'रॉबरी, थ्रेट, डकैती…' I-PAC रेड मामले पर सुप्रीम कोर्ट में ममता और ED वकीलों ने उधेड़ी एक-दूसरे की बखिया
सुप्रीम कोर्ट में I-PAC दफ्तर पर ED रेड को लेकर जोरदार बहस हुई, जहां सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल आमने-सामने आ गए. तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल सरकार पर जांच एजेंसियों के काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए इसे “लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र” करार दिया. जवाब में कपिल सिब्बल ने ED की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए चुनावी समय पर रेड के पीछे साजिश का दावा किया. कोर्ट ने माहौल बिगड़ने पर दोनों पक्षों को हंगामा न करने की चेतावनी दी.
I-PAC (Indian Political Action Committee) के कोलकाता स्थित दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में जोरदार बहस देखने को मिली. कोर्टरूम के भीतर ED और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के वकीलों के बीच आरोप–प्रत्यारोप इतने तीखे रहे कि न्यायालय को बीच में हस्तक्षेप कर शांति बनाए रखने की नसीहत देनी पड़ी.
इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई में ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जबकि ममता बनर्जी और TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए. वहीं I-PAC की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने मोर्चा संभाला. बहस का केंद्र बिंदु ED रेड में मुख्यमंत्री की मौजूदगी, चुनावी समय और हाईकोर्ट में कथित हंगामे का मुद्दा रहा.
सुप्रीम कोर्ट में कौन-कौन पेश हुआ
- ED की ओर से- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, ASG एस. राजू
- ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल DGP की ओर से: कपिल सिब्बल, कल्याण बनर्जी
- I-PAC की ओर से: अभिषेक मनु सिंघवी
SG तुषार मेहता की दलीलें: ‘यह लोकतंत्र नहीं, भीड़तंत्र है’
ED की याचिका पर दलील रखते हुए SG तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि यह कोई पहली बार नहीं है जब जांच एजेंसियों को पश्चिम बंगाल में काम करने से रोका गया हो. उन्होंने कहा कि पहले भी CBI अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद थाने ले जाया गया था. SG मेहता ने अदालत को बताया कि ED रेड के दौरान खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं, जिससे अधिकारियों को अपना कर्तव्य निभाने से रोका गया. उन्होंने सवाल उठाया-'मुझे नहीं पता वहां छिपाने के लिए ऐसा क्या था कि मुख्यमंत्री को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा.'
उन्होंने हाईकोर्ट में हुए कथित हंगामे का भी जिक्र किया और कहा कि बड़ी संख्या में वकील और लोग कोर्टरूम में घुस आए, जिससे सुनवाई का माहौल खराब हो गया. SG के मुताबिक, यह स्थिति “मोबोक्रेसी” यानी भीड़तंत्र जैसी थी.
हाईकोर्ट में हंगामे का जिक्र, सुप्रीम कोर्ट ने टोका
SG मेहता और कपिल सिब्बल- दोनों ने कहा कि वे खुद उस दिन कोलकाता हाईकोर्ट में मौजूद थे. इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा को हस्तक्षेप करना पड़ा और कहा कि 'कम से कम यहां हंगामा मत कीजिए.' SG ने दावा किया कि उनके पास व्हाट्सऐप चैट्स हैं, जिनमें सत्तारूढ़ दल के लीगल सेल द्वारा लोगों को अदालत पहुंचने के निर्देश दिए गए थे. 'सब लोग आओ.' इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह जंतर-मंतर जैसे आह्वान जैसा प्रतीत होता है.
ED का दावा: बसें लगाईं गईं, माइक म्यूट किया गया
SG मेहता ने आरोप लगाया कि लोगों को लाने के लिए बसों और वाहनों की व्यवस्था की गई थी. उन्होंने कहा कि सुनवाई लाइव थी, लेकिन माइक बार-बार म्यूट किया जा रहा था और ED को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि ED किसी निजी उद्देश्य से काम नहीं करती और अब तक 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि अपराध पीड़ितों को वापस दिलाई जा चुकी है.
I-PAC रेड पर ED का तर्क: 'SIR डेटा लेने का सवाल ही नहीं'
जस्टिस मिश्रा के सवाल पर SG मेहता ने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है कि ED केवल SIR डेटा लेने गई थी. 'कोई मूर्ख भी वेबसाइट पर मौजूद डेटा लेने वहां नहीं जाएगा.' ममता बनर्जी की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने ED की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि I-PAC चुनाव प्रबंधन से जुड़ी एजेंसी है और उसका दफ्तर TMC कार्यालय का हिस्सा है. ऐसे में वहां पार्टी का संवेदनशील चुनावी डेटा मौजूद होना स्वाभाविक है. सिब्बल ने सवाल उठाया- 'जब 24 फरवरी 2024 के बाद कोई बयान दर्ज नहीं हुआ, तो चुनाव के बीच अचानक ED इतनी सक्रिय क्यों हो गई?” उन्होंने तर्क दिया कि यदि ED को चुनावी डेटा मिल जाता तो पार्टी चुनाव कैसे लड़ती.
‘पंचनामा ED के दावों के खिलाफ’
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में पंचनामा दिखाते हुए कहा कि दोपहर 12:05 बजे तक कोई जब्ती नहीं हुई थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री ने केवल प्रतीक जैन का लैपटॉप (जिसमें चुनावी डेटा था) और अपना निजी आईफोन लिया, इसके अलावा कुछ नहीं. सिब्बल ने जोर देकर कहा कि “कोई अवरोध नहीं हुआ, इस पर ED ने खुद हस्ताक्षर किए हैं. याचिका के आरोप पंचनामे से मेल नहीं खाते.”
I-PAC की ओर से सिंघवी: याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल
अभिषेक मनु सिंघवी ने ED की याचिका की maintainability पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान खुद जांच एजेंसी ने कहा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. ASG एस. राजू ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए CBI जांच की मांग की. ED की ओर से “रॉबरी, थ्रेट और डकैती” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर मामला है और नोटिस जारी किया जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस बात से व्यथित है कि हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करने दी गई.





