कौन था पीटर उनीस्तोव जिसे इंदिरा गांधी को देना था इंटरव्यू, रिकॉर्डिंग से पहले हो गई PM की हत्या, 31 अक्टूबर 1984 को सुबह से लेकर शाम तक क्या-क्या हुआ?
ब्रिटिश एक्टर, लेखक और दो बार ऑस्कर जीत चुके पीटर उस्तीनोव एक डॉक्यूमेंट्री के लिए इंदिरा गांधी का इंटरव्यू लेने भारत आए थे, लेकिन 31 अक्टूबर 1984 को पीएम को उनके सुरक्षाकर्मियों ने गोली मार कर हत्या की.
तारीख थी 31 अक्टूबर 1984 और जगह थी दिल्ली का 1 सफदरजंग रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास. सुबह का वक्त था. सब कुछ रोज की तरह सामान्य दिखाई दे रहा था. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने दिन की शुरुआत कर चुकी थीं. उन्हें एक ब्रिटिश अभिनेता का इंटरव्यू देना था, जो आयरिश टेलीविजन के लिए दुनिया के बड़े नेताओं पर डॉक्यूमेंट्री बना रहे थे. उनका नाम था पीटर उस्तीनोव. कैमरे और इंटरव्यू की दूसरी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों में वहां ऐसा हादसा होने वाला है, जो पूरे देश को हिलाकर रख देगा.
इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षाकर्मियों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इसका कारण ऑपरेशन ब्लू स्टार थे, जिससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई थी. आइए जानते हैं उस दिन सुबह से लेकर शाम तक क्या-क्या हुआ और कौन थे पीटर उस्तीनोव, जिनकी इंदिरा गांधी से होने वाली बातचीत हमेशा के लिए अधूरी रह गई.
31 अक्टूबर 1984 की सुबह क्या हुआ था?
- 30 अक्टूबर की रात ओडिशा में चुनावी सभाएं करने के बाद इंदिरा गांधी दिल्ली वापस आ गई थीं. 31 अक्टूबर की सुबह उन्होंने रोज की तरह अपने दिन की शुरुआत की. उस दिन उनके सामने कई जरूरी इवेंट थे. सुबह ब्रिटिश अभिनेता पीटर उस्तीनोव को उन्हें एक इंटरव्यू देना था. इसके बाद दोपहर में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री जेम्स कैलेघन से मुलाकात तय थी. शाम को ब्रिटेन की राजकुमारी ऐन के सम्मान में रात्रिभोज भी रखा गया था.
- सुबह 7:30 से 8 बजे के बीच: इंदिरा गांधी अपने दिन के कामों के लिए तैयार होने लगीं. इंटरव्यू को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मेकअप कराया और दूसरे कार्यक्रमों की तैयारी की. दूसरी ओर, ब्रिटिश अभिनेता पीटर उस्तीनोव अपनी फिल्म बनाने वाली टीम के साथ इंटरव्यू रिकॉर्ड करने की तैयारियों में लगे हुए थे.
- सुबह 9:09 बजे: इंदिरा गांधी अपने सरकारी आवास 1 सफदरजंग रोड से निकलकर पास ही मौजूद 1 अकबर रोड स्थित कार्यालय की ओर पैदल बढ़ीं. उनके साथ कुछ कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात जवान भी चल रहे थे. इस दौरान उनके सहायक नारायण सिंह ने धूप से बचाने के लिए उनके सिर के ऊपर छाता पकड़ रखा था.
गेट पर पहुंचते ही चलीं गोलियां
इंदिरा गांधी जैसे ही 1 सफदरजंग रोड और 1 अकबर रोड को जोड़ने वाले रास्ते पर बने गेट के करीब पहुंचीं, वहां मौजूद उनके दो सुरक्षाकर्मियों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने उन पर हमला कर दिया. पहले बेअंत सिंह ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से तीन गोलियां चलाईं. इसके तुरंत बाद सतवंत सिंह ने स्टेनगन से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. गोलियां लगने से इंदिरा गांधी वहीं जमीन पर गिर पड़ीं.
इस घटना से कुछ दूरी पर ब्रिटिश एक्टर पीटर उस्तीनोव अपनी टीम के साथ इंटरव्यू शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. वहां चाय का इंतजाम भी किया गया था. तभी उन्हें अचानक गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी. शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद कहीं पटाखे फोड़े जा रहे हैं, लेकिन कुछ ही पलों में मशीनगन की आवाज भी सुनाई देने लगी. इसके बाद आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और माहौल अफरा-तफरी में बदल गया.
सुबह 9:30 बजे एम्स पहुंचीं इंदिरा गांधी
- इंदिरा गांधी को गोलियां लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की जल्दबाजी में कोशिश की गई. उनके आवास पर खड़ी एंबुलेंस का ड्राइवर उस वक्त वहां मौजूद नहीं था. ऐसे में उन्हें बिना देर किए सरकारी गाड़ी से दिल्ली के एम्स ले जाने का फैसला किया गया.
- सुबह करीब 9:30 बजे: इंदिरा गांधी को एम्स पहुंचाया गया. वहां डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनका इलाज शुरू कर दिया. उन्हें बचाने के लिए डॉक्टरों ने हर मुमकिन कोशिश की. इस दौरान उन्हें काफी 80 बोतल खून भी चढ़ाया गया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही और इलाज का कोई असर नहीं हुआ.
- दोपहर करीब 2:20 बजे: कई घंटों तक चले इलाज के बाद डॉक्टरों ने इंदिरा गांधी को मृत घोषित कर दिया. प्रणब मुखर्जी दोपहर 3:25 बजे एम्स पहुंच गए थे.
- इसके बाद शाम 4:10 बजे प्रणब मुखर्जी एम्स से निकलकर 1 अकबर रोड स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए रवाना हुए। उनका मकसद कांग्रेस संसदीय बोर्ड (CPB) की बैठक बुलाने की व्यवस्था करना था.
- इसी बीच राजीव गांधी ने अपनी नई सरकार के शुरुआती मंत्रिमंडल को लेकर फैसला कर लिया था. उन्होंने तीन नेताओं- पी.वी. नरसिंह राव, शिव शंकर और प्रणब मुखर्जी को मंत्री पद की शपथ दिलाने की योजना बनाई. हालांकि, प्रणब मुखर्जी ने उन्हें एक और नाम शामिल करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि सिख समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए बूटा सिंह को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए. राजीव गांधी ने उनकी इस सलाह को स्वीकार कर लिया.
- शाम करीब 5 बजे आकाशवाणी के जरिए देश को बताया गया कि इंदिर गांधी की मौत हो चुकी है. इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से राजीव गांधी को नई सरकार बनाने का औपचारिक निमंत्रण मिला. उन्होंने शपथ लेने वाले मंत्रियों के नामों की सूची राष्ट्रपति को सौंप दी. आखिरकार उसी दिन शाम 6:45 बजे राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. इस तरह कुछ ही घंटों के भीतर देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई.
क्यों लेना चाहते थे इंदिरा गांधी का इंटरव्यू?
पीटर उस्तीनोव आयरिश टीवी के लिए एक खास डॉक्यूमेंट्री बना रहे थे, जिसमें दुनिया के प्रमुख नेताओं की जिंदगी और उनके विचारों को सामने लाना था. इसी प्रोजेक्ट के तहत वह भारत पहुंचे थे. यहां उनकी योजना इंदिरा गांधी का इंटरव्यू लेने की थी, ताकि वह उनके राजनीतिक सफर, व्यक्तिगत विचारों और प्रधानमंत्री के तौर पर मिले अनुभवों को करीब से जान सकें. लेकिन 31 अक्टूबर 1984 की सुबह एक ऐसी घटना हुई कि दोनों के बीच होने वाली यह मुलाकात कभी हो ही नहीं सकी.
कौन थे पीटर उस्तीनोव?
पीटर उस्तीनोव सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि ब्रिटेन की जानी-मानी हस्तियों में शामिल थे. उन्होंने एक्टर, लेखक, निर्देशक और टीवी प्रजेंटर के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी. उनका जन्म 16 अप्रैल 1921 को लंदन में हुआ था. फिल्मों में बेहतरीन काम के लिए उन्हें दो बार ऑस्कर से नवाजा गया. ये पुरस्कार उन्हें 'स्पार्टाकस' और 'टॉपकापी' फिल्मों में एक्टिंग के लिए मिले थे. इसके अलावा उन्होंने अपने करियर में तीन एमी और एक ग्रैमी पुरस्कार भी जीता.
यूनिसेफ के गुडविल एंबेसडर थे पीटर?
पीटर उस्तीनोव की पहचान केवल फिल्मों में एक्टिंग करने तक नहीं थी. उन्हें लेखन, निर्देशन और दुनिया से जुड़े अलग-अलग मुद्दों पर अपने विचार रखने में भी गहरी रुचि थी. उनकी हाजिरजवाबी और दिलचस्प अंदाज में किस्से सुनाने की कला भी लोगों को खूब पसंद आती थी. साल 1968 में उन्हें यूनिसेफ का गुडविल एंबेसडर बनाया गया. इसके बाद उन्होंने दुनियाभर में बच्चों के अधिकारों की आवाज उठाई और उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम किया.
पीटर की पर्सनल लाइफ कैसी थी?
पीटर उस्तीनोव ने अपने जीवन में तीन शादियां की थीं. उनकी पहली शादी 1940 में इसोल्डे डेनहम से हुई थी. दोनों की एक बेटी तमारा थी, लेकिन 1950 में उनका तलाक हो गया. इसके बाद 1954 में उन्होंने सुज़ैन क्लाउटियर से शादी की. इस रिश्ते से उनकी दो बेटियां पावला और एंड्रिया और एक बेटा इगोर हुआ. 1971 में दोनों अलग हो गए. साल 1972 में पीटर ने हेलेन डू लॉ डी'एलेमैन्स से तीसरी शादी की, जो 2004 में उनके निधन तक उनके साथ रहीं.
कैसे हुए पीटर की मौत?
उम्र बढ़ने के साथ पीटर उस्तीनोव को डायबिटीज और दिल से जुड़ी परेशानियों ने घेर लिया था. 28 मार्च 2004 को 82 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली. स्विट्जरलैंड के बर्सिन्स में अपने घर के पास स्थित जेनोलीयर के एक क्लिनिक में हार्ट फेल होने की वजह से उनका निधन हो गया.
शाम होते-होते दिल्ली में भड़क उठे दंगे
इंदिरा गांधी की हत्या की खबर फैलते ही देशभर में तनाव बढ़ने लगा. हत्या में शामिल सुरक्षाकर्मियों की धार्मिक पहचान सामने आने के बाद दिल्ली में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क उठी. कई जगह लोगों के घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया. गाड़ियों और संपत्तियों में आग लगा दी गई. देखते ही देखते राजधानी समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे फैल गए. दरअसल, जून 1984 में इंदिरा गांधी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे हथियारबंद उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार का आदेश दिया था. इस सैन्य कार्रवाई में कई लोगों की जान गई और स्वर्ण मंदिर परिसर को भी नुकसान पहुंचा था. इससे सिख समुदाय के एक वर्ग में गहरी नाराजगी थी. इंदिरा गांधी की हत्या के पीछे भी इसी घटना से जुड़ा आक्रोश एक बड़ी वजह माना गया.




