ब्रिटेन में महिलाओं के साथ क्या हुआ, कई को एक ही महीने में 2 बार हुए पीरियड्स, क्या है इसके पीछे की वजह
ब्रिटेन में कई महिलाओं ने जून के महीने में दो बार पीरियड्स आने की बात सामने आई, जिसके बाद यह चर्चा का विषय बन गया. डॉक्टरों के अनुसार, तेज गर्मी सीधे पीरियड्स नहीं बदलती, लेकिन हीटवेव के कारण तनाव, पानी की कमी, नींद खराब होना और शरीर की थकान हार्मोन का संतुलन बिगाड़ सकते हैं. इससे कुछ महिलाओं के पीरियड्स जल्दी या देर से आ सकते हैं.
जून में क्यों आए दो-दो बार पीरियड्स
ब्रिटेन (UK) में हाल ही में कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें जून महीने में एक नहीं, बल्कि दो बार पीरियड्स आए. इसके बाद सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर खूब चर्चा होने लगी. कई लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हुआ और क्या इसके पीछे लगातार पड़ रही तेज गर्मी यानी हीटवेव की भूमिका हो सकती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी सीधे तौर पर पीरियड्स का समय नहीं बदलती. लेकिन हीटवेव के दौरान शरीर में पानी की कमी, थकान, खराब नींद और तनाव जैसे कारण हार्मोन पर असर डाल सकते हैं. इसकी वजह से कुछ महिलाओं के पीरियड्स समय से पहले या बाद में आ सकते हैं.
क्यों चर्चा में है यह मामला?
ब्रिटेन (UK) में हाल ही में हजारों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्हें जून महीने में दो बार पीरियड्स आए. किसी का पीरियड तय समय से पहले शुरू हुआ, तो किसी को एक ही महीने में दो बार ब्लीडिंग हुई. इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या UK में पड़ी भीषण हीटवेव इसकी वजह हो सकत
क्या हीटवेव का है कनेक्शन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तेज गर्मी सीधे तौर पर पीरियड्स नहीं बदलती. लेकिन UK में मई से लगातार पड़ रही हीटवेव, शरीर में पानी की कमी, खराब नींद, थकान और तनाव जैसे कारण हार्मोन के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से कुछ महिलाओं के पीरियड्स समय से पहले या बाद में आ सकते हैं.
क्या एक महीने में दो बार पीरियड्स आना सामान्य है?
डॉक्टरों का कहना है कि हर महिला का मासिक चक्र अलग होता है. आमतौर पर यह 21 से 35 दिनों के बीच रहता है. अगर किसी महिला का चक्र छोटा है, तो कैलेंडर के हिसाब से एक ही महीने में दो बार पीरियड्स आना संभव है. इसलिए हर बार इसे किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं माना जाता.
क्या हीटवेव ही वजह है या इसके पीछे हैं और भी कारण?
पीरियड्स के समय में बदलाव के पीछे सिर्फ हीटवेव ही जिम्मेदार नहीं होती. डिहाइड्रेशन, मानसिक तनाव, पर्याप्त नींद न लेना, यात्रा, वजन में बदलाव, ज्यादा एक्सरसाइज, थायरॉयड, पीसीओएस (PCOS) और कुछ दवाएं भी मासिक धर्म के चक्र को प्रभावित कर सकती हैं.
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर पीरियड्स कई महीनों तक अनियमित रहें, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो, तेज दर्द हो या पीरियड्स के बीच भी ब्लीडिंग होने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जो यह साबित करे कि हीटवेव सीधे तौर पर पीरियड्स बदल देती है. हालांकि, गर्मी से शरीर पर पड़ने वाला तनाव कुछ महिलाओं में अस्थायी हार्मोनल बदलाव की वजह बन सकता है.




