माफी मांगते हैं. पूजा के बाद ढोल-बाजे के साथ पूरे विधि-विधान से रावण का सम्मान किया जाता है. मंदसौर के लोग रावण को सिर्फ एक राक्षस के रूप में नहीं देखते, बल्कि उसकी विद्वता और योग्यता के प्रति श्रद्धा रखते हैं.

रावण पूजा की मान्यताएं

मंदसौर के लोग मानते हैं कि रावण की पूजा करने से जीवन में खुशहाली आती है और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. यह अनोखी परंपरा सदियों से चली आ रही है और यहां के लोग इस परंपरा को आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं.

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. हम इसके सही या गलत होने की पुष्टि नहीं करते.

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