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₹711 करोड़ का टावर खरीदने वाले Dinesh Thakkar की कहानी, 12वीं के बाद छोड़ी पढ़ाई और ऐसे बने Angel One के बॉस

Angel One के फाउंडर दिनेश ठक्कर की कहानी जानिए, जिन्होंने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ी और शेयर बाजार से कारोबार खड़ा कर अब ₹711 करोड़ का टावर खरीदा.

₹711 करोड़ का टावर खरीदने वाले Dinesh Thakkar की कहानी, 12वीं के बाद छोड़ी पढ़ाई और ऐसे बने Angel One के बॉस
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मुंबई के जुहू में करीब ₹711 करोड़ की एक प्रॉपर्टी डील ने Angel One के फाउंडर दिनेश ठक्कर को फिर चर्चा में ला दिया है. खास बात यह नहीं कि उन्होंने करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी, बल्कि यह है कि उन्होंने एक पूरा रेजिडेंशियल टावर खरीदने का सौदा किया है. लेकिन इस डील के पीछे की कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है.

दिनेश ठक्कर का सफर किसी बड़े बिजनेस स्कूल या कॉरपोरेट नौकरी से शुरू नहीं हुआ था. उन्होंने 12वीं के बाद पढ़ाई आगे नहीं बढ़ाई, परिवार के टेक्सटाइल कारोबार में हाथ आजमाया और फिर शेयर बाजार की तरफ मुड़ गए. धीरे-धीरे यही बाजार उनकी पहचान और कारोबार दोनों बन गया.

परिवार का कारोबार था, लेकिन अपना रास्ता चुनना था

मुंबई के मुलुंड में पले-बढ़े दिनेश ठक्कर का परिवार टेक्सटाइल ट्रेडिंग से जुड़ा था. शुरुआती पढ़ाई के बाद उन्होंने किशनचंद चेलाराम कॉलेज में साइंस स्ट्रीम ली, लेकिन 12वीं के बाद कॉलेज की पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद उन्होंने परिवार के कारोबार में काम किया. यहां से उन्हें कारोबार की बारीकियां समझने का मौका जरूर मिला, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ अलग करने का था. वह अपना कारोबार खड़ा करना चाहते थे और इसी तलाश ने उन्हें शेयर बाजार तक पहुंचाया.

शेयर बाजार में पहले पैसा लगाया, फिर कारोबार समझा

ठक्कर ने शुरुआत सीधे बड़े ब्रोकर के तौर पर नहीं की थी. पहले उन्होंने शेयर बाजार को एक निवेशक की नजर से समझा. उस दौर में शेयर बाजार आज की तरह मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध नहीं था. ट्रेडिंग के लिए तकनीक सीमित थी और आम निवेशक तक बाजार की जानकारी पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण काम था. शेयर बाजार में शुरुआती अनुभवों के बाद ठक्कर ने महसूस किया कि इस क्षेत्र में सिर्फ निवेश करने के बजाय एक कारोबारी अवसर भी मौजूद है. इसके बाद उन्होंने स्टॉकब्रोकिंग की तरफ कदम बढ़ाया.

1996 में शुरू हुआ Angel का सफर

1996 में Angel Broking की शुरुआत हुई. यह वह समय था जब भारतीय शेयर बाजार तेजी से बदल रहा था, लेकिन ब्रोकिंग का कारोबार अभी भी काफी हद तक पारंपरिक तरीके से चलता था. ठक्कर का फोकस सिर्फ ब्रोकिंग सेवा देने तक सीमित नहीं रहा. उनका प्रयास धीरे-धीरे ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करने की तरफ बढ़ा, जहां आम निवेशक के लिए शेयर बाजार तक पहुंच आसान हो सके.

यही सोच आगे चलकर कंपनी के डिजिटल बदलाव की नींव बनी.

जब ट्रेडिंग ऐप नहीं था, तब Walkie-Talkie से जुड़ते थे ग्राहक. आज किसी शेयर का ऑर्डर मोबाइल से कुछ सेकेंड में लगाया जा सकता है. लेकिन Angel के शुरुआती दौर में ऐसा नहीं था. दिनेश ठक्कर ने पुराने इंटरव्यू में बताया है कि कारोबार के शुरुआती दिनों में ग्राहकों तक ट्रेड से जुड़ी जानकारी तेजी से पहुंचाने के लिए Walkie-Talkie जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था. यह छोटा-सा उदाहरण बताता है कि उस दौर की ब्रोकिंग इंडस्ट्री कितनी अलग थी. तकनीक सीमित थी, लेकिन निवेशकों को बेहतर और तेज सेवा देने की जरूरत वही थी जो आज भी बनी हुई है.

Angel Broking से Angel One बनने तक

समय के साथ शेयर बाजार और निवेश का तरीका बदलने लगा. इंटरनेट और मोबाइल टेक्नोलॉजी ने रिटेल निवेशकों के लिए बाजार की पहुंच आसान कर दी. Angel ने भी इसी बदलाव के साथ खुद को ढाला. कंपनी ने डिजिटल मॉडल पर जोर बढ़ाया और 2019 के आसपास अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को आगे बढ़ाया. 2020 में कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई और अगले साल, 2021 में, Angel Broking का नाम बदलकर Angel One कर दिया गया. यानी जिस कारोबार की शुरुआत पारंपरिक स्टॉकब्रोकिंग से हुई थी, वह धीरे-धीरे एक डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज प्लेटफॉर्म में बदल गया.

कारोबार के साथ बदली दिनेश ठक्कर की जिंदगी

दिनेश ठक्कर की पहचान सिर्फ Angel One तक सीमित नहीं है. उनके इंटरव्यू और सोशल मीडिया से उनकी लाइफस्टाइल की भी झलक मिलती है. कारों के प्रति उनका खास लगाव बताया जाता है. उनकी पहली कार Premier Padmini थी, जबकि बाद में उनके कलेक्शन में Ferrari, Lamborghini, Porsche और Mercedes-AMG जैसे हाई-परफॉर्मेंस मॉडल शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि वह इन कारों को सिर्फ स्टेटस सिंबल के तौर पर देखने के बजाय ड्राइविंग के अनुभव से जोड़ते रहे हैं. उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में लंबी रोड ट्रिप और ट्रैक ड्राइविंग का भी जिक्र किया है.

रियल एस्टेट से दूरी और अब ₹711 करोड़ की डील

दिनेश ठक्कर की मौजूदा प्रॉपर्टी डील उनके पुराने नजरिए से भी दिलचस्प तरीके से जुड़ती है. उन्होंने पहले बताया था कि करीब 38-40 साल की उम्र तक वह अपना घर खरीदने के बजाय किराए पर रहना पसंद करते थे. उनका मानना था कि पूंजी को प्रॉपर्टी में लगाने के बजाय कारोबार में लगाया जाए. लेकिन अब मुंबई के जुहू में तस्वीर बिल्कुल अलग है.

एक फ्लैट नहीं, पूरा टावर खरीदने का सौदा

Embassy Terrazza में ठक्कर ने करीब ₹711 करोड़ में पूरा G+7 रेजिडेंशियल टावर खरीदने का सौदा किया है. रिपोर्टों के मुताबिक टावर का RERA कारपेट एरिया करीब 63,000 वर्ग फीट है. यह जुहू तारा रोड पर स्थित बड़े लग्जरी प्रोजेक्ट का हिस्सा है. बताया गया है कि यह घर परिवार के इस्तेमाल के लिए होगा और प्राइवेसी, बड़ा स्पेस तथा समुद्र का दृश्य इस फैसले के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं. इस निजी रेजिडेंस को 'Angelus' नाम दिए जाने की भी रिपोर्ट है.

₹711 करोड़ की डील से ज्यादा बड़ी है पूरी कहानी

दिनेश ठक्कर की कहानी का दिलचस्प हिस्सा सिर्फ यह नहीं है कि आज वह करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीदने की स्थिति में हैं. असल कहानी उस बदलाव की है जिसमें एक कारोबारी परिवार से आया युवक पहले शेयर बाजार को निवेशक की नजर से समझता है, फिर उसी क्षेत्र में अपना कारोबार शुरू करता है और बदलती तकनीक के साथ अपनी कंपनी को भी बदलता जाता है. 12वीं के बाद औपचारिक पढ़ाई छोड़ने से लेकर Angel Broking खड़ा करने और फिर उसे Angel One जैसे डिजिटल फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म में बदलने तक का सफर कई दशक में पूरा हुआ.

Angel One में कितनी हिस्सेदारी है?

दिनेश ठक्कर की कारोबारी स्थिति को समझने के लिए Angel One में उनकी हिस्सेदारी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक आंकड़ा है. कंपनी की FY2024-25 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक उनके पास करीब 16.77 करोड़ शेयर थे, जो कंपनी में लगभग 18.57 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर थे. इसीलिए उनकी व्यक्तिगत संपत्ति के अलग-अलग अनुमानों की बजाय कंपनी में दर्ज यह हिस्सेदारी उनके कारोबारी हित को समझने का ज्यादा ठोस सार्वजनिक आधार देती है.

परिवार के कारोबार से मुंबई के लग्जरी टावर तक

दिनेश ठक्कर की कहानी को अगर एक लाइन में समझना हो तो यह परिवार के पारंपरिक कारोबार से शुरू होकर शेयर बाजार की नई अर्थव्यवस्था तक पहुंचने की कहानी है. 12वीं के बाद पढ़ाई रोकना उनके सफर का अंत नहीं बना. परिवार के कारोबार से निकलकर उन्होंने शेयर बाजार को समझा, निवेशक से ब्रोकर बने, 1996 में Angel Broking शुरू किया और बदलती टेक्नोलॉजी के साथ कंपनी को डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदलने की प्रक्रिया का नेतृत्व किया.

आज Angel One उनके कारोबारी सफर की सबसे बड़ी पहचान है और जुहू का करीब ₹711 करोड़ का पूरा रेजिडेंशियल टावर उनकी निजी जिंदगी का नया अध्याय. यानी जुहू की यह डील सिर्फ एक महंगी प्रॉपर्टी की खबर नहीं है. इसके पीछे उस कारोबारी सफर की कहानी है, जो एक पारंपरिक पारिवारिक कारोबार से शुरू होकर भारतीय शेयर बाजार और डिजिटल फाइनेंस की दुनिया तक पहुंचा.

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