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बंगाल की किताबों में अब क्या पढ़ेंगे बच्चे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की एंट्री, तो क्यों हटाए जाएंगे सिंगूर-कन्याश्री जैसे चैप्टर?

बंगाल में अब किताबों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी पढ़ाया जाएगा. इसके अलावा सिंगूर और कन्याश्री जैसे चैप्टर हटाए जा रहे हैं. ये बदलाव 2 जनवरी 2027 से लागू करने की तैयारी है.

West Bengal school syllabus change
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West Bengal school syllabus change

( Image Source:  Gemini )

पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद स्कूलों के सिलेबस में भी बड़े बदलाव की तैयारी है. राज्य की उच्चस्तरीय सिलेबस-कम-करिकुलम कमेटी ने 2027 से किताबों में कई नए विषय जोड़ने और कुछ मौजूदा चैप्टर हटाने की सिफारिश की है. प्रस्ताव के मुताबिक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान से जुड़ी जानकारी सभी कक्षाओं की किताबों में शामिल की जाएगी. वहीं आठवीं कक्षा की किताब से सिंगूर भूमि आंदोलन और छठी कक्षा की किताब से कन्याश्री योजना से जुड़े अध्याय हटाने का प्रस्ताव है.

सिर्फ इतिहास और सामाजिक विषयों तक ही बदलाव सीमित नहीं रहने वाला है. बंगाली भाषा और साहित्य की किताबों में भी कुछ रचनाओं और शब्दों को बदलने की सिफारिश की गई है. रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ की जगह ‘शिबाजी उत्सव’ और सचिंद्रनाथ सेनगुप्ता के नाटक ‘सिराजदौला’ की जगह द्विजेंद्रलाल राय का ‘मेबार पतन’ शामिल करने का प्रस्ताव है. हालांकि इन बदलावों पर अंतिम फैसला राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.

कब से लागू होगा सिलेबस में बदलाव?

ये बदलाव 2 जनवरी 2027 से लागू करने की तैयारी है. सिलेबस-कम-करिकुलम कमेटी ने अपनी कई सिफारिशें राज्य सरकार को भेज दी हैं और बाकी हिस्से भी जल्द भेजे जाने की बात कही गई है. प्रस्ताव के अनुसार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान पर जानकारी सभी कक्षाओं की किताबों की शुरुआत में दी जाएगी. कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने कहा "सभी किताबों में शुरुआत में ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में लिखा जाएगा ताकि छात्रों को उनके बारे में जानकारी मिल सके."

चैप्टर से क्यों हटाया जा रहा सिंगूर आंदोलन?

कमेटी ने आठवीं कक्षा की इतिहास की किताब से सिंगूर भूमि आंदोलन पर आधारित चैप्टर हटाने की सिफारिश की है. यह चैप्टर पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 2017 में सिलेबस में शामिल किया गया था. कमेटी अध्यक्ष देबाशीष चटर्जी ने कहा "सिंगूर अध्याय, जिसे आठवीं कक्षा की किताबों में जोड़ा गया था, उसे हटा दिया जाएगा. कन्याश्री पर आधारित अध्याय भी हटा दिया जाएगा."

क्यों हटाई जाएगी रवींद्रनाथ टैगोर की 'अफ्रीका'?

बदलाव में माध्यमिक स्तर के बंगाली साहित्य पाठ्यक्रम से रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘अफ्रीका’ को हटाकर उनकी दूसरी रचना ‘शिबाजी उत्सव’ शामिल करने की बात कही गई है. कमेटी के अध्यक्ष ने इस बदलाव को भारतीय संस्कृति और मूल्यों पर ज्यादा जोर देने की सोच से जोड़ा. उन्होंने कहा "जब हम विकसित भारत की बात कर रहे हैं, तो हमें अपने मूल्यों और संस्कृति को बनाए रखना होगा. इसलिए यह कविता महत्वपूर्ण है."

‘सिराजदौला’ की जगह कौन सा नाटक आएगा?

सचिंद्रनाथ सेनगुप्ता के ऐतिहासिक नाटक ‘सिराजदौला’ को हटाकर द्विजेंद्रलाल राय के ‘मेबार पतन’ को सिलेबस में शामिल करने की सिफारिश की गई है. ‘सिराजदौला’ बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला और उनके शासन से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है, जबकि ‘मेबार पतन’ मेवाड़ और मुगल आक्रमण से जुड़े इतिहास को सामने रखता है. कमेटी के प्रस्ताव में मुगल इतिहास और विचारधारा से जुड़े हिस्सों को कम करने की बात भी कही गई है. इसके साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन और उससे जुड़े व्यक्तित्वों पर ज्यादा ध्यान देने का प्रस्ताव रखा गया है.

कमेटी ने रोजमर्रा की बंगाली में कम इस्तेमाल होने वाले कुछ शब्दों को हटाने या बदलने की सिफारिश की है. कमेटी अध्यक्ष ने उदाहरण देते हुए बताया कि ‘पानी’ की जगह ‘जोल’ शब्द इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा ‘अम्मा’ और ‘अब्बा’ जैसे शब्दों में भी बदलाव का प्रस्ताव है.

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