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7 जन्म नहीं, सिर्फ कुछ साल! युवाओं के बीच क्यों बढ़ रहा है स्टार्टर मैरिज का ट्रेंड, जानें पूरी कहानी

आजकल युवाओं के बीच स्टार्टर मैरिज की काफी चर्चा हो रही है. इसमें पहली शादी 5 सालों में खत्म हो जाती है, लेकिन इसे पहले से तय किया गया रिश्ता नहीं माना जाता है.

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क्या होती है स्टार्टर मैरिज?

( Image Source:  chatgpt )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 22 July 2026 12:23 PM IST

आज के समय में शादी को लेकर युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है. पहले जहां शादी को जिंदगीभर का साथ माना जाता था, वहीं अब 'स्टार्टर मैरिज' जैसा नया ट्रेंड चर्चा में है. इसमें पहली शादी 5 सालों के भीतर खत्म हो जाती है और आमतौर पर पति-पत्नी के बच्चे या बड़ी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां नहीं होती हैं.

एक्सपर्ट के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि लोग पहले से ही तलाक की सोचकर शादी करते हैं. बल्कि अगर समय के साथ दोनों की सोच, लक्ष्य और जिंदगी जीने का तरीका बदल जाए और रिश्ता खुशहाल न रहे, तो वे अलग होने का फैसला लेते हैं.

क्या होती है स्टार्टर मैरिज?

स्टार्टर मैरिज का मतलब ऐसी पहली शादी से है, जो आमतौर पर 5 साल या उससे कम समय में खत्म हो जाती है. ऐसी शादी में अक्सर पति-पत्नी के बच्चे नहीं होते, न ही उनके बीच प्रॉपर्टी या भारी आर्थिक जिम्मेदारियां जुड़ी होती हैं. इस तरह की शादी को कुछ लोग एक ऐसा रिश्ता मानते हैं, जहां दोनों एक-दूसरे को समझते हैं. अगर उन्हें लगता है कि उनकी सोच, लक्ष्य या जिंदगी जीने का तरीका मेल नहीं खाता, तो वे अलग होने का फैसला कर लेते हैं.

कहां से आया यह ट्रेंड?

'स्टार्टर मैरिज' शब्द पहली बार 1994 में द न्यूयॉर्क टाइम्स के एक लेख में सामने आया था. इसके बाद साल 2002 में जर्नलिस्ट पामेला पॉल ने अपनी किताब द स्टार्टर मैरिज एंड द फ्यूचर ऑफ मैट्रीमोनी में इस विषय को अच्छे से समझाया. इसके बाद यह शब्द दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया.

स्टार्टर मैरिज में क्या-क्या होता है?

स्टार्टर मैरिज में शादी करने वाले ज्यादातर लोग कम उम्र, यानी 20 से 25 साल के बीच शादी करते हैं. शुरुआत में उन्हें लगता है कि वे एक-दूसरे के लिए सही हैं, लेकिन कुछ साल बाद उनकी सोच, करियर, सपने और जीवन की तरजीह बदलने लगती हैं. ऐसी कंडीशन में दोनों महसूस करते हैं कि अब उनका रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा. अगर लगातार मतभेद बने रहते हैं, तो वे अलग होने का फैसला कर सकते हैं.

क्या हैं शर्तें?

हालांकि स्टार्टर मैरिज की कोई ऑफिशियल या कानूनी शर्त नहीं है, लेकिन आमतौर पर इसमें कुछ बातें देखी जाती हैं. शादी लगभग 5 साल या उससे पहले खत्म हो जाए. इस दौरान पति-पत्नी के बच्चे नहीं होते, उनके बीच बड़ी प्रॉपर्टी या ज्यादा आर्थिक जिम्मेदारियां शेयर नहीं होतीं, इसलिए अगर रिश्ता नहीं चल पाता तो अलग होने का प्रोसेस आसान माना जाता है.

क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?

एक्सपर्ट का मानना है कि आज के यंगस्टर्स सिर्फ साथ रहने के लिए शादी नहीं निभाना चाहते. वे चाहते हैं कि रिश्ते में प्यार, सम्मान, भरोसा और मानसिक शांति बनी रहे. अगर रिश्ते में लगातार झगड़े, इमोशनल दूरी या भविष्य को लेकर मतभेद हों, तो कई लोग ऐसे रिश्ते को खत्म करना बेहतर मानते हैं. पहले की तुलना में अब तलाक को लेकर समाज का नजरिया भी कुछ हद तक बदला है, खासकर बड़े शहरों में.

क्या लोग पहले से ही अलग होने की सोचकर शादी करते हैं?

नहीं. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि लोग शादी ही इस इरादे से करते हैं कि कुछ साल बाद अलग हो जाएंगे. ज्यादातर लोग शादी इस उम्मीद के साथ करते हैं कि उनका रिश्ता लंबे समय तक चलेगा. लेकिन अगर समय के साथ दोनों की सोच और जरूरतें पूरी तरह बदल जाएं और रिश्ता खुशहाल न रहे, तो वे अलग होने का फैसला लेते हैं.

भारत में कितना है इसका असर?

भारत में अभी भी शादी को परिवार, संस्कृति और परंपरा से जोड़कर देखा जाता है. इसलिए स्टार्टर मैरिज का चलन पश्चिमी देशों जितना आम नहीं है. हालांकि, बड़े शहरों में रहने वाले युवा, सोशल मीडिया और पॉडकास्ट के जरिए इस विषय पर खुलकर बात कर रहे हैं. फिर भी भारत में ज्यादातर लोग शादी को आजीवन निभाने वाले रिश्ते के रूप में ही देखते हैं. स्टार्टर मैरिज कोई नया कानून या शादी का अलग प्रकार नहीं है, बल्कि बदलती सोच का एक उदाहरण है.

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