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जिस पार्टी का संसद में नहीं था कोई सांसद, वह बन सकती है NDA की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी! Points में जानें NCPI की पूरी कहानी
टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का समर्थन करने और NDA के साथ जाने का ऐलान किया है. आखिर क्या है NCPI?
वेस्ट बंगाल में लगातार सियासी बवाल चल रहा है. टीएमसी के 20 बाग़ी सांसदों ने एनसीपी यानी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी का दामन थाम लिया है. इस पार्टी ने NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है. यह घोषणा टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद की.
यदि इस विलय को औपचारिक मंजूरी मिल जाती है, तो नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी लोकसभा में भाजपा के बाद एनडीए की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन सकती है. इसके साथ ही वह वर्तमान में 16 सांसदों वाली तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को भी पीछे छोड़ देगी.
प्वाइंटर्स में जानें क्या है नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी?
- नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है.
- पार्टी का मुख्य आधार पूर्वोत्तर भारत माना जाता है और इसने विशेष रूप से त्रिपुरा में चुनाव लड़े हैं.
- पार्टी ने 2023 में त्रिपुरा में दो सीटों पर चुनाव लड़ा था. जिसमें चावमानु सीट से पार्टी ने 536 वोट हासिल किए वहीं कैलाशहर सीट से 286 वोट मिले थे.
- पार्टी के दस्तावेजों में शेवली कुंडू को कोषाध्यक्ष (Treasurer) बताया गया है और पार्टी के अध्यक्ष उत्तिया कुंडू हैं
- रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी ने मेघालय में भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाने की कोशिश की है.
- इसे एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल माना जाता है, जिसे खासतौर पर त्रिपुरा में बंगाली समुदाय के एक वर्ग का समर्थन मिलने की बात कही जाती है.
- चुनाव आयोग में पंजीकृत होने के बावजूद यह पार्टी अब तक राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा चर्चा में नहीं रही है.
- पार्टी को अब तक कोई बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिली थी और न ही इसके पास राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित सांसद या विधायक थे.
- टीएमसी के 20 सांसदों के संभावित विलय के बाद पार्टी की संसदीय ताकत एक झटके में काफी बढ़ सकती है.
- यदि विलय को मंजूरी मिलती है, तो यह पार्टी लोकसभा में एनडीए की सबसे प्रभावशाली सहयोगी पार्टियों में शामिल हो सकती है.
- इस घटनाक्रम का असर विपक्षी राजनीति, खासकर तृणमूल कांग्रेस पर पड़ सकता है, क्योंकि पार्टी आंतरिक बगावत का सामना कर रही है.
- नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी काफी सीमित है.
- पार्टी के संस्थापक, शीर्ष नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में आसानी से उपलब्ध नहीं है.
- पार्टी की अधिकांश राजनीतिक गतिविधियां अब तक पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर त्रिपुरा, तक ही सीमित रही हैं.
- मेघालय में भी संगठन के विस्तार की कोशिशों की जानकारी सामने आती रही है.
- हालांकि, टीएमसी सांसदों के संभावित विलय की खबर के बाद यह पार्टी पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन गई है.




