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न्यू बॉर्न लड़कियों को क्यों होते हैं Periods? आखिर यह बीमारी है या नॉर्मल प्रोसेस, जानें सबकुछ

आमतौर पर पीरियड्स की शुरुआत किशोरावस्था में होती है, लेकिन कई बार जन्म के कुछ दिनों बाद न्यू बॉर्न लड़कियों को भी ब्लीडिंग होती है, जिसे Neonatal मेंस्ट्रुएशन कहा जाता है.

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न्यू बॉर्न लड़कियों को क्यों होते हैं पीरियड्स

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 27 April 2026 2:28 PM IST

आमतौर पर लड़कियों में पीरियड्स की शुरुआत 12 से 14 साल की उम्र के बीच होती है, जब शरीर में हार्मोनल बदलाव धीरे-धीरे एक्टिव होते हैं. यह पूरी तरह एक नैचुरल और नॉर्मल फिजिकल प्रोसेस मानी जाती है, जिसे प्यूबर्टी का हिस्सा कहा जाता है. इसी दौरान शरीर रिप्रोडक्टिव सिस्टम को डेवलप करना शुरू करता है और मासिक चक्र नियमित रूप से शुरू हो जाता है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि न्यू बॉर्न लड़कियों को भी पीरियड्स होते हैं. हैरान न हो यह सच है. इसे देखकर अक्सर पैरेंट्स घबरा जाते हैं और इसे बीमारी समझ लेते हैं. जबकि मेडिकल साइंस में यह एक अलग ही नैचुरल प्रोसेस है, जिसे Neonatal menstruation या Pseudomenstruation कहा जाता है.

Neonatal menstruation क्या है?

नवजात बच्चियों में होने वाला हल्का ब्लीडिंग या स्पॉटिंग, जिसे पीरियड्स जैसा समझ लिया जाता है. असल में यह हार्मोनल बदलाव का रिजल्ट होता है. इसे Pseudomenstruation इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह असली पीरियड्स नहीं होते. इसमें-

  • हल्का गुलाबी या लाल डिस्चार्ज होता है.
  • कुछ दिनों तक हल्की स्पॉटिंग दिख सकती है.
  • यह बहुत कम समय के लिए होता है.

क्यों होती है यह ब्लीडिंग?

1. मां के हार्मोन का प्रभाव

प्रेग्नेंसी के दौरान मां के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन काफी अधिक होता है. ये हार्मोन प्लेसेंटा के जरिए बच्चे तक भी पहुंच जाते हैं और उसकी बॉडी पर असर डालते हैं.

2. जन्म के बाद अचानक हार्मोन गिरना

जैसे ही बच्ची जन्म लेती है, मां से मिलने वाले हार्मोन का सप्लाई अचानक बंद हो जाता है. इससे बच्चे के शरीर में एस्ट्रोजन का लेवल तेजी से कम हो जाता है.

3. Withdrawal bleeding प्रोसेस

एस्ट्रोजन के अचानक कम होने से बच्ची के गर्भाशय (uterus) की अंदरूनी परत पर असर पड़ता है. यह परत हल्के रूप में टूटकर बाहर निकलती है, जिससे हल्की ब्लीडिंग दिखाई देती है. यह प्रोसेस बिल्कुल वैसी होती है जैसी बड़े लोगों में हार्मोन बदलने पर होती है, लेकिन यहां यह केवल टेंपररी अफेक्ट है.

क्या यह नॉर्मल है?

नवजात लड़कियों में यह कंडीशन रेयर नहीं है. लगभग 5% से 25% बच्चियों में यह हल्का डिस्चार्ज देखा जा सकता है. आमतौर पर यह जन्म के 2 से 10 दिन के भीतर होता है. 1 से 3 दिन तक रहता है और अपने आप बिना किसी इलाज के ठीक हो जाता है. इसके साथ कभी-कभी हल्का सफेद डिस्चार्ज भी हो सकता है, जो पूरी तरह नॉर्मल है.

क्या इससे कोई नुकसान होता है?

इससे कुछ नुकसान नहीं होता है. यह जानना बहुत जरूरी है कि यह कंडीशन भविष्य के पीरियड्स को प्रभावित नहीं करती, फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं डालती है. साथ ही, किसी बीमारी का साइन भी नहीं है, यह सिर्फ शरीर का शुरुआती हार्मोनल एडजस्टमेंट है.

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

हालांकि यह सामान्य है, लेकिन अगर निम्न लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए:

  • ब्लीडिंग 3–4 दिनों से ज्यादा चले
  • ब्लीडिंग सामान्य से ज्यादा हो
  • बच्ची बहुत सुस्त या बीमार लगे
  • बुखार या अन्य असामान्य लक्षण हों
हेल्‍थ
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