भवानीपुर की ज़मीनी तस्वीर मिली-जुली और उलझी हुई दिखती है, जहां एक तरफ ममता बनर्जी के प्रति भरोसा और उनके काम से संतुष्टि जताने वाले लोग हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर नाराज़गी भी साफ नजर आती है. कई लोग मानते हैं कि मुकाबला इस बार कड़ा होगा, खासकर शुभेंदु अधिकारी के मैदान में होने से, लेकिन फिर भी “दीदी” का जनाधार मजबूत दिखता है. जनता बदलाव चाहती तो है, ऐसा बदलाव जो रोजगार, शांति और बेहतर व्यवस्था दे, लेकिन डर, अनिश्चितता और पुरानी पकड़ के चलते खुलकर राय देने से हिचक भी दिखती है. कुल मिलाकर, माहौल ऐसा है जहां हवा दोनों तरफ बह रही है, पर नतीजा क्या होगा, यह अब भी साफ नहीं है.