Begin typing your search...

प्लेजर से पहले करनी चाहिए पार्टनर से गंदी बात! इन बातों का रखें ख्याल, एक्सपर्ट ने तोड़ा बड़ा टैबू

रिश्तों में प्यार और भरोसे के साथ खुला संवाद बेहद जरूरी होता है, लेकिन जब बात सेक्स, प्लेजर या 'गंदी बात' की आती है तो समाज असहज हो जाता है. एक्सपर्ट और मिथोलॉजिस्ट डॉ. सीमा आनंद कहती हैं कि भारतीय परंपराओं में इच्छा और आनंद को कभी गलत नहीं माना गया.

प्लेजर से पहले करनी चाहिए पार्टनर से गंदी बात! इन बातों का रखें ख्याल, एक्सपर्ट ने तोड़ा बड़ा टैबू
X
( Image Source:  Create By AI Sora )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय

Published on: 26 Jan 2026 12:30 PM

रिश्तों में प्यार, भरोसा और खुला संवाद ये तीन चीजें बहुत जरूरी होती हैं. लेकिन जैसे ही बात सेक्स, शारीरिक सुख (प्लेजर) या गंदी बात (डर्टी टॉक) की आती है, तो अचानक बहुत से लोग असहज हो जाते हैं. कोई इसे पूरी तरह गलत और शर्मनाक मान लेता है, तो कोई इसे रिश्ते की चिंगारी और रोमांच कहता है. सच तो यह है कि अपने पार्टनर से ऐसी बातें करना गलत नहीं है बशर्ते दोनों लोग पूरी तरह सहमत हों, सहज महसूस करें और एक-दूसरे का सम्मान करें। यह तरह का संवाद रिश्ते में और गहराई ला सकता है, नजदीकी बढ़ा सकता है और भरोसे को मजबूत बना सकता है

न्यूज 18 के मुताबिक, डॉ. सीमा आनंद (जो लंदन में रहती हैं और प्राचीन भारतीय ग्रंथों की मिथोलॉजिस्ट तथा स्टोरीटेलर हैं) बार-बार यही बात कहती हैं कि भारतीय परंपराओं में इच्छा, काम और आनंद को कभी गंदा नहीं माना गया. कामसूत्र जैसे ग्रंथों में इन बातों को बहुत खुले और सम्मानजनक तरीके से समझाया गया है. लेकिन आज हम शर्म, चुप्पी और समाज के दबाव की वजह से इनसे दूर हो गए हैं. उन्होंने कहा है कि consent is sexy यानी सहमति ही सबसे आकर्षक और जरूरी चीज है. अगर दोनों राजी हैं, तो प्लेजर की बातें करना बिल्कुल ठीक है.

क्या 'गंदी बात' करना सच में गलत है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। ‘गंदी बात’ असल में एक तरह का इंटीमेट कम्युनिकेशन है. यह हमेशा अश्लील शब्दों वाला होना जरूरी नहीं. कभी-कभी यह सिर्फ अपनी इच्छाओं, फंतासियों, पसंद-नापसंद और भावनाओं को शब्दों में बयान करने का तरीका होता है. इससे पार्टनर को समझ आता है कि दूसरे को क्या अच्छा लगता है, क्या नहीं. लेकिन मुख्य बात सहमति है. एक्सपर्ट हमेशा जोर देती हैं कि अगर पार्टनर सहज नहीं है, तो कोई भी बात जबरदस्ती करने से रिश्ता खराब हो सकता है. सहमति के बिना कुछ भी नहीं करना चाहिए.

Create By AI Sora

ऐसी बातें कब और कैसे करनी चाहिए?

ऐसा हर समय सही नहीं होता. अगर पार्टनर ऑफिस से थका-हारा है, तनाव में है या मूड नहीं है, तो अचानक ऐसी बात शुरू करना उल्टा असर कर सकता है. सही समय तब होता है जब दोनों भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हों और अच्छा मूड हो. पहले से हल्की-फुल्की रोमांटिक या फ्लर्टी बातें चल रही हों. दोनों अकेले हों, रिलैक्स हों और कोई जल्दबाजी न हो. माहौल शांत और सुरक्षित लग रहा हो.

किन बातों का ध्यान रखें?

पोर्न से सीखना काफी हद तक गलत हो सकता है. इंटरनेट पर जो वीडियो दिखते हैं, वे ज्यादातर असली जिंदगी के लिए नहीं बने होते. असल रिश्ते में जो दिखावा अच्छा लगता है, वो सामने वाले को पसंद नहीं भी आ सकता है या असहज कर सकता है. शब्दों का चुनाव बहुत मायने रखता है. सम्मानजनक और प्यार भरी भाषा इस्तेमाल करें. अपमानजनक, नीचा दिखाने वाली या आक्रामक बातें बिल्कुल नहीं करनी चाहिए. भाषा ऐसी होनी चाहिए कि सामने वाला सुरक्षित और चाहा हुआ महसूस करे. सिर्फ बोलना ही नहीं, सुनना भी उतना ही जरूरी है. पार्टनर क्या कह रहा है, उसकी बॉडी लैंग्वेज क्या बता रही है, उसकी प्रतिक्रिया क्या है यह सब ध्यान से समझें. अगर कोई असहज लगे, तो तुरंत रुक जाएं. दोनों तरफ से खुलकर बात होनी चाहिए सिर्फ एक तरफ से बोलना काफी नहीं.

Create By AI Sora

खासकर महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है खुलकर बात करना?

डॉ. सीमा आनंद का काम ज्यादातर महिलाओं की खुशी, स्वतंत्रता और आनंद पर केंद्रित है. उनका कहना है कि जब महिलाएं अपनी इच्छाओं, पसंद और जरूरतों को खुलकर नहीं बता पातीं, तो रिश्ता असंतुलित हो जाता है. पुरुष को अंदाजा लगाना पड़ता है, जो अक्सर गलत साबित होता है. प्लेजर पर बात करना सिर्फ शारीरिक सुख के लिए नहीं, बल्कि भावनात्मक आजादी और बराबरी के लिए भी बहुत जरूरी है. जब महिला अपनी खुशी पर बोल पाती है, तो रिश्ता और मजबूत होता है.

अगला लेख