अभी 50 से ज्यादा दिन की अमरनाथ यात्रा बाकी और पूरी तरह पिघल गई शिवलिंग, कब से बनने लग जाती है आकृति
अमरनाथ यात्रा अभी लंबी है, लेकिन बाबा बर्फानी की प्राकृतिक बर्फ की शिवलिंग पूरी तरह पिघल चुकी है. दरअसल, इसकी प्राकृतिक आकृति हर साल अक्टूबर-नवंबर से बननी शुरू होती है और सर्दियों में धीरे-धीरे आकार लेकर यात्रा शुरू होने तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए तैयार हो जाती है.
देश की सबसे पवित्र तीर्थ यात्राओं में शामिल अमरनाथ यात्रा इस साल 3 जुलाई से शुरू हुई है और 28 अगस्त तक चलेगी. हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ गुफा पहुंचते हैं. लेकिन इस बार यात्रा शुरू होने के पहले हफ्ते में ही प्राकृतिक रूप से बनने वाली बर्फ की शिवलिंग पूरी तरह पिघल गई है.
दरअसल, अमरनाथ गुफा में बनने वाली बर्फ की शिवलिंग एक प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है. इसकी आकृति आमतौर पर देर शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर) से बननी शुरू होती है और सर्दियों के दौरान लगातार बढ़ती रहती है. कई महीनों तक पानी की बूंदों के जमने से यह आकार लेती है, लेकिन गर्मी बढ़ने, मौसम में बदलाव और अन्य प्राकृतिक कारणों से यात्रा के दौरान इसका आकार धीरे-धीरे छोटा होने लगता है या कई बार पूरी तरह पिघल भी जाता है.
कैसे बनती है बर्फ की शिवलिंग?
अमरनाथ गुफा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ की शिवलिंग बनती है. इसे बाबा बर्फानी के नाम से भी जाना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह भगवान शिव का दिव्य स्वरूप है, जिसके दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं.
कहा जाता है कि गुफा की छत से लगातार पानी की बूंदें टपकती रहती हैं. जब ये बूंदें बेहद ठंडे वातावरण में नीचे गिरती हैं तो धीरे-धीरे जमने लगती हैं. कई दिनों और महीनों तक यही प्रक्रिया चलती रहती है, जिससे बर्फ की शिवलिंग का आकार बनता जाता है. अनुकूल मौसम मिलने पर इसकी ऊंचाई 12 से 18 फीट तक पहुंच सकती है.
आखिर कब से बनने लगती है शिवलिंग?
अमरनाथ क्षेत्र में अक्टूबर से भारी बर्फबारी शुरू हो जाती है. दिसंबर, जनवरी और फरवरी में यहां तापमान कई बार शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है. पूरे इलाके में मोटी बर्फ की चादर बिछ जाती है. इसी दौरान गुफा के अंदर भी प्राकृतिक परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि पानी की बूंदें जमना शुरू हो जाती हैं. आमतौर पर देर शरद ऋतु से लेकर शुरुआती गर्मियों तक बर्फ की शिवलिंग धीरे-धीरे आकार लेती रहती है. जब तक यात्रा शुरू होती है, तब तक श्रद्धालुओं को इसके दर्शन होते हैं.
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विज्ञान क्या कहता है?
- वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे आइस स्टैलेग्माइट बनने की प्रक्रिया कहा जाता है. जिस तरह कुछ गुफाओं में खनिज पदार्थों की परतें जमा होकर अलग-अलग आकृतियां बना देती हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में पानी की बूंदें जमकर बर्फ की शिवलिंग का रूप ले लेती हैं.
- हालांकि, वैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि यह प्रक्रिया सामान्य बर्फ जमने से थोड़ी अलग है. क्योंकि यात्रा के दौरान कई बार गुफा का तापमान शून्य डिग्री से ऊपर रहता है, फिर भी पहले से जमी हुई बर्फ कुछ समय तक बनी रहती है. यही वजह है कि यह प्राकृतिक घटना आज भी लोगों के लिए आकर्षण और शोध का विषय बनी हुई है.
इस साल क्यों बढ़ी चिंता?
इस बार अमरनाथ यात्रा 57 दिनों की है और अभी यात्रा खत्म होने में 50 से ज्यादा दिन बाकी हैं. ऐसे में यात्रा के शुरुआती सप्ताह में ही प्राकृतिक बर्फ की शिवलिंग के पूरी तरह पिघलने की खबर ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, धार्मिक दृष्टि से श्रद्धालुओं की आस्था बाबा बर्फानी में पहले की तरह बनी हुई है और दर्शन का सिलसिला लगातार जारी है.
इतनी जल्दी क्यों पिघल जाती है बर्फ की शिवलिंग?
- हर साल कई बार ऐसा देखा गया है कि यात्रा पूरी होने से पहले ही बर्फ की शिवलिंग का आकार छोटा होने लगता है या वह पूरी तरह पिघल जाती है. इसके पीछे कई प्राकृतिक कारण माने जाते हैं.
- जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, गुफा के अंदर का तापमान भी बढ़ने लगता है. इससे बर्फ तेजी से पिघलने लगती है.
- यात्रा के दौरान हर दिन हजारों श्रद्धालु गुफा में पहुंचते हैं. लोगों की मौजूदगी और गतिविधियों से गुफा का तापमान थोड़ा बढ़ सकता है, जिससे बर्फ के पिघलने की गति तेज हो जाती है.
- अगर गुफा की छत से गिरने वाला पानी पहले की तरह जमने के बजाय बहने लगे, तो नई बर्फ नहीं बन पाती. ऐसे में शिवलिंग का आकार धीरे-धीरे कम होने लगता है.
- गुफा के अंदर नमी और हवा के बहाव में बदलाव भी बर्फ बनने और पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. मौसम में छोटे-छोटे बदलाव भी इसके आकार पर असर डाल सकते हैं.
- कम बर्फबारी, ज्यादा बारिश, गर्म हवाएं और जलवायु में बदलाव भी प्राकृतिक बर्फ की शिवलिंग के जल्दी पिघलने की बड़ी वजह माने जाते हैं.
आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम
अमरनाथ गुफा में बनने वाली बर्फ की शिवलिंग केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति का भी एक अनोखा चमत्कार मानी जाती है. हर साल मौसम, तापमान, पानी की बूंदों और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार इसका आकार बदलता रहता है. यही कारण है कि कभी यह कई फीट ऊंची दिखाई देती है, तो कभी यात्रा के दौरान ही धीरे-धीरे पिघल जाती है. वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए यह आज भी बाबा बर्फानी की दिव्य कृपा और आस्था का प्रतीक है.




