Begin typing your search...

केरल की Vlogger को अफगानिस्तान में क्यों पकड़ लिया गया, फिर 2-3 घंटे बाद ऐसे छोड़ा, जानें क्या है पूरा मामला

अफगानिस्तान में अकेले सफर कर रहीं Backpacker Arunima के लिए बामियान में अचानक हालात मुश्किल हो गए. बिना जरूरी अनुमति के यात्रा करने और महिला के अकेले होने पर उनसे पूछताछ की गई, जिसके बाद कुछ घंटों तक उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया.

Backpacker Arunima
X
( Image Source:  instagram-@backpacker_arunima )
हेमा पंत
Edited By:हेमा पंत7 Mins Read

Updated on: 15 Sept 2026 11:19 AM IST

केरल की ट्रैवल व्लॉगर Backpacker Arunima अफगानिस्तान के बामियान में उस वक्त मुश्किल में फंस गईं, जब स्थानीय अधिकारियों ने उन्हें अकेले सफर करने और जरूरी कागज नहीं होने को लेकर रोक लिया. अरुणिमा ने पहले मदद मांगते हुए बताया कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है, जिससे सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया.

बाद में उन्होंने बताया कि मामला असल में गिरफ्तारी की चेतावनी तक था. एक स्थानीय व्यक्ति की मदद से अधिकारियों से बातचीत हुई और करीब 2-3 घंटे बाद उन्हें आगे जाने दिया गया. अरुणिमा के मुताबिक, अकेली महिला होने की वजह से उन्हें वहां कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ा.

कौन हैं Backpacker Arunima?

Backpacker Arunima के नाम से मशहूर अरुणिमा केरल की ट्रैवल व्लॉगर हैं. उन्हें खासतौर पर अकेले और कम घूमे जाने वाले इलाकों में यात्रा करने के लिए जाना जाता है. वह लंबे समय से अलग-अलग देशों की यात्राएं कर रही हैं और अपने अनुभव सोशल मीडिया पर लोगों के साथ शेयर करती रहती हैं.

उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें फॉलो करते हैं. वह यात्रा के दौरान स्थानीय लोगों, वहां की संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी को अपने वीडियो के जरिए दिखाती हैं. अफगानिस्तान की यात्रा के दौरान भी वह लगातार अपनी तस्वीरें और वीडियो पोस्ट कर रही थीं.

कहां गई थी अरूणिमा?

अरुणिमा पिछले कुछ समय से अफगानिस्तान में थीं. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने वहां महिलाओं के लिए लागू कई पाबंदियों का जिक्र किया था. उन्होंने बताया था कि अकेले घूमने वाली महिला के लिए वहां सफर करना आसान नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि कई जगहों पर उन्हें अपने कपड़ों को लेकर सावधानी बरतनी पड़ी. बाद में उन्होंने अफगानिस्तान में स्थानीय महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले चादरी जैसे कपड़े में अपनी तस्वीरें भी शेयर कीं. उनके मुताबिक, वहां के माहौल और नियमों को समझते हुए उन्हें अपनी यात्रा का तरीका बदलना पड़ा.

14 सितंबर को बामियान में क्या हुआ?

14 सितंबर को अरुणिमा की एक पोस्ट ने अचानक सबका ध्यान खींच लिया. उन्होंने बामियान से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें वहां रोक लिया गया है. उनके द्वारा शेयर किए गए एक स्थानीय संवाद के अनुवाद में यह संकेत दिया गया कि उन्हें ‘मुजाहिदीन’ ने इसलिए पकड़ा क्योंकि उनके पास जरूरी आधिकारिक पत्र नहीं था. इसके बाद उन्होंने भारत की ओर से मदद पाने की कोशिश की और भारतीय दूतावास से संपर्क कराने की अपील की. उनकी पोस्ट तेजी से वायरल हुई और लोग उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल पूछने लगे. लेकिन इस शुरुआती दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई थी. बाद की जानकारी में यह सामने आया कि मामला पूरी तरह गिरफ्तारी तक नहीं पहुंचा था.

अकेले सफर को लेकर क्यों उठे सवाल?

अरुणिमा के मुताबिक, बामियान में स्थानीय अधिकारियों ने उनके अकेले यात्रा करने पर आपत्ति जताई. उनसे यात्रा से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी सवाल किए गए. उन्होंने बताया कि वहां महिलाओं के अकेले सफर करने को लेकर सख्त नियम बताए गए. उनके पास अकेले यात्रा करने के लिए जरूरी परमिट या अनुमति नहीं थी. इसी वजह से अधिकारियों के साथ उनकी बातचीत तनावपूर्ण हो गई. अरुणिमा का कहना था कि वह आगे उज्बेकिस्तान की ओर जाने की तैयारी कर रही थीं. लेकिन उन्हें बताया गया कि नियमों का पालन किए बिना अफगानिस्तान में रहने के कारण उन्हें जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

किसने की अरुणिमा की मदद?

स्थिति बिगड़ने पर अरुणिमा ने ऐसे स्थानीय व्यक्ति से मदद मांगी, जिसे वह पहले से जानती थीं और जिसने उनकी यात्रा में पहले भी सहायता की थी. उस व्यक्ति ने स्थानीय अधिकारियों से बात की और अरुणिमा के मामले को समझाने की कोशिश की. बातचीत के बाद स्थिति कुछ सामान्य हुई. अरुणिमा को बताया गया कि उन्हें बिना जरूरी अनुमति के आगे जाने में परेशानी हो सकती है. हालांकि, आखिरकार मामला बातचीत के जरिए सुलझ गया और उन्हें वहां से आगे बढ़ने की अनुमति मिल गई.

अरुणिमा ने अपने एक्सपीरियंस के बारे में क्या कहा?

अरुणिमा ने बाद में अपने अनुभव को बेहद डरावना बताया. उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर हो रही है. उनके मुताबिक, उन्हें डर था कि अगर बात नहीं बनी तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है. उन्होंने यह भी बताया कि वह स्थानीय व्यक्ति से मदद की गुहार लगाती रहीं. उनकी कोशिश थी कि किसी तरह अधिकारियों को समझाया जाए और उन्हें सुरक्षित तरीके से वहां से जाने दिया जाए. अरुणिमा के अनुसार, बातचीत और समझौते के बाद उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत मिल गई. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बिना परमिट के आगे जाने की अनुमति नहीं मिली, लेकिन मामला गिरफ्तारी तक पहुंचने से पहले ही खत्म हो गया.

अफगानिस्तान के नियमों को लेकर क्या बोलीं?

अपनी यात्रा के दौरान अरुणिमा ने कई बार अफगानिस्तान में महिलाओं पर लागू पाबंदियों का जिक्र किया. उनका कहना था कि अकेली महिला के तौर पर यात्रा करने पर उन्हें पुरुष यात्रियों की तुलना में ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि उनके कुछ पुरुष परिचित बिना ऐसी परेशानियों के यात्रा कर पा रहे थे, जबकि महिलाओं के लिए स्थानीय गाइड या पुरुष साथी की जरूरत बताई जा रही थी. उन्होंने अपनी यात्रा के अनुभवों के आधार पर वहां के माहौल को महिलाओं के लिए काफी मुश्किल बताया.

‘गिरफ्तार’ हुई थीं या सिर्फ चेतावनी मिली?

इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यही है. शुरुआत में अरुणिमा की पोस्ट से ऐसा लगा कि उन्हें बामियान में गिरफ्तार कर लिया गया है. इसी वजह से भारतीय दूतावास से मदद मांगने की खबर सामने आई. लेकिन बाद में उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि उन्हें गिरफ्तारी की धमकी या चेतावनी दी गई थी, लेकिन उनकी वास्तविक गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई. अधिकारियों से बातचीत के बाद मामला सुलझा और उन्हें आगे जाने दिया गया.

इसलिए इस घटना को लेकर ‘गिरफ्तारी’ शब्द का इस्तेमाल सावधानी से करना जरूरी है. फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अरुणिमा को रोका गया, उनसे दस्तावेजों और अकेले सफर को लेकर पूछताछ हुई और स्थिति गंभीर होने के बाद बातचीत से मामला शांत हुआ.

अगला लेख