ननद के खिलाफ ताल ठोकने वाली Sunetra Pawar कौन? खुद बनेंगी BOSS या महाराष्ट्र की सियासत को देंगी नया मोड़
महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाले हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद सत्ता और संगठन दोनों में अनिश्चितता गहराई है. बारामती विमान हादसे ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया. अब निगाहें उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार पर हैं, जिन्हें एनसीपी (अजित गुट) की संभावित नई धुरी माना जा रहा है. सहानुभूति, पारिवारिक विरासत और राजनीतिक नेटवर्क उन्हें निर्णायक भूमिका में ला सकते हैं.
महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह बुधवार एक ऐसे सदमे के साथ आया, जिसने सत्ता, संगठन और भावनाओं- तीनों को झकझोर दिया. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के प्रमुख और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती के पास हुए एक भीषण चार्टर विमान हादसे में निधन हो गया. खबर फैलते ही पूरे महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई और महायुति सरकार से लेकर विपक्ष तक हर खेमे में स्तब्धता छा गई.
इस दुखद घटना के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में नेतृत्व, उत्तराधिकार और भविष्य की दिशा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे ज्यादा निगाहें टिकी हैं अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार पर क्या वह अब एनसीपी (अजित गुट) की नई धुरी बनेंगी? क्या वह केवल मार्गदर्शक भूमिका में रहेंगी या सत्ता के केंद्र में कदम रखेंगी?
बारामती के पास विमान हादसा, पूरे राज्य में शोक
बताया जा रहा है कि अजित पवार का चार्टर विमान बारामती के पास इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश के दौरान क्रैश हो गया. विमान में कुल पांच लोग सवार थे और इस हादसे में सभी की मौत हो गई. दुर्घटना की खबर आते ही प्रशासन, पुलिस और वरिष्ठ नेता मौके पर पहुंचे. बारामती में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं.
हादसे के वक्त परिवार कहां था?
हादसे के समय अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार दिल्ली में थीं. वह मंगलवार शाम ही संसद सत्र के लिए राजधानी पहुंची थीं और अपने सरकारी आवास पर सुबह की बैठकों की तैयारी कर रही थीं. परिवार ने रणनीतिक तौर पर उन्हें मौत की खबर तब तक नहीं बताई, जब तक वह महाराष्ट्र के लिए रवाना नहीं हो गईं- क्योंकि आशंका थी कि अचानक सदमे से उनकी तबीयत बिगड़ सकती है. सूत्रों के मुताबिक, पुणे के जिला कलेक्टर और ग्रामीण एसपी ने फोन पर सुनेत्रा पवार को बताया कि विमान में आग लग गई है. मौत की पुष्टि उस वक्त नहीं की गई. खबर सुनते ही वह बदहवास हो गईं और फर्श पर बैठ गईं. आवास पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और स्टाफ ने उन्हें संभाला.
बेटे कहां थे, किसे मिली पहले सूचना?
बड़े बेटे पार्थ पवार मुंबई में थे और नरीमन पॉइंट स्थित पार्टी दफ्तर में एक अहम संगठनात्मक बैठक के लिए पहुंचने वाले थे. उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से फोन कर हादसे की जानकारी दी गई. पार्थ तुरंत हेलीकॉप्टर से बारामती के लिए रवाना हुए. छोटे बेटे जय पवार उस समय पुणे में अपने व्यवसायिक कामकाज में व्यस्त थे. हादसे की खबर मिलते ही वह सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और फिर अस्पताल गए. इस दौरान शरद पवार के पोते और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार भी मौके पर पहुंचे.
कौन हैं अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार?
महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का नाम दशकों से प्रभावशाली रहा है. इसी परिवार की एक अहम लेकिन अपेक्षाकृत शांत शख्सियत हैं सुनेत्रा पवार, जो सिर्फ अजित पवार की पत्नी भर नहीं, बल्कि अपने दम पर सामाजिक, औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में मजबूत पहचान बना चुकी हैं. खेती-किसानी से जुड़े राजनीतिक परिवार से आने वाली सुनेत्रा पवार बहुआयामी व्यक्तित्व की धनी हैं. अजित पवार जैसे छह बार डिप्टी मुख्यमंत्री रह चुके कद्दावर नेता की पत्नी होने के बावजूद सुनेत्रा पवार कभी उनकी छाया में सिमटी नजर नहीं आईं. उन्होंने राजनीति से इतर समाजसेवा, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग जगह बनाई और धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन में एक सशक्त नाम के रूप में उभरीं.
सुनेत्रा अजित पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को हुआ. वह महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित और प्रभावशाली पवार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं और वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं. वर्ष 1985 में उनका विवाह अजित पवार से हुआ, जिसके बाद उन्होंने सामाजिक कार्यों के साथ-साथ राजनीति में भी धीरे-धीरे अपनी स्वतंत्र पहचान बनाई. वर्तमान में वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाली राज्यसभा सांसद हैं. जून 2024 में प्रफुल्ल पटेल के इस्तीफे से खाली हुई राज्यसभा सीट पर उन्हें निर्विरोध निर्वाचित किया गया, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में उनकी औपचारिक और सशक्त एंट्री मानी गई.
क्यों कहलाती हैं ब्यूटी विद ब्रेन?
सुनेत्रा पवार ने वर्ष 1980 में पुणे विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई पूरी की. ‘ब्यूटी विद ब्रेन’ कही जाने वाली सुनेत्रा की शादी अजित पवार से अरेंज मैरिज के रूप में हुई थी, जो समय के साथ एक मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते में बदल गई. इस दंपति के दो बेटे हैं. वर्ष 2010 में उन्होंने एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया (EFOI) की स्थापना की, जो जैविक खेती, इको-विलेज और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाला एक सक्रिय एनजीओ है. पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें ‘ग्रीन वॉरियर अवॉर्ड’ समेत कई सम्मान मिले. वर्ष 2011 से वह फ्रांस स्थित वर्ल्ड एंटरप्रेन्योरशिप फोरम की थिंक टैंक सदस्य हैं. इसके अलावा, वह शरद पवार द्वारा स्थापित विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्य भी हैं.
समाजसेवा से उद्योग तक सक्रिय भूमिका
सुनेत्रा पवार वर्तमान में बारामती टेक्सटाइल कंपनी की चेयरपर्सन हैं, जो महाराष्ट्र की ग्रामीण और औद्योगिक अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम सेक्टर में काम करती है. इसके अलावा, वर्ष 2010 में उन्होंने एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया (EFOI) की स्थापना की. यह एनजीओ जैविक खेती, इको-विलेज और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर सक्रिय है. सतत विकास के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें ‘ग्रीन वॉरियर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा चुका है.
शिक्षा और वैश्विक मंच पर पहचान
सुनेत्रा पवार 2011 से फ्रांस स्थित वर्ल्ड एंटरप्रेन्योरशिप फोरम की थिंक टैंक सदस्य भी हैं, जहां उद्यमिता और सतत विकास पर वैश्विक विमर्श होता है. इसके साथ ही वे शरद पवार द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्था विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी हैं, जहां 25 हजार से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. वर्ष 2017 से वह सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की सीनेट सदस्य भी हैं और उच्च शिक्षा नीति से जुड़े निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
एक दिग्गज का सफर और महायुति में खालीपन
अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के ‘पावर हाउस’ माने जाते थे. शरद पवार के भतीजे के रूप में उन्होंने राजनीति में कदम रखा, लेकिन अपने कड़क फैसलों और प्रशासनिक पकड़ से अलग पहचान बनाई. 2019 में बीजेपी के साथ अचानक शपथ लेना हो या 2023 में एक बार फिर बगावत कर एकनाथ शिंदे–देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल होना. अजित पवार के फैसले अक्सर चौंकाने वाले रहे. उनके निधन से महायुति- बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित) में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसे भरना आसान नहीं होगा. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शोक जताते हुए कहा, ‘मैंने अपना एक छोटा भाई और राज्य ने एक दूरदर्शी नेतृत्व खो दिया है’.
सुनेत्रा पवार: क्या बनेंगी एनसीपी की नई धुरी?
अजित पवार के निधन के बाद सबसे बड़ा सवाल एनसीपी (अजित गुट) के भविष्य को लेकर है. पार्टी में प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और दिलीप वळसे पाटिल जैसे कद्दावर नेता हैं, लेकिन सहानुभूति और पारिवारिक विरासत सुनेत्रा पवार को अलग बढ़त देती है. 2024 में सक्रिय राजनीति में उतरीं सुनेत्रा पवार ने भले ही बारामती लोकसभा सीट से हार का सामना किया हो, लेकिन राज्यसभा सांसद के रूप में उनके पास राष्ट्रीय मंच है. संगठन, सामाजिक नेटवर्क और मौजूदा परिस्थितियों में सहानुभूति- ये तीनों कारक उन्हें संभावित ‘मैट्रिआर्क’ के रूप में स्थापित कर सकते हैं.
आगे क्या?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एनसीपी (अजित गुट) शरद पवार के साथ पुनर्मिलन की राह चुनती है या सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार संगठन की कमान संभालते हैं. फिलहाल, पूरा महाराष्ट्र अपने ‘दादा’ को अंतिम विदाई देने की तैयारी में है- एक ऐसे नेता को, जिसने राज्य की राजनीति को दशकों तक दिशा दी.





