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बकरीद पर आखिर क्यों किए जाते हैं मीट के तीन हिस्से? कुर्बानी से जुड़ी वो रिवायत जिसे मानता है हर मुसलमान

Bakrid 2026: बकरीद पर कुर्बानी के बाद मीट को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा निभाई जाती है. इसका संबंध सिर्फ धार्मिक मान्यता से नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद और खुशियां बांटने की भावना से भी जुड़ा हुआ है.

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बकरीद पर आखिर क्यों किए जाते हैं मीट के तीन हिस्से

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Published on: 26 May 2026 1:34 PM

ईद-उल-अज़हा जिसे बकरीद भी कहा जाता है. यह इस्लाम धर्म के सबसे अहम त्योहारों में से एक माना जाता है. इस साल भारत में बकरीद 28 मई को मनाई जाएगी. इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अल्लाह की राह में कुर्बानी देते हैं और जरूरतमंदों के साथ खुशियां बांटते हैं.

बकरीद केवल धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें दान और बराबरी की भावना भी छिपी होती है. यही वजह है कि कुर्बानी के बाद मीट को खास तरीके से बांटा जाता है. खासतौर पर बकरे की कुर्बानी के बाद उसके मीट के तीन हिस्से करने की परंपरा को इस्लाम में बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.

क्यों दी जाती है कुर्बानी?

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, पैगंबर इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला किया था. उनकी आस्था और समर्पण से खुश होकर अल्लाह ने इस्माइल की जगह एक भेड़ भेज दिया. तभी से ईद-उल-अज़हा पर कुर्बानी देने की परंपरा निभाई जाती है.

क्यों बांटा जाता है कुर्बानी का मीट?

बकरीद पर दी जाने वाली कुर्बानी का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों की मदद करना और समाज में बराबरी का संदेश देना माना जाता है. इस दिन लोग अपने करीबियों और गरीबों के साथ भोजन साझा करते हैं ताकि हर व्यक्ति त्योहार की खुशी में शामिल हो सके. इस्लाम में दान और इंसानियत को बेहद अहम माना गया है, इसलिए कुर्बानी का मीट बांटने की परंपरा भी खास महत्व रखती है.

बकरे के मीट के कितने हिस्से किए जाते हैं?

अगर बकरीद पर बकरे की कुर्बानी दी जाती है, तो उसमें मूल रूप से एक हिस्सा होता है. इसके बाद परिवार उस हिस्से को पर तीन हिस्सों में बांटता है. पहला हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों को दिया जाता है ताकि वे भी त्योहार मना सकें. दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों, पड़ोसियों या उन लोगों के लिए रखा जाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं. तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है. इस परंपरा के पीछे यह सोच मानी जाती है कि त्योहार की खुशी केवल अपने तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर वर्ग तक पहुंचे.

भैंस की कुर्बानी में क्यों होते हैं सात हिस्से?

इस्लामी परंपरा के अनुसार, भैंस या बड़े जानवर की कुर्बानी में सात लोगों की हिस्सेदारी हो सकती है. इसलिए इसके मीट को सात हिस्सों में बांटा जाता है. हर व्यक्ति अपनी हिस्सेदारी के अनुसार मीट जरूरतमंदों में बांट सकता है या परिवार के साथ उपयोग कर सकता है.

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