मजबूरी नहीं जरूरी है साइकिल, हेल्थ ही वेल्थ से लेकर एनवायरमेंट तक को मिलेगी राहत की सांस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील के बीच भारत में साइकिल कल्चर को फिर से बढ़ावा देने की जरूरत महसूस की जा रही है. साइकिल न सिर्फ पेट्रोल-डीजल की बचत करेगी बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और जेब तीनों को फायदा पहुंचाएगी.
आज के तेज़ भागती ज़िंदगी में पेट्रोल-डीज़ल के दाम आसमान छू रहे हैं. हर महीने गाड़ी की टंकी भरवाने में हमारी जेब ढीली हो जाती है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बार-बार अपील करते हैं- 'ईंधन बचाओ, देश बचाओ'. उन्होंने कहा है कि छोटी-छोटी आदतें बदलकर हम लाखों लीटर ईंधन बचा सकते हैं, पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं और अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकते हैं. इसी अपील को आगे बढ़ाते हुए आज हम बात करते हैं साइकिल कल्चर की.
बचपन में हम सब साइकिल पर स्कूल जाते थे, खेलने जाते थे. आज शहरों में साइकिल लगभग गायब हो गई है। लेकिन क्या आप जानते हैं? साइकिल दोबारा लाकर हम मोदी जी की ईंधन बचाने की अपील को साकार कर सकते हैं. प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई बीजेपी लीडर्स को साइकिल से कार्यालय आते देखा गया. गुरूवार को उत्तर प्रदेश के वित्त एंव संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को साइकिल से कार्यालय आते देखा गया. वहीं उनके साथ पुलिसकर्मी भी साइकिल पर दिखाई दिए.
साइकिल क्यों जरूरी है आज?
ईंधन की बचत: एक साइकिल पर 5-10 किलोमीटर जाना मतलब पेट्रोल-डीज़ल में सीधा बचत. अगर एक परिवार रोज़ छोटी दूरी साइकिल से तय करे तो साल भर में सैकड़ों लीटर ईंधन बच सकता है. मोदी कहते हैं- 'हर बूंद मायने रखती है'
स्वास्थ्य के लिए सही: साइकिल चलाने से शरीर फिट रहता है, वजन कंट्रोल होता है, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियां दूर रहती हैं. डॉक्टर भी कहते हैं – रोज़ 30 मिनट साइकिलिंग सबसे अच्छा व्यायाम है
एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन : साइकिल से कोई धुंआ नहीं निकलता. प्रदूषण कम होता है, हवा साफ रहती है. हमारे बच्चे साफ हवा में सांस लें, यही तो हम चाहते हैं.
पैसे की बचत: महंगाई के समय साइकिल सबसे सस्ता और अच्छा विकल्प है. मेंटेनेंस भी बहुत कम लगता है
भारत में साइकिल कल्चर वापस लाने के आसान उपाय
घर से शुरू करें: बच्चों को स्कूल साइकिल से भेजें. पास की दूरी पर किराना, सब्जी, दूध सब साइकिल से लाएं
सुबह-शाम परिवार के साथ साइकिल घूमने निकलें इससे बॉन्डिंग भी बढ़ेगी
सरकार और समाज का योगदान: मोदी जी के नेतृत्व में कई शहरों में साइकिल ट्रैक बनाए जा रहे हैं। हमें इन्हें और बढ़ाना चाहिए
स्कूलों में साइकिल क्लब बनाएं. बच्चे छोटी उम्र से ही साइकिल चलाना सीखें.
ऑफिस जाने वालों के लिए कंपनी के पास साइकिल स्टैंड और शावर की सुविधा हो. शहरों में 'कार फ्री डे' या 'साइकिल डे' मनाएं
सुरक्षा का ध्यान
हेलमेट जरूर लगाएं
रात में रिफ्लेक्टर वाली लाइट लगाकर चलाएं
साइकिल लेन अलग से बनाएं ताकि गाड़ियों से खतरा न हो
मॉडर्न साइकिल का जमाना
आज इलेक्ट्रिक साइकिल भी उपलब्ध हैं. थोड़ी दूरी पर बैटरी मदद करती है
अच्छी गियर वाली, हल्की और आरामदायक साइकिल बाजार में हैं
सरकारी सब्सिडी या स्कीम के तहत सस्ती साइकिल उपलब्ध कराई जा सकती हैं
छोटे शहर और गांवों में तो आसान है
गांवों में पहले से ही साइकिल ज्यादा चलती है. हमें इसे बनाए रखना है. छोटे शहरों में जहां दूरी कम है, वहां साइकिल सबसे बढ़िया विकल्प है. अगर हम सब मिलकर प्रयास करें तो 5 साल में भारत 'साइकिल फ्रेंडली' देश बन सकता है. मोदी जी की अपील को समझे तो- न छोटा काम है, न छोटा योगदान'. एक-एक व्यक्ति अगर ईंधन बचाएगा तो देश बचाएगा. साइकिल उसी छोटे-छोटे योगदान का बड़ा रूप है.




