कौन हैं कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान, जिनका ममता ने किया समर्थन तो पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार? जानिए क्या है हत्या का मामला
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को ममता बनर्जी के गुट ने समर्थन देने का ऐलान किया है. जिसके बाद अब खबर सामने आई है कि उन्हें ममता का समर्थन मिलते ही हत्या के पुराने मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में 18 सितंबर 2026 को बड़ा ही राजनीतिक ट्विस्ट देखने को मिला है. जिसने पूरे मुकाबले की तस्वीर बदल दी. ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया और इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान कर दिया.
ममता ने कहा कि उनका गुट नंदीग्राम में मिलन प्रधान का समर्थन करेगा. जिसके बाद अब खबर आ गई है कि मिलन प्रधान को हत्या के पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया है है इसी के साथ आइए जानते हैं कौन है मिनल प्रधान और क्या है उन पर हत्या का मामला जिन्हें ममता का समर्थन मिलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
दरअसल, मिलन प्रधान कोई अचानक चुनावी मैदान में उतरा हुआ चेहरा नहीं हैं. बंगाली मीडिया रिपोर्टों में उन्हें नंदीग्राम के सोनाचूड़ा इलाके से जुड़े पुराने कांग्रेस कार्यकर्ता और नंदीग्राम के भूमि आंदोलन से निकले स्थानीय राजनीतिक चेहरे के तौर पर पेश किया गया है. कांग्रेस ने 11 सितंबर 2026 को उन्हें नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था. पार्टी की ओर से जारी घोषणा के मुताबिक उनकी उम्मीदवारी को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंजूरी दी थी.
मिलन प्रधान को किस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है?
ममता बनर्जी के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद नंदीग्राम की सियासत में नया बवाल खड़ा हो गया है. कांग्रेस ने दावा किया है कि उसके उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया है. पार्टी का आरोप है कि यह कार्रवाई ममता बनर्जी के समर्थन की घोषणा के तुरंत बाद हुई. हालांकि, गिरफ्तारी की वजह और पूरे घटनाक्रम को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है. कांग्रेस प्रवक्ता मीता चक्रवर्ती ने कहा कि 'आज पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मिलन प्रधान को अपना समर्थन दिया. इसके कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अगर आप डराने-धमकाने का रास्ता अपनाते हैं और विपक्ष को जगह देने से इनकार करते हैं, तो क्या आप देश में तानाशाही चाहते हैं या लोकतंत्र?” उन्होंने आगे कहा कि 'अगर आपको लगता है कि ऐसी धमकियों के जरिए कांग्रेस या विपक्ष को रोका जा सकता है, तो आप पूरी तरह गलतफहमी में हैं.'
सोनाचूड़ा से शुरू होती है मिलन प्रधान की कहानी
मिलन प्रधान का नाम नंदीग्राम के सोनाचूड़ा से जुड़ा है. यह वही इलाका है जो नंदीग्राम के भूमि आंदोलन के दौरान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा. Sangbad Pratidin की रिपोर्ट में मिलन प्रधान को उस समय के भूमि आंदोलन से जुड़े स्थानीय चेहरे के तौर पर पेश किया गया है. रिपोर्ट में कांग्रेस नेताओं के हवाले से कहा गया कि जमीन बचाने के आंदोलन से जुड़े चेहरे के रूप में मिलन को इस बार उम्मीदवार बनाया गया. यानी मिलन प्रधान की राजनीतिक पहचान को समझने के लिए उनकी मौजूदा कांग्रेस उम्मीदवारी से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका नंदीग्राम आंदोलन से जुड़ाव है.
नंदीग्राम के भूमि आंदोलन से क्या रिश्ता है?
नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ 2007 में बड़ा आंदोलन हुआ था. यह आंदोलन आगे चलकर पश्चिम बंगाल की राजनीति के बड़े बदलावों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बना. The Bengal Story की विस्तृत रिपोर्टिंग में सोनाचूड़ा निवासी दो भाइयों मिलन प्रधान और सबुज प्रधान का जिक्र मिलता है. रिपोर्ट के मुताबिक दोनों लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े थे और आंदोलन के दौरान इलाके में एक्टिव रहे. रिपोर्ट में उनके परिवार की पुरानी कांग्रेस पृष्ठभूमि का भी उल्लेख है. यही वजह है कि कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान को नंदीग्राम के स्थानीय आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरे के रूप में सामने रखा जा रहा है.
भाई सबुज प्रधान के साथ भी आंदोलन में सक्रिय रहे
मिलन प्रधान की राजनीतिक कहानी अकेली नहीं है. बंगाली रिपोर्टिंग में उनके भाई सबुज प्रधान का भी जिक्र मिलता है. The Bengal Story के मुताबिक दोनों भाई सोनाचूड़ा के रहने वाले हैं और लंबे समय से कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहे हैं. रिपोर्ट में परिवार को पुराना कांग्रेस समर्थक परिवार बताया गया है. यानी मिलन प्रधान के लिए नंदीग्राम की राजनीति कोई अचानक शुरू हुआ अध्याय नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीतिक और आंदोलनकारी पृष्ठभूमि से जुड़ी कहानी है.
परिवार भी पुराना कांग्रेस समर्थक बताया गया
मिलन प्रधान की पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बंगाली रिपोर्टों में कुछ जानकारी मिलती है. The Bengal Story के मुताबिक उनके पिता का नाम प्रबीरचंद्र प्रधान और मां का नाम बंगबाला प्रधान है. रिपोर्ट में परिवार को पुराने कांग्रेस समर्थक परिवार के रूप में वर्णित किया गया है. हालांकि उनकी उम्र, औपचारिक शिक्षा, पत्नी, बच्चों या निजी संपत्ति से जुड़ी विस्तृत और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी प्रमुख सार्वजनिक स्रोतों में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है. इसलिए इन पहलुओं पर दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा.
राजनीति के साथ कारोबार से भी जुड़े हैं
बंगाली रिपोर्टिंग में मिलन प्रधान के व्यवसाय से जुड़े होने का भी उल्लेख मिलता है. Ei Samay/BengalInfo की रिपोर्टिंग के अनुसार वह सोनाचूड़ा के रहने वाले हैं और कारोबार के सिलसिले में कोलकाता में भी समय बिताते हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इसके बावजूद नंदीग्राम के लोगों से उनका संपर्क बना हुआ है.
कांग्रेस ने 11 सितंबर को दिया टिकट
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने 11 सितंबर 2026 को मिलन प्रधान के नाम का ऐलान किया. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद पार्टी ने उन्हें नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया. उनके साथ पार्टी ने रेजीनगर सीट से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी को उम्मीदवार घोषित किया. नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र पूर्व मेदिनीपुर जिले में आता है और इसका विधानसभा क्षेत्र नंबर 210 है.
16 सितंबर को दाखिल किया नामांकन
मिलन प्रधान ने 16 सितंबर को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया. बंगाली रिपोर्टों के मुताबिक नामांकन के दौरान कांग्रेस के राज्य और राष्ट्रीय स्तर के नेता मौजूद रहे. कांग्रेस ने उनके अभियान में नंदीग्राम के स्थानीय मुद्दों और भूमि आंदोलन से जुड़े उनके पुराने राजनीतिक आधार को प्रमुखता दी है.
फिर अचानक ममता बनर्जी ने क्यों किया समर्थन?
यहीं से नंदीग्राम की कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट आया. ममता बनर्जी के गुट ने पहले संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाया था. लेकिन 18 सितंबर को संचिता ने नामांकन वापस ले लिया. इससे पहले उनकी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की खबर और तस्वीर सामने आई. इसके बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया. ममता के इस ऐलान के बाद नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का मुकाबला अब नए राजनीतिक समीकरण के बीच देखा जा रहा है.
अब मिलन प्रधान के सामने कौन?
नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान, बीजेपी की ओर से हसीरानी रथ, दूसरे TMC गुट की ओर से मोहम्मद एतेशामुल हक और वाम मोर्चे की ओर से शांतिगोपाल गिरी मैदान में हैं. बंगाली Indian Express की रिपोर्ट ने इसे बहुकोणीय मुकाबले के रूप में वर्णित किया है. ममता गुट की संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने और कांग्रेस के मिलन प्रधान को समर्थन देने के बाद मुकाबले का राजनीतिक समीकरण जरूर बदल गया है, लेकिन चुनावी परिणाम के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी.
नंदीग्राम में मिलन प्रधान की सबसे बड़ी पहचान क्या है?
अगर मिलन प्रधान की पूरी प्रोफाइल को एक लाइन में समझना हो तो उनकी सबसे प्रमुख सार्वजनिक पहचान सोनाचूड़ा के स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता और नंदीग्राम के भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरे की है. कांग्रेस ने इसी स्थानीय पहचान को अपनी उम्मीदवारी का अहम आधार बनाया है. Sangbad Pratidin की रिपोर्ट में कांग्रेस के एक राज्य नेता के हवाले से कहा गया कि जमीन बचाने के आंदोलन से जुड़े चेहरे के रूप में मिलन को उम्मीदवार बनाया गया और अब, जब ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को पीछे हटाकर मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया है, तो नंदीग्राम उपचुनाव में यह स्थानीय राजनीतिक पहचान पहले से कहीं ज्यादा चर्चा में आ गई है.




