Begin typing your search...

कितनी खास है Kangana Ranaut की ₹2.58 लाख की 'पाटन पटोला' साड़ी, जानिए कैसे तैयार होती है 700 साल पुरानी शाही विरासत

जोधपुर में कंगना रनौत का पाटन पटोला साड़ी वाला लुक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस साड़ी की कीमत लाखों में है और इसके पीछे 700 साल पुरानी भारतीय हथकरघा परंपरा की कहानी छिपी है.

कंगना रनौत की पाटन पटोला साड़ी लुक
X
कंगना रनौत की पाटन पटोला साड़ी लुक
( Image Source:  Instagram: kanganaranaut )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय6 Mins Read

Published on: 12 Jun 2026 11:22 AM

जब बात सिनेमाई पर्दे पर दमदार एक्टिंग की हो या फिर अपनी बेबाक शैली से सुर्खियां बटोरने की, कंगना रनौत (Kangana Ranaut) हमेशा महफिल लूट ले जाती हैं. लेकिन इन दिनों वह किसी और ही वजह से टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई हैं. वह वजह है उनका कॉन्फिडेंस और दिलकश एथनिक फैशन सेंस. अपनी अपकमिंग बड़ी फिल्म के प्रमोशन के लिए निकली कंगना सिर्फ अपनी कला का ही नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रमोशन कर रही हैं. हाल ही में दिल्ली में अपनी फिल्म के प्रीमियर पर एक बेहद खूबसूरत 'पैठानी साड़ी' में जलवे बिखेरने के बाद, इस एक्ट्रेस से राजनेता बनीं 'क्वीन' ने अब राजस्थान के नीले शहर यानी जोधपुर में कुछ ऐसा किया है, जिसकी चर्चा पूरे फैशन जगत में हो रही है. जोधपुर के एक भव्य कार्यक्रम में कंगना गुजरात की पारंपरिक और दुनिया भर में मशहूर 'पाटन पटोला' साड़ी में नजर आईं.

जोधपुर में दिखा कंगना का गुजराती अंदाज

कंगना रनौत का हर लुक अपने आप में एक कहानी बयां करता है. जोधपुर की कल्चरल बैकग्राउंड में जब वह कदम रख रही थीं, तो उन्होंने भारत के बेहतरीन और सबसे महंगे हथकरघा (Handloom) शिल्पों में से एक को चुना. कंगना ने मशहूर फैशन ब्रांड 'फ्रंटियर रास' के कलेक्शन से एक बेहद खूबसूरत सफेद रंग की पाटन पटोला साड़ी पहनी थी. इस साड़ी की सबसे बड़ी खासियत इसका यूनिक और पारंपरिक ड्रेपिंग स्टाइल था. 40 वर्षीय एक्ट्रेस ने इस साड़ी को बेहद सलीके से 'सीधा पल्लू' (गुजराती ड्रेप) शैली में पहना था.

क्या होता है सीधा पल्लू स्टाइल?

आमतौर पर महिलाएं 'निवी ड्रेप' का इस्तेमाल करती हैं, जिसमें साड़ी का पल्लू बाएं कंधे से होकर पीछे की तरफ लटकता है. इसके विपरीत, सीधा पल्लू स्टाइल में पल्लू को पीछे से लाकर दाहिने कंधे पर आगे की तरफ डाला जाता है, जिससे वह चेस्ट पर पूरी तरह फैलता है. यह ड्रेप न केवल पहनने वाले को एक रीगल और एलीगेंट लुक देता है, बल्कि साड़ी पर की गई बारीक कारीगरी और उसके पारंपरिक डिज़ाइनों को भी पूरी तरह से पेश करता है. कंगना की इस वाइट साड़ी पर रेड कलर्स की शेड्स से बेहद खूबसूरत और सिमेट्रिकल पैटर्न बनाए गए थे. भारतीय संस्कृति में इन डिज़ाइनों को समृद्धि, सौभाग्य और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक माना जाता है.

गजरा और ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी

कंगना रनौत और उनकी स्टाइलिस्ट टीम अच्छी तरह जानती है कि जब पोशाक इतनी भारी और ऐतिहासिक हो, तो बाकी की एक्सेसरीज और मेकअप को किस तरह बैलेंस्ड रखा जाए. कंगना ने अपने लुक को परफेक्ट बनाने के लिए हर छोटी से छोटी डिटेल पर बारीकी से ध्यान दिया. कंगना ने अपने घुंघराले बालों को पीछे की ओर खींचकर एक सलीके से बंधा हुआ लो-बन बनाया. इस जूड़े को उन्होंने ताजे सफेद चमेली के फूलों की गजरे से सजाया था. चमेली की खुशबू और उसकी सफेदी ने उनके लुक में एक विंटेज और क्लासिक भारतीय स्पर्श जोड़ दिया.

रीगल ज्वेलरी चॉइस

ज्वेलरी के मामले में कंगना ने मशहूर 'अमरापली ज्वैलर्स' (Amrapali Jewelers) के डिज़ाइनों पर भरोसा जताया. उन्होंने गले में एक शानदार चोकर नेकलेस पहना था, जिसके साथ कानों में मैचिंग ऑक्सीडाइज्ड झुमके और हाथों में पारंपरिक कड़ा उनके इस रॉयल लुक को कंप्लीट कर रहे थे. सिल्वर और ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी का यह कॉम्बिनेशन सफेद और लाल रंग की पटोला साड़ी पर बेहद फब रहा था.

मिनिमल मेकअप

मेकअप की बात करें तो कंगना ने 'मिनिमल' या न्यूड-ग्लोइंग एस्थेटिक को चुना. उनका बेस मेकअप बेहद हल्का और नेचुरल था, जिससे उनके चेहरे का नेचुरल ग्लो साफ नजर आ रहा था. गालों पर ब्लश का हल्का सा टच और होठों पर सजी लाल रंग की लिपस्टिक ने उनके ग्लैमर को कई गुना बढ़ा दिया. अंत में, माथे पर सजी एक छोटी सी काली बिंदी ने उनके इस पारंपरिक भारतीय लुक में चार चांद लगा दिए.

पाटन पटोला का इतिहास और कीमत

फैशन के दीवानों के बीच इस समय सबसे ज्यादा चर्चा कंगना की इस साड़ी की कीमत को लेकर हो रही है. फैशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 'फ्रंटियर रास' ब्रांड की इन खास पाटन पटोला साड़ियों की रेंज 55,000 रुपये से शुरू होकर ₹2,58,000 तक जाती है. कंगना ने जो मास्टरपीस पहना था, वह इस रेंज के ऊपरी हिस्से में आता है. लेकिन आखिर एक साड़ी की कीमत इतनी ज्यादा क्यों होती है? इसके पीछे छुपा है 700 साल पुराना गौरवशाली इतिहास और मेहनत.

राजाओं की पसंद और साल्वी समुदाय की कला

पाटन पटोला साड़ियों की उत्पत्ति 700 वर्ष से भी पहले गुजरात के पाटन जिले में हुई थी. ऐतिहासिक रूप से, इन्हें 'साल्वी' समुदाय के गिने-चुने बुनकरों द्वारा तैयार किया जाता है. प्राचीन काल में इसे राजा-महाराजाओं और शाही परिवारों द्वारा स्टेटस सिंबल माना जाता था. केवल कुलीन वर्ग की महिलाओं को ही इसे पहनने का सौभाग्य मिलता था.

डबल इकत की जादुई तकनीक

पाटन पटोला की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'डबल इकत' बुनाई तकनीक है. इसमें ताने (Warp) और बाने (Weft) दोनों के धागों को बुनाई से पहले बेहद बारीकी से रंगा जाता है. यह प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि धागे आपस में इस तरह मिलते हैं कि कपड़ा दोनों तरफ से बिल्कुल एक जैसा दिखता है यानी इस साड़ी का कोई 'उल्टा' या 'सीधा' हिस्सा नहीं होता; इसे दोनों तरफ से पहना जा सकता है. इन साड़ियों को रंगने के लिए केवल प्राकृतिक और वानस्पतिक रंगों (Natural Dyes) का उपयोग किया जाता है, जो सदियों तक फीके नहीं पड़ते. कपड़े पर आमतौर पर प्रकृति से प्रेरित सममित (Symmetrical) डिज़ाइन जैसे हाथी, तोता, मोर, फूल और ज्यामितीय आकृतियां बनाई जाती हैं. एक असली पाटन पटोला साड़ी को हाथ से बुनने में कई महीनों से लेकर एक साल तक का समय लग सकता है. यही कारण है कि इसे भारतीय हथकरघा का 'गहना' कहा जाता है.

अगला लेख