6 हफ्ते सोशल मीडिया से दूर रहे 35 हजार लोग, result जान आप भी बनाना चाहेंगे दूरी, चौंकने वाली है Stanford University की स्टडी
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी में पाया गया कि सोशल मीडिया से दूरी बनाने से डिप्रेशन और तनाव में कमी आती है. हालांकि असर मध्यम था, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य में सुधार साफ तौर पर देखा गया.
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने अपने सबसे बड़े एक्सपेरिमेंट्स में से एक में एक यूनिक स्टडी किया. उन्होंने 35,000 से भी ज्यादा लोगों को शामिल किया. इन लोगों को छह हफ्ते तक फेसबुक या इंस्टाग्राम का इस्तेमाल न करने के लिए पैसे दिए गए. रिजल्ट बहुत स्पष्ट और आश्चर्यजनक निकले. जिन लोगों ने सोशल मीडिया को कुछ समय के लिए बंद कर दिया, उन्होंने खुद को डिप्रेशन और तनाव में काफी कमी महसूस की. साथ ही उनकी समग्र खुशी भी बढ़ गई. हालांकि यह सुधार बहुत बड़ा नहीं था लेकिन असरदार था.
इससे साफ पता चलता है कि सोशल मीडिया से थोड़ा सा ब्रेक भी हमारे रोजमर्रा के जीवन और मन की स्थिति पर पॉजिटिव इम्पैक्ट डाल सकता है. यह स्टडी एक बड़े यादृच्छिक नियंत्रित प्रयोग (Randomized Controlled Trial) के रूप में किया गया था. इसमें कुछ लोगों को सिर्फ एक हफ्ते के लिए और कुछ को पूरे छह हफ्ते तक अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट डीएक्टिवट करने के लिए कहा गया. इससे रिसर्चर्स को यह आसानी से समझने का मौका मिला कि सोशल मीडिया से दूर रहने की अलग-अलग अवधि हमारे इमोशनल हेल्थ पर कितना अलग-अलग असर डालती है.
किन-किन लोगों को हुआ फायदा?
सबसे दिलचस्प बात यह नहीं थी कि लोग बेहतर महसूस करने लगे, बल्कि यह थी कि किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ. फेसबुक छोड़ने वालों में 35 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिला. वहीं इंस्टाग्राम छोड़ने वालों में 25 साल से कम उम्र की युवतियों को सबसे ज्यादा सुधार दिखा. यह वह समूह है जिसके बारे में अक्सर चिंता की जाती है कि सोशल मीडिया उनके मेन्टल हेल्थ पर सबसे ज्यादा बुरा असर डाल रहा है.
डिप्रेशन को मापने का इंडेक्स
रिसर्चर्स ने खुशी, चिंता और डिप्रेशन को मापने के लिए एक मानक सूचकांक (index) का इस्तेमाल किया. औसतन देखा गया कि फेसबुक छोड़ने वाले लोगों में इंस्टाग्राम छोड़ने वालों की तुलना में थोड़ा ज्यादा सुधार हुआ. लेकिन दोनों ही ग्रुप्स के लोग उन लोगों से बेहतर महसूस कर रहे थे, जिन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल जारी रखा था. अब सबसे खास और सोचने वाली बात यह थी कि लोगों ने सोशल मीडिया को अचानक पूरी तरह से नहीं छोड़ा और न ही उन्होंने कोई नई अच्छी आदतें विकसित कीं. कई लोगों ने बस फेसबुक या इंस्टाग्राम की जगह दूसरे ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स पर समय बिताना शुरू कर दिया, फिर भी वे भावनात्मक रूप से ज्यादा अच्छा महसूस कर रहे थे.
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क्या है असली मसला?
इससे एक बहुत जरुरी बात सामने आई कि समस्या सिर्फ स्क्रीन पर बिताए गए समय की नहीं है. असली मसला यह है कि आप ऑनलाइन क्या देख रहे हैं और किसके साथ बातचीत कर रहे हैं. हालांकि कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है. यह स्टडी 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले किया गया था. उस समय सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहसें और तनाव बहुत ज्यादा था. साथ ही, इस अध्ययन में शामिल होने वाले लोग खुद स्वेच्छा से आए थे और उन्हें पैसे भी दिए गए थे. इसलिए ये नतीजे हर किसी के अनुभव को पूरी तरह से नहीं दिखा सकते.




