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कौन है मोहम्मद इरफान, जो जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से वायरल हो गया, राहुल गांधी भी मिलने पहुंचे

जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन के दौरान एक इंटरव्यू से चर्चा में आए मोहम्मद इरफान सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं. दिल्ली की झुग्गी में रहने वाले 35 वर्षीय दिहाड़ी मजदूर इरफान औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद Google Voice Search और AI की मदद से संविधान, राजनीति और सामाजिक मुद्दों की जानकारी जुटाते हैं.

कौन है मोहम्मद इरफान, जो जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से वायरल हो गया, राहुल गांधी भी मिलने पहुंचे
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया CJP प्रदर्शन के बीच कई चेहरे चर्चा में आए, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान ने. न वह किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी हैं, न किसी छात्र संगठन के नेता और न ही चुनावी राजनीति से उनका कोई संबंध है. इसके बावजूद मजदूरों, संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक असमानता पर उनकी बेबाक बातों ने उन्हें सोशल मीडिया पर रातों-रात चर्चा का विषय बना दिया.

लल्लनटॉप को दिए गए एक इंटरव्यू के बाद मोहम्मद इरफान को लाखों लोगों ने सुना और उनके वीडियो की जमकर सोशल मीडिया पर चर्चा हुई. उनके विचारों की तारीफ करते हुए कई लोगों ने उन्हें आम आदमी की आवाज बताया. मामला इतना आगे बढ़ा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी 27 जुलाई को मिलने पहुंचे और उनकी बातें सुनने के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए एक मैसेज शेयर किया. आइए इस कहानी में जानते हैं कौन हैं जंतर-मंतर पर वायरल चेहरा मोहम्मद इरफान जिसकी बातों ने जीत लिया सबका दिल?

कौन हैं मोहम्मद इरफान?

मोहम्मद इरफान दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर हैं. वह सड़क किनारे बर्फ की सिल्ली बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं. उनके परिवार में माता-पिता और दो बहनें हैं. उनका घर बेहद साधारण है और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार जीवनयापन करता है. इरफान कभी स्कूल नहीं गए. वह न पढ़ सकते हैं और न ही लिख सकते हैं. बचपन में केवल आंगनवाड़ी तक ही उनकी पहुंच रही. इसके बावजूद उन्होंने अपनी सीखने की अलग राह बनाई.

Google Voice Search बना उनका 'स्कूल'

इरफान बताते हैं कि उनके पास औपचारिक शिक्षा नहीं है, इसलिए उन्होंने अपने स्मार्टफोन को ही अपना शिक्षक बना लिया. वह Google Voice Search और AI आधारित टूल्स के जरिए इतिहास, संविधान, राजनीति, साहित्य और समसामयिक विषयों के बारे में जानकारी सुनते हैं. उनका कहना है कि यदि किसी जानकारी पर संदेह होता है तो वह एक बार नहीं, बल्कि कई बार अलग-अलग तरीके से खोजकर उसकी पुष्टि करने की कोशिश करते हैं. यही कारण है कि बिना स्कूल गए भी उन्हें संविधान की प्रस्तावना, कई कविताएं और सामाजिक-राजनीतिक विषयों की अच्छी समझ है.

भगत सिंह से प्रेरणा, कविता से मिली सोच

इरफान बताते हैं कि शहीद भगत सिंह के विचारों ने उन्हें काफी प्रभावित किया है. वह अक्सर दुष्यंत कुमार और अदम गोंडवी जैसे कवियों की रचनाएं सुनते हैं. उनका मानना है कि साहित्य समाज की सच्चाई समझने का सबसे प्रभावी माध्यम है. यही वजह है कि उनके भाषणों और बातचीत में अक्सर कविता, शायरी और संवैधानिक मूल्यों का उल्लेख देखने को मिलता है.

मजदूरों की आवाज बनकर पहुंचे जंतर-मंतर

इरफान का कहना है कि वह किसी संगठन के कहने पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छा से जंतर-मंतर पहुंचे थे. उनका उद्देश्य मजदूरों और गरीब तबके की समस्याओं को सामने रखना था. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में कई मजदूर 10 से 11 घंटे काम करने के बावजूद तय न्यूनतम वेतन से कम राशि पर काम करने को मजबूर हैं. बेरोजगारी की वजह से उनके पास कम वेतन स्वीकार करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचता. उनका कहना है कि यदि कोई मजदूर अपने अधिकारों की बात करता है तो नौकरी जाने का खतरा पैदा हो जाता है.

आयुष्मान योजना और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

इरफान ने अपने इंटरव्यू में स्वास्थ्य सेवाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उनके पास आयुष्मान भारत कार्ड है, लेकिन इलाज के दौरान कई बार प्रक्रियाएं इतनी लंबी हो जाती हैं कि जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर मदद नहीं मिल पाती. उन्होंने दावा किया कि गरीब परिवारों के लिए केवल कार्ड होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इलाज तक आसान पहुंच भी जरूरी है.

आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव

इरफान ने स्वीकार किया कि पिछले करीब दो वर्षों से वह आर्थिक परेशानियों के कारण मानसिक तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) का सामना कर रहे हैं. परिवार की जिम्मेदारियां, सीमित आय और भविष्य की चिंता उन्हें लगातार परेशान करती है. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें अपने माता-पिता के स्वास्थ्य और बहनों के भविष्य की चिंता रहती है.

हिंसा नहीं, संवाद में विश्वास

इरफान का कहना है कि वह महात्मा गांधी के अहिंसा के सिद्धांत में विश्वास करते हैं. उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन वह हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के पक्षधर रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है. उनका उद्देश्य केवल इतना है कि मजदूरों, झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों और गरीब परिवारों की आवाज सत्ता तक पहुंचे.

राहुल गांधी ने क्या कहा?

वायरल वीडियो देखने के बाद राहुल गांधी ने मोहम्मद इरफान से मुलाकात की. मुलाकात के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इरफान ने बड़ी ईमानदारी और साफगोई से युवाओं का दर्द और उनकी उम्मीदों को सामने रखा है. राहुल गांधी ने कहा कि इरफान जैसे युवाओं के लिए ऐसा भारत बनाना जरूरी है, जहां सम्मान, समान अवसर और भाईचारे की भावना मजबूत हो.

सोशल मीडिया पर क्यों हो रहे हैं वायरल?

सोशल मीडिया पर इरफान की लोकप्रियता का कारण उनकी आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि उनकी सोच और अभिव्यक्ति का तरीका बताया जा रहा है. हजारों लोगों ने उनके इंटरव्यू साझा करते हुए कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जिन मुद्दों को उठाया, वे देश के बड़े वर्ग की वास्तविक समस्याओं को सामने लाते हैं. हालांकि, उनके विचारों से हर कोई सहमत हो, यह जरूरी नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिया गया उनका इंटरव्यू उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना चुका है.

राहुल गांधी
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