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क्या है कंबोडिया जॉब स्कैम का पंगा, जिसमें पाक बना रहा भारतीय युवाओं को शिकार? हैरान कर देने वाले खुलासे आए सामने

कंबोडिया जॉब स्कैम में भारतीय युवाओं को हाई-सैलरी नौकरियों के झांसे में फंसाकर जबरन साइबर अपराध और शारीरिक शोषण कराया गया. जांच में पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया है, जिसमें एजेंट युवाओं को भर्ती कर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तहत शिकार बना रहे थे. केंद्रीय एजेंसियों ने IP ट्रेसिंग और डिजिटल सबूतों के आधार पर यह पूरा नेटवर्क उजागर किया.

क्या है कंबोडिया जॉब स्कैम का पंगा, जिसमें पाक बना रहा भारतीय युवाओं को शिकार? हैरान कर देने वाले खुलासे आए सामने
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( Image Source:  Sora_ AI )
सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Published on: 19 Jan 2026 8:19 AM

भारत के युवाओं को विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर फंसाने वाले कंबोडिया जॉब स्कैम में अब चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय एंगल सामने आया है. केंद्रीय एजेंसियों की उच्चस्तरीय जांच में इस बड़े साइबर और ह्यूमन ट्रैफिकिंग रैकेट में पाकिस्तान कनेक्शन का खुलासा हुआ है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि सैकड़ों भारतीयों को फर्जी नौकरी के झांसे में लेकर कंबोडिया भेजा गया, जहां उनसे जबरन साइबर अपराध करवाए गए और अमानवीय शोषण किया गया.

यह घोटाला साल 2024 में तब उजागर हुआ था, जब आशंका जताई गई कि 5,000 से ज्यादा भारतीय कंबोडिया में फंसे हुए हैं. इनमें से कई पीड़ितों को बाद में भारत वापस लाया गया. अब उनकी गवाही और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं.

पीड़ितों की गवाही से खुला पाकिस्तान कनेक्शन

केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, 'इन स्कैम ठिकानों से लौटने के बाद कई पीड़ितों ने केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारियों को बताया कि उन्हें पाकिस्तानी एजेंटों द्वारा भर्ती किया गया था, यानि पीड़ितों ने साफ बताया कि उन्हें पाकिस्तानी एजेंटों के जरिए भर्ती किया गया था.

फॉरेंसिक जांच में मिले पुख्ता डिजिटल सबूत

सूत्रों के अनुसार, भर्ती से जुड़े चैट्स और कॉल्स की IP लॉग्स और डिजिटल फुटप्रिंट्स की फॉरेंसिक जांच की गई. 'उनकी दी गई जानकारी के आधार पर ऐसे आईपी पतों की फॉरेंसिक जांच की गई, और उन्हें पाकिस्तान में स्थित सर्वरों और हैंडलरों तक ट्रेस किया गया. इससे एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो उत्तर प्रदेश, पंजाब, मुंबई, तेलंगाना और केरल जैसे इलाकों के कमजोर नौकरी-तलाशने वालों को निशाना बना रहा था.” जांच में यह साफ हुआ कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क था, जो भारत के कई राज्यों के बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था.

एंटी-टेररिज्म कॉन्फ्रेंस में उठा मामला

सूत्रों ने बताया कि यह गंभीर मुद्दा दिसंबर में हुई दो दिवसीय ‘Anti-Terrorism Conference-2025’ में भी उठाया गया था. 'यह सिर्फ एक साइबर फ्रॉड रैकेट नहीं है, बल्कि हमारे युवाओं का शोषण करने वाला एक लक्षित ऑपरेशन है.' सूत्र ने कहा कि अब CBI और NIA समेत केंद्रीय एजेंसियों ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है.

संदिग्ध IP एड्रेस 'Suspect रजिस्ट्री' में डाले गए

पाकिस्तान से जुड़े IP एड्रेस सामने आने के बाद सभी को ‘Suspect Registry’ में दर्ज किया गया है. यह रजिस्ट्री National Cyber Crime Reporting Portal के आधार पर बनाई गई है और इसे Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने विकसित किया है. इस डेटाबेस में 14 लाख से ज्यादा साइबर अपराधियों का डेटा है, जिसे सभी बैंकों के साथ साझा किया गया है.

7,980 करोड़ रुपये बचाने में मिली सफलता, आंकड़ों के मुताबिक, इस संदिग्ध रजिस्ट्री की मदद से 5,54,865 बैंक अकाउंट फ्रीज किए गए. 15,10,800 यूनिक अकाउंट्स की पहचान हुई. करीब 20 लाख फर्जी ट्रांजैक्शन रोके गए. जिससे 7,980 करोड़ रुपये की रकम बचाई जा सकी.

साउथ ईस्ट एशिया में चल रहे साइबर स्कैम हब

एक अधिकारी के अनुसार, भारत को निशाना बनाने वाले ज्यादातर साइबर स्कैम साउथ ईस्ट एशिया के हाई-सिक्योरिटी कंपाउंड्स से संचालित हो रहे हैं. यहां मानव तस्करी के शिकार भारतीयों से जबरन साइबर अपराध करवाए जाते हैं.

6 साल में भारतीयों को 52,976 करोड़ का नुकसान

I4C के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 6 साल में भारतीयों को 52,976 करोड़ रुपये का नुकसान. हर महीने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का आर्थिक घाटा, करीब 20,000 भारतीय अभी भी ऐसे स्कैम कंपाउंड्स में फंसे होने की आशंका, अधिकारी ने बताया कि कई देशों, खासकर अमेरिका के दबाव के बाद यह अवैध कारोबार अब दुबई की ओर शिफ्ट होने लगा है.

सोशल मीडिया से फंसाया, फिर शोषण और धमकियां

अधिकारी के मुताबिक, 'कई लोगों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के ज़रिये कैसीनो और कॉल सेंटरों में ऊंची तनख्वाह वाली नौकरियों का लालच दिया गया, लेकिन वहाँ पहुँचते ही उन्हें जबरन मजदूरी, शारीरिक उत्पीड़न और अंग तस्करी की धमकियों का सामना करना पड़ा.' यानी सोशल मीडिया पर हाई-सैलरी नौकरी का लालच देकर युवाओं को फंसाया गया और वहां पहुंचते ही उन्हें जबरन मजदूरी, मारपीट और अंग तस्करी की धमकियां दी गईं.

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