सरकार ने सोनम वांगचुक को दिया धोखा! एक्टिविस्ट ने लगाए गंभीर आरोप, भूख हड़ताल खत्म करने वाली रात का अब बताया पूरा सच- 8 पॉइंट्स
नीट पेपर लीक मामले को लेकर सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद सरकार ने उनसे बातचीत करके आधी रात को अस्पताल में उनका अनशन कत्म कराया था, लेकिन अब वांगचुक ने उस रात को लेकर सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है.
Sonam Wangchuk Hunger Strike
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों को न्याय दिलाने के लिए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक लंबी भूख हड़ताल पर बैठे थे, लगभग 20 दिनों तक जंतर-मंतर पर रहने के बाद पुलिस उनको जबरदस्ती उठाकर अस्पताल ले गई थी, लेकिन वहीं भी उनका अनशन जारी रहा. हालांकि 26 दिन बाद सरकार के साथ बातचीत के बाद उनका अस्पताल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अनशन खत्म करवाया था.
हालांकि इसको लेकर उस रात सोनम वांगचुक को एक बात को लेकर दोनों मंत्रियों ने भरोसा दिलाया था, लेकिन ऐसा हो न सका. जिसको लेकर अब सोनम वांगचुक ने सरकार पर कई आरोप लगाए हैं. वांगचुक ने अब उस रात का पूरा सच बताया है.
8 पॉइंट्स में जानें अनशन खत्म करने वाली रात का सच
1. सोनम वांगचुक का कहना है कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनकी भूख हड़ताल समाप्त होने से जुड़ी तस्वीरें तत्काल सार्वजनिक नहीं की जाएंगी. उन्होंने कहा "मंत्रियों ने अपने-अपने फोटोग्राफर रखे थे. उन्होंने मुझसे वादा किया था कि वे इसे जारी नहीं करेंगे. उन्होंने अपना वादा तोड़ दिया."
2. वांगचुक ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा केवल सरकार तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें विपक्षी दलों और छात्र संगठनों की भी भागीदारी दिखाई दे. उन्होंने कहा "मैंने उनसे कहा कि मैं चाहता हूं कि अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य, उनके नेता और छात्र नेता भी इसमें शामिल हों. मैं चाहता था कि यह एक संयुक्त सभा हो."
3. उन्होंने कहा "मैंने कहा कि मैं अपना उपवास तोड़ूंगा, लेकिन खबर मेरी शर्तों पर जारी की जाएगी, जिसमें विपक्षी नेताओं और, यदि संभव हो तो, छात्र नेताओं की तस्वीरें एक साथ लगाई जाएंगी ताकि यह एक संयुक्त प्रयास लगे."
4. वांगचुक के मुताबिक, बैठक के दौरान मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस सहमति का गवाह बनाया गया था ताकि बाद में किसी तरह का विवाद न हो. उन्होंने कहा "मैंने सूचना सूचना विभाग के अधिकारियों से कहा 'आप इस समझौते के गवाह हैं. जब तक मैं सभी पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ इस खबर को सार्वजनिक नहीं कर देता, तब तक कोई भी मीडिया को कोई भी तस्वीर जारी नहीं करेगा.' वे सहमत हो गए और उन्होंने यह वादा किया."
5. उन्होंने बताया "मैं अन्य पार्टियों के नेताओं की तस्वीरें लेने के लिए इंतजार कर रहा था. पांच मिनट के भीतर ही एक वरिष्ठ सूचना एवं संचार अधिकारी हांफते हुए आया और बोला, 'सर, मुझे नहीं पता कैसे, लेकिन ये तस्वीरें पहले ही टेलीविजन चैनलों पर चल रही हैं."
6. सोनम वांगचुक ने उन आरोपों को सिरे से नकार दिया कि उन्होंने सरकार के साथ किसी गुप्त समझौते के तहत अपनी भूख हड़ताल समाप्त की. उन्होंने कहा "मैं वह समझौता बहुत पहले कर सकता था. मुझे 26 दिन की भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत नहीं थी. मैं इससे भी बड़े समझौते कर सकता था. मैं तो यह भी कह सकता था, 'मुझे शिक्षा मंत्री बना दो.' अगर मैं समझौते करना चाहता, तो मेरे पास कई अवसर थे."
7. इस पूरे घटनाक्रम के बाद वांगचुक ने कहा कि अब उनका राजनीतिक नेताओं पर पहले जैसा विश्वास नहीं रहा. उन्होंने कहा "उन्होंने अपना वादा तोड़ दिया. इसलिए मैंने इन सभी नेताओं पर से भरोसा खो दिया है."
8. सोनम वांगचुक अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के NEET मुद्दे से जुड़े आंदोलन में शामिल हुए थे. उन्होंने 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की थी. 18 जुलाई को तबीयत बिगड़ने के बाद पुलिस उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले गई, जिसका छात्र संगठनों ने विरोध किया.




