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Writers Building की कहानी, जहां बंगाल की सत्ता शिफ्ट करना चाहती है BJP, कब ममता ने Nabanna को बनाया था CM ऑफिस?

भाजपा बंगाल CM कार्यालय को नबन्ना से वापस राइटर्स बिल्डिंग ले जाना चाहती है. जानिए इसका इतिहास, राजनीति और ममता सरकार से जुड़ा पूरा मामला.

Writers Building history Nabanna West Bengal CM office Mamata Banerjee
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सत्ता के प्रतीकों को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है. भाजपा मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य सचिवालय को हावड़ा स्थित नबन्ना से हटाकर ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में वापस ले जाने की तैयारी में है. करीब ढाई सौ साल पुरानी Writers' Building कभी बंगाल की सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करती थी, जहां से कांग्रेस और वाम मोर्चा सरकारों ने दशकों तक शासन चलाया. लेकिन 2013 में ममता बनर्जी ने सचिवालय को Nabanna शिफ्ट कर दिया था.

जैसे ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के बाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की, एक अहम सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह भगवा पार्टी हावड़ा के 'नबन्ना' से सरकार चलाएगी या कोलकाता की ऐतिहासिक 'राइटर्स बिल्डिंग' से. फिलहाल, भाजपा इसे सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि बंगाल की ऐतिहासिक पहचान और राजनीतिक विरासत से जोड़कर देख रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास क्या है और बंगाल की राजनीति में इसकी इतनी अहमियत क्यों मानी जाती है?

1. क्या है राइटर्स बिल्डिंग का इतिहास और क्यों खास ?

राइटर्स बिल्डिंग (Writers Building) केवल एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक, प्रशासनिक और औपनिवेशिक विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक भी है. इस इमारत का निर्माण 1777 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने “राइटर्स” यानी क्लर्कों और प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए कराया था. इसी वजह से इसका नाम Writers Building पड़ा. धीरे-धीरे यह इमारत ब्रिटिश प्रशासन का प्रमुख केंद्र बन गई और बाद में स्वतंत्र भारत में पश्चिम बंगाल सरकार के सचिवालय के रूप में इस्तेमाल होने लगी.

आजादी के बाद से लेकर 2013 तक लगभग हर मुख्यमंत्री ने इसी इमारत से सरकार चलाई. कांग्रेस शासन से लेकर 34 साल के वाम शासन तक Writers' Building बंगाल की सत्ता का असली केंद्र रहा. यही वह जगह थी जहां से ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य जैसे बड़े नेताओं ने प्रशासन चलाया. बंगाल की राजनीति में यह इमारत केवल ऑफिस नहीं, बल्कि “सत्ता के प्रतीक” के रूप में देखी जाती रही है.

2. कब बना मुख्यमंत्री कार्यालय और क्यों था इतना महत्वपूर्ण?

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का आधिकारिक कार्यालय दशकों तक Writers' Building में ही रहा. खास तौर पर पहली और दूसरी मंजिल प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र थीं. मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव, वित्त और गृह विभाग जैसे अहम मंत्रालय इसी परिसर में संचालित होते थे.

बंगाल की राजनीतिक संस्कृति में Writers' Building का एक भावनात्मक महत्व भी रहा. यह इमारत ब्रिटिश राज से लेकर वामपंथी राजनीति तक हर दौर की गवाह रही है. यहां तक कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी इस इमारत का नाम चर्चाओं में रहा. 1930 में क्रांतिकारी Benoy Basu, Badal Gupta और Dinesh Gupta ने यहीं ब्रिटिश अधिकारी सिम्पसन पर हमला किया था. इसलिए यह इमारत बंगाल की राजनीतिक चेतना का हिस्सा भी मानी जाती है.

3. CM दफ्तर Writers' Building से नबन्ना कब और क्यों शिफ्ट हुआ?

साल 2011 में सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव शुरू किए. अक्टूबर 2013 में उन्होंने राज्य सचिवालय और मुख्यमंत्री कार्यालय को Writers' Building से हटाकर Nabanna शिफ्ट कर दिया.

सरकार की ओर से इसके पीछे कई प्रशासनिक कारण बताए गए. Writers' Building काफी पुरानी हो चुकी थी, वहां जगह की कमी थी, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं मानी जा रही थी. इसके अलावा इमारत के बड़े हिस्से में मरम्मत और पुनर्निर्माण की जरूरत थी.

नबन्ना, दरअसल हावड़ा में स्थित एक आधुनिक प्रशासनिक भवन है, जिसे शुरुआत में राज्य सरकार के दूसरे विभागों के लिए विकसित किया गया था. बाद में इसे मुख्यमंत्री कार्यालय और सचिवालय के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा. ममता सरकार का तर्क था कि नई इमारत अधिक आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और प्रशासनिक रूप से सुविधाजनक है.

धीरे-धीरे नबन्ना ममता बनर्जी की राजनीति और प्रशासनिक शैली का प्रतीक बन गया. जिस तरह Writers' Building वाम मोर्चा शासन की पहचान थी, उसी तरह नबन्ना तृणमूल कांग्रेस सरकार की पहचान बन गया.

नबन्ना ​हाईराइज बिल्डिंग को लेकर चुनाव से पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार राज्य सचिवालय से नहीं, बल्कि पार्टी द्वारा पनाह दिए गए अपराधियों द्वारा चलाई जा रही है.

इससे पहले, BJP के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के हवाले से कहा था कि BJP राइटर्स बिल्डिंग से ही प्रशासन चलाएगी. उन्होंने कहा कि BJP ने 2021 में ही यह साफ कर दिया था कि अगर पार्टी सत्ता में आती है, तो वह राइटर्स बिल्डिंग से ही सरकार चलाएगी.

4. BJP नबन्ना से वापस Writers' Building क्यों जाना चाहती है?

अब भाजपा बंगाल में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं के बीच फिर से Writers' Building को सत्ता का केंद्र बनाने की बात कर रही है. पार्टी नेताओं का मानना है कि बंगाल की ऐतिहासिक पहचान और प्रशासनिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय को वापस वहीं लाना जरूरी है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पार्टी लंबे समय से Writers' Building से सरकार चलाने की बात करती रही है. पार्टी इसे केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि “बंगाल की आत्मा से जुड़ाव” के तौर पर पेश कर रही है.

BJP मानती है कि जब सचिवालय को Writers' Building से हटाया गया था, तब बंगाल के लोगों को भावनात्मक तौर पर ठेस पहुंची थी. पार्टी इसी भावना को राजनीतिक रूप से जोड़ना चाहती है. इसके पीछे एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश भी है. ममता बनर्जी के प्रशासनिक मॉडल से अलग सीएम दफ्तर को प्रशासनिक और नई राजनीतिक पहचान देना है.

दरअसल, यह कदम केवल दफ्तर बदलने का मामला नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता संस्कृति बदलने का संदेश भी हो सकता है. भाजपा Writers' Building को बंगाल की ऐतिहासिक गौरव और प्रशासनिक निरंतरता के प्रतीक के रूप में स्थापित करना चाहती है.

5. सीएम दफ्तर के लिए Writers' Building है तैयार?

सूत्रों के मुताबिक फिलहाल Writers' Building के ब्लॉक 1 और 2 को जल्दी शुरू करने की तैयारी चल रही है. दूसरी मंजिल पर फर्श और मरम्मत का काम लगभग पूरा हो चुका है. संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में मुख्यमंत्री कार्यालय दूसरी मंजिल पर बनाया जा सकता है क्योंकि वहां पर्याप्त खुला और बड़ा प्रशासनिक स्पेस मौजूद है.

हालांकि, पहली मंजिल, जहां कभी पूर्व मुख्यमंत्री Buddhadeb Bhattacharjee का कार्यालय हुआ करता था, वहां अभी भी काम जारी है. पूरी मरम्मत परियोजना की लागत लगभग 102 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभी पूरे भवन को एक साथ चालू करना संभव नहीं है. कुछ इंजीनियरिंग कार्यालयों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ेगा. लेकिन भाजपा अगर सत्ता में आती है तो Writers' Building को फिर से बंगाल की सत्ता का केंद्र बनाने की कोशिश तेज हो सकती है.

बंगाल में लड़ाई अब केवल चुनावी नहीं, बल्कि प्रतीकों और विरासत की राजनीति तक पहुंच चुकी है. एक तरफ नबन्ना “ममता युग” की पहचान है, तो दूसरी तरफ Writers' Building बंगाल के ऐतिहासिक सत्ता केंद्र का प्रतीक. अब देखना होगा कि भविष्य में बंगाल की राजनीति किस इमारत से संचालित होती है.

ममता बनर्जी
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