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दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या, कैसे करें पूजा, 53 मिनट का होगा निशिता काल, जानें क्यों है खास

8 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी. इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा करने का विधान है. पूजा हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए.

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या, कैसे करें पूजा, 53 मिनट का होगा निशिता काल, जानें क्यों है खास
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( Image Source:  META AI )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 7 Nov 2026 6:00 AM IST

08 नवंबर से दीपोत्सव का महापर्व शुभ दीपावली है. हिंदू धर्म में दिवाली एक प्रमुख पर्व है, जो हर वर्ष कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. दिवाली पर मान्यता है इस रात को मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव की पूजा करने से जीवन में सुख, धन और समृद्धि आती है.

ऐसे में दिवाली पर महालक्ष्मी की पूजन करने का विधान है. इसमें कार्तिक अमावस्या पर प्रदोष काल और निशिता काल में पूजा-आराधना और मंत्रोचार करते हुए मां लक्ष्मी का आवहन किया जाता है. आइए जानते हैं दिवाली 2026 पर मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त, निशिता काल का समय और पूजा की सरल विधि.

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा की सरल और संपूर्ण विधि

  1. दिवाली के दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना शुभ माना जाता है. परंपरागत रूप से प्रदोष काल से लेकर निशिता काल से पहले तक गृहस्थों के लिए लक्ष्मी पूजन का विधान है.
  2. सबसे पहले पूजा के स्थान को अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर साबुत अक्षत की परत लगाएं.
  3. चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित करें. इसके बाद पूजा सामग्री व्यवस्थित करके उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें.
  4. वास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन और कुबेर उपासना के लिए इस दिशा को विशेष महत्व दिया जाता है.
  5. पूजा स्थल पर जल से भरा कलश, खील-बताशे, सिंदूर, गंगाजल, अक्षत, रोली, मौली, फल, मिठाई, पान, सुपारी और इलायची आदि सामग्री रखें. इन्हें उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है. भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा, गेंदा और गुलाब के फूल भी अर्पित करें.6. पूजा स्थल के दक्षिण-पूर्व भाग में घी का दीपक जलाएं और इस मंत्र का उच्चारण करें-
  6. ॐ दीपोज्योतिः परब्रह्म दीपोज्योतिः जनार्दनः.
  7. दीपो हरतु मे पापं पूजा दीपं नमोस्तुते॥
  8. मां लक्ष्मी और गणेश जी को खीर, बूंदी के लड्डू, सूखे मेवे या मावे से बनी मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद श्रद्धापूर्वक आरती करें. पूजा के बाद मुख्य दीपक को रातभर जलता हुआ रखने की परंपरा है.8. पूजा के दौरान माता लक्ष्मी के इस मंत्र का अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जाप करें- ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः.
  9. पूजा कक्ष के प्रवेश द्वार के दोनों ओर रोली या सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं. धार्मिक मान्यता है कि दिवाली पर श्रीयंत्र की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का आगमन होता है.10. विद्यार्थियों के लिए दिवाली पर मां सरस्वती की आराधना करना भी शुभ माना जाता है.

मां लक्ष्मी की पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 8 नवंबर को पड़ रही है. इसी दिन रविवार को दिवाली का पर्व मनाया जाएगा. इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष शुभ माना गया है. प्रदोष काल में वृषभ लग्न का संयोग होने से गृहस्थों के लिए यह समय लक्ष्मी पूजन के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा.

दिवाली 2026 की तिथि और लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारंभ- 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे

अमावस्या तिथि समाप्त- 9 नवंबर, रात 12:31 बजे

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त- शाम 5:54 से 7:50 बजे

प्रदोष काल- शाम 5:31 से रात 8:09 बजे

वृषभ काल- शाम 5:54 से 7:50 बजे

निशिता काल- रात 11:39 से 12:31 बजे

सिंह लग्न- 9 नवंबर, रात 12:25 से 2:42 बजे

निशिता काल में लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त

दिवाली की रात निशिता काल में भी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान बताया गया है. तंत्र साधना और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए इस समय को महत्वपूर्ण माना जाता है. वर्ष 2026 में निशिता काल का समय रात 11 बजकर 39 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. इसकी कुल अवधि लगभग 53 मिनट होगी.

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