कौन थीं वो महिला, जिन्होंने आजाद भारत की पहली रात गाया ‘वन्दे मातरम्’? बाद में बनीं देश की पहली महिला CM
आजादी की रात संविधान सभा में जब देश इतिहास बदलने वाला था, तब सुचेता कृपलानी ने ‘वन्दे मातरम्’ गाकर अपनी आवाज से उस पल को यादगार बना दिया. वह आजाद भारत की पहली मुख्यमंत्री बनीं.
आजाद भारत की पहली रात वन्दे मातरम् किसने गाया
14 अगस्त 1947 की वह रात इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गई, जब भारत आजादी की दहलीज पर खड़ा था. संविधान सभा में पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐतिहासिक भाषण से पहले एक महिला की आवाज गूंजी थी, जिसने ‘वन्दे मातरम्’ गाकर उस पल को और खास बना दिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वह महिला कौन थीं और स्वतंत्रता संग्राम में उनका क्या योगदान था?
इनका नाम था सुचेता कृपलानी, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में भूमिगत रहकर काम किया और संविधान सभा की सदस्य भी रहीं. खास बात यह है कि आजादी के बाद उनका राजनीतिक सफर भी बेहद खास रहा और साल 1963 में वह भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.
कौन थीं सुचेता कृपलानी?
instagram-@indianhistorylive
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सुचेता कृपलानी का जन्म 1908 में हुआ था. उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में संवैधानिक इतिहास पढ़ाना शुरू किया. उस समय तक उनका जीवन एक शिक्षक के तौर पर सामान्य था, लेकिन देश की आजादी की लड़ाई ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी. BHU में ही उनकी मुलाकात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आचार्य जे.बी. कृपलानी से हुई. दोनों करीब आए और बाद में शादी कर ली. परिवार की नाराजगी के बावजूद सुचेता अपने फैसले पर डटी रहीं. इसके बाद वह धीरे-धीरे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गईं और देश को आजाद कराने की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने लगीं.
क्यों हुई थीं सुचेता गिरफ्तार?
1940 में सुचेता कृपलानी ने कांग्रेस में महिलाओं के लिए एक अलग विभाग शुरू किया. उनका मानना था कि आजादी की लड़ाई में महिलाओं को भी पुरुषों के साथ आगे बढ़कर हिस्सा लेना चाहिए. वे सिर्फ दर्शक बनकर नहीं रह सकतीं. इसके बाद 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उनके जीवन का अहम दौर बना. आंदोलन के दौरान वह अंग्रेजों से बचते हुए भूमिगत हो गईं और गुप्त तरीके से स्वतंत्रता सेनानियों की मदद करने लगीं. उन्होंने अरुणा आसफ अली और राम मनोहर लोहिया जैसे नेताओं के साथ मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया. अंग्रेज सरकार ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी और आखिरकार 1944 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
आजादी की पहली रात 'वंदे मातरम्' किसने गाया?
14 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा की खास बैठक हुई. देश की आजादी का ऐतिहासिक पल करीब था. पंडित जवाहरलाल नेहरू के मशहूर भाषण से पहले सुचेता कृपलानी को गीत गाने के लिए बुलाया गया. उन्होंने सबसे पहले ‘वन्दे मातरम्’ की शुरुआती लाइन गाईं. इसके बाद उन्होंने ‘सारे जहां से अच्छा’ की कुछ शुरुआती पंक्तियां और ‘जन गण मन’ भी गाया. इसके बाद जवाहरलाल नेहरू ने अपना ऐतिहासिक भाषण दिया. इस तरह आजाद भारत की पहली रात नेहरू के भाषण से पहले संविधान सभा में एक महिला की आवाज में ‘वंदे मातरम’ गूंजा था.
संविधान सभा की 15 महिलाओं में शामिल थीं
1946 में जब संविधान सभा का गठन हुआ, तब सुचेता कृपलानी भी इसकी सदस्य चुनी गईं. उस समय करीब 300 सदस्यों वाली इस सभा में केवल 15 महिलाएं थीं. इनमें सरोजिनी नायडू और विजयलक्ष्मी पंडित जैसी जानी-मानी महिलाएं भी शामिल थीं. सुचेता कृपलानी ने संविधान सभा की बैठकों में महिलाओं के अधिकार, बराबरी और देश की नई व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी. वह अपनी बात को बिना ज्यादा दिखावे के सीधे और साफ तरीके से रखने के लिए जानी जाती थीं.
आजाद भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री कौन?
आजादी के बाद भी सुचेता कृपलानी का राजनीतिक सफर जारी रहा. वह लोकसभा की सदस्य बनीं और केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली. राजनीति में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया. साल 1963 में उन्होंने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री का पद संभाला और देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया. उनके कार्यकाल में कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल और खाने-पीने की चीजों की कमी जैसी कई चुनौतियां सामने आईं. इसके बावजूद उन्होंने इन मुश्किल हालात में सरकार की जिम्मेदारी संभाली और प्रशासन चलाया.




