S*# सिर्फ बिस्तर तक नहीं, नर्वस सिस्टम का है खेल; ऐसे बेहतर हो सकती है आपकी लाइफ
सेक्स को लेकर आम धारणा यही है कि यह सिर्फ बिस्तर तक सीमित एक शारीरिक क्रिया है, लेकिन आधुनिक विज्ञान और न्यूरोसाइंस इस सोच को लगातार चुनौती दे रहे हैं.
Somatic Sexology
सेक्स को लेकर आम धारणा यही है कि यह सिर्फ बिस्तर तक सीमित एक शारीरिक क्रिया है, लेकिन आधुनिक विज्ञान और न्यूरोसाइंस इस सोच को लगातार चुनौती दे रहे हैं. आज के दौर में सेक्स को नर्वस सिस्टम, भावनाओं और शरीर में जमा तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
इसी क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की मशहूर सोमैटिक सेक्सोलॉजिस्ट जॉर्जिया ग्रेस इन दिनों दुनियाभर में चर्चा में हैं. खास बात यह है कि जॉर्जिया बिना किसी शारीरिक स्पर्श के लोगों की सेक्स लाइफ और भावनात्मक जुड़ाव को बेहतर बनाने का दावा करती हैं. उनकी "Bottom-Up" थ्योरी और वायरल हो चुकी "Pleasure Journal" आज की तनावभरी जिंदगी में गेम-चेंजर मानी जा रही है.
सेक्स दिमाग का नहीं, नर्वस सिस्टम का खेल
जॉर्जिया ग्रेस का मानना है कि ज्यादातर सेक्सुअल समस्याएं दिमाग में नहीं, बल्कि शरीर में जमा तनाव (Stress) की वजह से होती हैं. वह कहती हैं "पहले शरीर को शांत करो, दिमाग अपने आप प्लेजर के लिए तैयार हो जाएगा." उनकी “Bottom-Up” थ्योरी इसी सिद्धांत पर काम करती है, जिसमें शरीर से शुरू होकर दिमाग तक पहुंचने की प्रक्रिया पर फोकस किया जाता है.
‘ब्रीदवर्क’ का विज्ञान
अगर इंसान तनाव में होता है, तो उसका शरीर "Fight or Flight" मोड में चला जाता है. इस स्थिति में सेक्स की इच्छा लगभग खत्म हो जाती है. जॉर्जिया की पहली और सबसे अहम सलाह है लंबी और गहरी सांस छोड़ने की प्रैक्टिस. उनके मुताबिक यह एक्सहेल नर्वस सिस्टम को यह संकेत देता है कि आप सुरक्षित हैं और अब शरीर रिलैक्स मोड में आ सकता है.
अपने शरीर को फिर से पहचानना है जरूरी
जॉर्जिया की किताब "Pleasure Journal" में एक खास तकनीक बताई गई है, जिसे वह ‘बॉडी स्कैनिंग’ कहती हैं. इस तकनीक में व्यक्ति खुद से सवाल करता है शरीर में खुशी, डर या तनाव कहां महसूस हो रहा है? जॉर्जिया का दावा है कि जब आप अपने शरीर के सिग्नल्स को समझने लगते हैं, तो पार्टनर के साथ आपका कनेक्शन 10 गुना तक बढ़ सकता है.
शर्म है प्लेजर की सबसे बड़ी दुश्मन
जॉर्जिया ग्रेस मानती हैं कि सेक्स से जुड़ी सबसे बड़ी रुकावट शर्म है. इसी वजह से वह अपने क्लाइंट्स को अपनी फैंटेसी, डर और इच्छाओं को लिखने के लिए कहती हैं. उनके अनुसार, लिखने से दिमाग का बोझ हल्का होता है और व्यक्ति अपनी इच्छाओं को लेकर ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करता है.
पूरी तरह प्रोफेशनल और ‘Hands-Off’ सेशन्स
अक्सर लोग सेक्स कोचिंग को गलत नजरिए से देखते हैं, लेकिन जॉर्जिया के सेशन्स पूरी तरह प्रोफेशनल होते हैं. वह अपने क्लाइंट्स को छूती नहीं हैं. उनका तरीका बातचीत, माइंडफुलनेस और न्यूरोसाइंस पर आधारित होता है, जिससे व्यक्ति खुद अपनी बॉडी का एक्सपर्ट बन सके.
सेक्स कोई परफॉरमेंस नहीं, एक रिश्ता है
जॉर्जिया ग्रेस का काम यह सिखाता है कि सेक्स कोई परफॉरमेंस या दबाव नहीं, बल्कि अपने शरीर के साथ एक ईमानदार और गहरा रिश्ता है. जितना इंसान अपनी बॉडी और भावनाओं के प्रति जागरूक होता है, उतनी ही उसकी सेक्स लाइफ और ओवरऑल लाइफ क्वालिटी बेहतर होती जाती है.





