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PAK को हराने के बाद भी इंदिरा के खिलाफ थी एंटी-इनकम्बेंसी, मोदी कैसे बचे... EC पर राहुल के 10 बड़े हमले, सद्दाम हुसैन से लेकर नॉर्थ कोरिया तक का जिक्र

राहुल गांधी ने SIR प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की राजनीति में आम तौर पर हर सरकार को समय के साथ एंटी-इनकम्बेंसी का सामना करना पड़ता है, लेकिन मोदी सरकार के मामले में ऐसा दिखाई नहीं देता. आखिर क्यों?

Rahul Gandhi Targets CEC Gyanesh Kumar Over SIR, Questions Anti-Incumbency Under Modi Government
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Rahul Gandhi 

( Image Source:  ANI )

Rahul Gandhi Targets CEC Gyanesh Kumar: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. AICC मुख्यालय में हुई प्रेस ब्रीफिंग में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की. उनका बयान ऐसे समय आया है जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं.

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में वोट के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कथित तौर पर धांधली हुई और वोट की रक्षा करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. वोट की चोरी हर भारतीय के अधिकार का उल्लंघन है. इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है.

प्रेस ब्रीफिंग में क्या बोले राहुल गांधी?

  1. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता CEC ज्ञानेश कुमार को बचा रहे हैं. चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े विवाद पर कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग सुझाव और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और उसके फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं.
  2. राहुल ने अपनी बात को समझाने के लिए भारतीय राजनीति में एंटी-इनकम्बेंसी का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि वह एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और पांच दशक से अधिक समय से राजनीति को करीब से देखते रहे हैं. भारत में एक ऐसी राजनीतिक ताकत है जो किसी भी सरकार के लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद उसके खिलाफ दबाव बनाना शुरू कर देती है.
  3. राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि 1971 के बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद इंदिरा गांधी अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं, लेकिन एक-दो साल के भीतर उनके खिलाफ भी बड़े स्तर पर एंटी-इनकम्बेंसी और राजनीतिक दबाव दिखाई देने लगा.
  4. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ऐसा कांग्रेस नेताओं के साथ हुआ, क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ हुआ और अलग-अलग पार्टियों की सरकारों को भी इसका सामना करना पड़ा, लेकिन नरेंद्र मोदी, अमित शाह और BJP के मामले में यह राजनीतिक प्रतिक्रिया क्यों दिखाई नहीं देती.
  5. राहुल गांधी ने कहा कि किसी नेता की लोकप्रियता और सरकार के प्रदर्शन को समझा जा सकता है, लेकिन यह समझना मुश्किल है कि किसी सरकार के खिलाफ बनने वाली एंटी-इनकम्बेंसी पूरी तरह कैसे गायब हो सकती है.
  6. राहुल गांधी ने कहा, "हरियाणा में पिछले 50 सालों से सत्ता एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास जाती रही है. अचानक एंटी-इनकंबेंसी (सरकार विरोधी लहर) गायब हो जाती है. महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होता है. अचानक यह गायब हो जाती है. उत्तर प्रदेश में भी सत्ता बदलती रहती है- कभी समाजवादी पार्टी, कभी BSP - लेकिन वहां भी यह गायब हो जाती है. मध्य प्रदेश में भी ऐसा ही होता है, गुजरात में भी. यह हमारे लिए एक बुनियादी सवाल रहा है. हम किसी व्यक्ति की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज को तो समझ सकते हैं, लेकिन यह समझ नहीं पाते कि एंटी-इनकंबेंसी कैसे गायब हो जाती है.
  7. राहुल ने कहा कि सद्दाम हुसैन के इराक में एंटी-इनकंबेंसी नहीं होती थी. उत्तर कोरिया में भी ऐसा नहीं होता. दुनिया में ऐसी कोई भी डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) नहीं है, जहां एंटी-इनकंबेंसी न हो.
  8. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमारे संविधान को अपनी ताकत उस वोट से मिलती है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है. संविधान से हमारे कानून बनते हैं और कानूनों से हमारी संस्थाएं बनती हैं. यह एक चेन (कड़ी) है. अगर वोट ही खत्म हो गया, तो हमारा संविधान भी खत्म हो गया. अगर संविधान खत्म हो गया, तो हमारे कानून गैर-कानूनी हो जाते हैं. अगर कानून गैर-कानूनी हैं, तो हमारी संस्थाओं का कोई मतलब नहीं रह जाता.
  9. राहुल ने कहा कि यहां मुख्य सवाल यह है कि यह सिर्फ वोट पर हमला नहीं है. यह हर भारतीय नागरिक के विचार, बुनियादी ढांचे और अभिव्यक्ति पर हमला है. हम बार-बार यही कह रहे हैं कि वोटिंग प्रक्रिया में कोई समस्या है.
  10. ज्ञानेश कुमार की नियुक्त पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने की है. दोनों उन्हें बचाने में लगे हुए हैं. हमारी मांगी है कि ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें. उन्होंने वोट चोरी की है. यह संविधान का उल्लंघन है.

आखिर क्यों पैदा हुआ विवाद?

यह पूरा विवाद 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जिक्र किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियां वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटा के केंद्रीकृत प्रबंधन जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं.

विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट के बाद CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज कर दी है. वहीं चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताते हुए कहा है कि उसके आधिकारिक आदेश कानूनी आधार और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं. इस तरह SIR को लेकर विवाद अब सिर्फ मतदाता सूची में बदलाव तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया, उसके भीतर दर्ज आपत्तियों और चुनावी प्रक्रिया में संस्थागत पारदर्शिता को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

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