Rahul Gandhi के साथ फोटो ने छीन लिया नगर निगम का टिकट, कौन हैं पूजा मोरे जाधव जिन्हें किया गया Troll?
पुणे नगर निगम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार बनी पूजा मोरे-जाधव अचानक राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गईं. स्थानीय स्तर पर भारी विरोध, सोशल मीडिया पर वायरल दावे और उनके पुराने बयानों को लेकर उठे सवालों ने ऐसा माहौल बना दिया कि आखिरकार उन्हें अपनी उम्मीदवारी वापस लेनी पड़ी.
पुणे नगर निगम चुनाव से पहले भाजपा की उम्मीदवार बनी पूजा मोरे जाधव का सियासी सफर अचानक विवादों में उलझ गया. देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिए गए पुराने बयानों और राहुल गांधी के साथ सामने आई तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर ऐसा तूफान खड़ा किया कि उनकी उम्मीदवारी सवालों के घेरे में आ गई.
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स्थानीय कार्यकर्ताओं के विरोध और लगातार ट्रोलिंग के बीच आखिरकार पूजा मोरे जाधव को नगर निगम चुनाव का टिकट छोड़ना पड़ा. इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर कौन हैं पूजा मोरे जाधव, जिनकी पहचान, राजनीति और पुराने रिश्तों ने उन्हें इस सियासी संकट तक पहुंचा दिया.
कौन हैं पूजा मोरे जाधव?
पूजा मोरे-जाधव महाराष्ट्र के बीड जिले के गेवराई तालुका से ताल्लुक रखती हैं. एक साधारण किसान परिवार में जन्मी पूजा ने बेहद सीमित संसाधनों के बीच जीवन की शुरुआत की. पिता की खेती और संघर्ष को करीब से देखने का असर उनके सोचने-समझने के तरीके पर साफ दिखाई देता है. किसानों की समस्याओं ने उन्हें बहुत कम उम्र में सामाजिक आंदोलनों की ओर खींच लिया.
कम उम्र में राजनीति में एंट्री
पूजा मोरे ने राजनीति में कदम उस समय रखा, जब ज्यादातर युवा अपने करियर की दिशा तय कर रहे होते हैं. उन्होंने पंचायत समिति का चुनाव लड़ा और साल 2017 के स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य की सबसे कम उम्र की पंचायत समिति सदस्य बनकर पहचान बनाई. इस जीत ने उन्हें एक उभरते हुए युवा चेहरे के रूप में स्थापित कर दिया.
आंदोलनों से मिली पहचान
किसानों के मुद्दों पर सक्रिय रहने वाली पूजा मोरे ने स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के जरिए राजू शेट्टी के साथ कई आंदोलन किए. फसल बीमा, कर्जमाफी और सरकारी नीतियों के खिलाफ उन्होंने सड़कों पर उतरकर आवाज उठाई. देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते हुए महाजनादेश यात्रा का विरोध करना भी उनके राजनीतिक सफर का अहम पड़ाव रहा.
पार्टी बदलने से बढ़ी चर्चा
आंदोलनकारी पहचान के बाद पूजा मोरे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थामा. एनसीपी में रहते हुए उन्हें बड़े मंच मिले, जहां उन्होंने किसान नीतियों पर सरकार की तीखी आलोचना की. उनकी भाषण शैली और बेबाक तेवर उन्हें भीड़ के बीच लोकप्रिय बनाते रहे. हालांकि, 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने संभाजीराजे छत्रपति के नेतृत्व वाली स्वराज पार्टी से गेवराई सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं.
मराठा आंदोलन से मिली सियासी धार
पूजा मोरे के सामाजिक जीवन का बड़ा आधार मराठा आरक्षण आंदोलन रहा. मराठा क्रांति मोर्चा के दौरान मुंबई में दिए गए उनके भाषण ने उन्हें राज्यभर में पहचान दिलाई. यहीं से उनकी छवि एक मुखर और संघर्षशील नेता के रूप में बनी.
पुणे में नई शुरुआत और नया विवाद
शादी के बाद पुणे शिफ्ट हुईं पूजा मोरे-जाधव पिछले एक साल से नगर निगम चुनाव की तैयारी कर रही थीं. वार्ड स्तर पर कार्यक्रम, सामाजिक गतिविधियां और स्थानीय संपर्क के जरिए उन्होंने माहौल बनाने की कोशिश की. लेकिन पार्टी बदलने का इतिहास और पुराने बयानों को लेकर उठे सवाल उनकी राह में सबसे बड़ी चुनौती बन गए.
आज भी जुझारू रहने का दावा
उम्मीदवारी वापस लेने के बाद भी पूजा मोरे-जाधव खुद को राजनीति से बाहर मानने को तैयार नहीं हैं. उनका कहना है कि वह संघर्ष से पीछे हटने वाली नहीं हैं और आने वाले समय में फिर से मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभाएंगी. विवादों के बीच भी उनकी कहानी एक ऐसी नेता की है, जिसने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर सियासत में अपनी जगह बनाने की कोशिश की.





