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करोड़ों फैंस, कई रिकॉर्ड… फिर भी Virat Kohli हैं Imposter Syndrome के शिकार, जानें क्या है ये बीमारी

Virat Kohli को पूरी दुनिया एक सफल क्रिकेटर के तौर पर जानती है, लेकिन हाल ही में उन्होंने बताया कि इतनी कामयाबी के बाद भी कई बार उन्हें खुद पर शक होता है. यानी वह Imposter Syndrome के शिकार हैं.

करोड़ों फैंस, कई रिकॉर्ड… फिर भी Virat Kohli हैं Imposter Syndrome के शिकार, जानें क्या है ये बीमारी
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( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत4 Mins Read

Updated on: 21 May 2026 4:06 PM IST

दुनिया के सबसे सफल क्रिकेटरों में गिने जाने वाले Virat Kohli को आज किसी पहचान की जरूरत नहीं है. मैदान पर उनका नाम आते ही बड़े-बड़े गेंदबाजों की धड़कनें बढ़ जाती हैं. करोड़ों फैंस, कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड, शानदार फिटनेस और सालों की मेहनत के दम पर विराट ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि इतनी सक्सेस हासिल करने के बाद भी विराट कई बार खुद को पूरी तरह काबिल महसूस नहीं कर पाते.

हाल ही में एक इवेंट के दौरान विराट ने खुलकर बताया कि उनके मन में कई बार ये डर आता है कि लोग सोचेंगे कि वह उतने अच्छे नहीं हैं, जितना दुनिया उन्हें मानती है. यानी बाहर से बेहद मजबूत दिखने वाले विराट अंदर ही अंदर खुद पर सवाल उठाते रहते हैं. मन की इसी कंडीशन को “Imposter Syndrome” कहा जाता है, जिसमें इंसान अपनी मेहनत और सफलता के बावजूद खुद को कम आंकने लगता है.

क्या है इम्पोस्टर सिंड्रोम?

इम्पोस्टर सिंड्रोम एक ऐसी मानसिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी उपलब्धियों पर भरोसा नहीं कर पाता. चाहे उसने कितना भी बड़ा काम क्यों न किया हो, उसे लगता रहता है कि उसकी सफलता उसकी मेहनत से नहीं बल्कि किस्मत, मौके या दूसरों की मदद से मिली है.

ऐसे लोग अक्सर अंदर ही अंदर डरते रहते हैं कि एक दिन लोग उन्हें “नकली” या “कम योग्य” समझ लेंगे. खास बात यह है कि यह कोई आधिकारिक मानसिक बीमारी नहीं मानी जाती, लेकिन इसका असर इंसान की सोच, आत्मविश्वास और मानसिक शांति पर गहराई से पड़ सकता है.

किन लोगों में ज्यादा दिखता है यह सिंड्रोम?

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह समस्या अक्सर उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है जो:

  • खुद से बहुत ज्यादा उम्मीद रखते हैं.
  • हमेशा परफेक्ट बनने की कोशिश करते हैं.
  • लगातार प्रतियोगिता वाले माहौल में रहते हैं.
  • दूसरों की तुलना में खुद को कम आंकते हैं.
  • सफलता के बाद भी संतुष्ट नहीं हो पाते हैं.
  • यही वजह है कि बड़े खिलाड़ी, डॉक्टर, कॉर्पोरेट लीडर, वैज्ञानिक और टॉपर छात्र भी इससे प्रभावित हो सकते हैं.

इम्पोस्टर सिंड्रोम के मुख्य लक्षण

  • व्यक्ति को लगता है कि वह उतना टैलेंटेड नहीं है, जितना लोग समझते हैं.
  • कोई सराहना करे तो उसे लगता है कि लोग बढ़ा-चढ़ाकर बोल रहे हैं.
  • ऐसे लोग छोटी-सी गलती को भी बड़ी असफलता मान लेते हैं.
  • दूसरों की अचीवमेंट देखकर खुद को कमजोर समझना इसकी बड़ी पहचान है.
  • कई लोग खुद को साबित करने के लिए जरूरत से ज्यादा काम करते हैं ताकि कोई उनकी कमजोरी पकड़ न सके.
  • अचीवमेंट मिलने के बाद भी मन में संतोष नहीं आता और अगली चिंता शुरू हो जाती है.

आखिर सफल लोग ही इसका ज्यादा शिकार क्यों होते हैं?

विशेषज्ञ मानते हैं कि जो लोग हमेशा बेहतर करने की दौड़ में रहते हैं, वे खुद पर बहुत दबाव डालते हैं. वे हर सफलता के बाद अपना लक्ष्य और ऊंचा कर लेते हैं. ऐसे में उन्हें कभी नहीं लगता कि उन्होंने “काफी अच्छा” किया है. सोशल मीडिया ने भी इस समस्या को बढ़ाया है. लोग दूसरों की चमकदार जिंदगी देखकर सोचने लगते हैं कि वे पीछे हैं. जबकि हकीकत में हर इंसान अपनी लड़ाई लड़ रहा होता है.

इससे बाहर कैसे निकला जा सकता है?

  • अपनी अचीवमेंट को स्वीकार करें
  • जो हासिल किया है, उसे छोटा न समझें.
  • हर समय तुलना करना बंद करें
  • हर इंसान का सफर अलग होता है.
  • गलतियों को सामान्य मानें
  • परफेक्ट होना जरूरी नहीं है.
  • अपने करीबी लोगों से बात करें
  • मन की बातें शेयर करने से दबाव कम होता है.
  • जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ की मदद लें
  • थेरेपी और काउंसलिंग भी काफी मददगार साबित हो सकती है.
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