कौन हैं पायल नाथ जिनसे हुआ उमर अब्दुल्ला का तलाक? 17 साल से अलग रह रहे थे, ऐसी है दोनों की Love Story
उमर अब्दुल्ला और पायल नाथ की 1994 की शादी से लेकर 17 साल के अलगाव और सुप्रीम कोर्ट में तलाक तक, जानिए दोनों की Love Story और कानूनी विवाद की पूरी कहानी.
दिल्ली के एक होटल से शुरू हुई एक मुलाकात ने 1994 में शादी का रूप लिया. एक तरफ अब्दुल्ला परिवार का युवा उमर, दूसरी तरफ सेना से जुड़े परिवार की पायल नाथ, दोनों की कहानी उस दौर में राजनीति से दूर, एक सामान्य प्रेम कहानी जैसी थी. शादी के बाद परिवार बढ़ा, दो बेटे हुए और जिंदगी आगे बढ़ती रही. लेकिन वक्त के साथ उमर की राजनीति में सक्रियता बढ़ी और दोनों के रिश्ते में दूरियां आती गईं. 2009 से दोनों अलग रहने लगे. करीब 17 साल तक यह रिश्ता कानूनी रूप से कायम रहा, जबकि जिंदगी अलग-अलग चलती रही. आखिरकार 31 जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता के बाद दोनों ने अपने विवाद सुलझाए और इस रिश्ते का कानूनी अंत हो गया.
उमर अब्दुल्ला के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि दोनों ने मध्यस्थता के जरिए अपने सभी विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिए हैं. इसके बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने उमर अब्दुल्ला की अपील का निपटारा करते हुए विवाह को समाप्त कर दिया. अदालत को यह भी बताया गया कि लंबित विवादों और मामलों को वापस लिया जाएगा. यह मामला इसलिए भी खास रहा, क्योंकि शादी के करीब 15 साल बाद दोनों अलग रहने लगे थे और तलाक की कानूनी लड़ाई कई वर्षों तक चली.
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिसंबर 2023 में उमर अब्दुल्ला की तलाक याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था. बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अप्रैल 2025 में शीर्ष अदालत ने दोनों को मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करने को कहा. अब उसी प्रक्रिया के बाद दोनों ने आपसी सहमति से रास्ता चुना.
कौन हैं पायल नाथ?
पायल अब्दुल्ला शादी से पहले पायल नाथ के नाम से जानी जाती थीं और दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता मेजर जनरल राम नाथ भारतीय सेना में अधिकारी रहे हैं और उनका परिवार मूल रूप से लाहौर से जुड़ा बताया जाता है. पायल और उमर की मुलाकात दिल्ली के ओबेरॉय होटल में हुई थी, जहां दोनों काम करते थे. उस समय उमर अब्दुल्ला होटल इंडस्ट्री में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर रहे थे. दोनों ने 1 सितंबर 1994 को शादी की.
पायल नाथ की पहचान केवल एक राजनीतिक परिवार की बहू के रूप में नहीं रही. सार्वजनिक रिपोर्टों के मुताबिक वह कारोबार से भी जुड़ी रही हैं. उन्होंने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू इलाके में मिनरल वॉटर कारोबार और दिल्ली में ट्रैवल बिजनेस चलाया. उमर और पायल के दो बेटे हैं— जहीर और जामिर. दिल्ली हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों बेटे कानून की पढ़ाई कर रहे थे.
पायल लंबे समय तक मीडिया से दूरी बनाए रखती रहीं. 2011 में जब दोनों के अलग होने की खबर सार्वजनिक हुई, तब भी उनकी ओर से सार्वजनिक बयान बहुत सीमित रहे. उमर ने उस समय अपने निजी जीवन से जुड़ी अटकलों पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि उनके अलग होने की बात सही है, लेकिन उनके रिश्ते के कारणों को लेकर चल रही कई अटकलें गलत हैं.
उमर और पायल की Love Story कैसे शुरू हुई थी?
उमर और पायल की कहानी राजनीति कैजुअल फ्रेंडशिप से ज्यादा एक workplace relationship से शुरू हुई थी. दोनों दिल्ली के ओबेरॉय होटल में काम करते थे. उमर उस समय राजनीति में पूरी तरह सक्रिय नहीं हुए थे और कॉरपोरेट क्षेत्र में अपना करियर बना रहे थे. इसी दौरान दोनों की मुलाकात हुई और रिश्ता आगे बढ़ा. 1 सितंबर 1994 को दोनों ने शादी कर ली. उस समय उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते थे, जबकि पायल का परिवार सैन्य पृष्ठभूमि वाला था.
शादी के बाद दोनों के दो बेटे हुए. लेकिन समय के साथ उमर का राजनीतिक जीवन तेजी से बदलता गया. वह जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सक्रिय हुए, लोकसभा पहुंचे और बाद में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने.
दिल्ली हाईकोर्ट के 2023 के फैसले में दर्ज उमर के पक्ष के अनुसार, वह 2002 में चुनावी तैयारी के लिए कश्मीर गए थे और इसके बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ती गई. हालांकि, अदालत के रिकॉर्ड में पायल का पक्ष भी दर्ज है और तलाक के आरोपों पर दोनों के दावे अलग-अलग थे. इसलिए निजी रिश्ते के टूटने का कोई एकतरफा कारण बताना अदालत के रिकॉर्ड के आधार पर उचित नहीं होगा.
17 साल से अलग क्यों और तलाक की लड़ाई इतनी लंबी कैसे?
उमर और पायल 2009 से अलग रह रहे थे. उमर की तलाक याचिका में आरोप था कि विवाह संबंध इस हद तक टूट चुका है कि उसे बनाए रखना संभव नहीं रहा. उन्होंने cruelty और desertion यानी क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की मांग की थी. पायल ने इन आरोपों का विरोध किया. दिल्ली हाईकोर्ट के 2023 के फैसले में दर्ज है कि उमर के अनुसार दोनों के बीच 2007 से वैवाहिक संबंध नहीं थे और 2009 से वे अलग रह रहे थे.
लेकिन Family Court ने तलाक देने से इनकार कर दिया. अदालत ने यह माना कि उमर अपने आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर पाए. कोर्ट ने यह भी देखा कि तलाक की याचिका दायर किए जाने तक दोनों के बीच संपर्क बना हुआ था. दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने Family Court के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि cruelty के आरोप अस्पष्ट और अस्वीकार्य थे तथा उमर ऐसा ठोस व्यवहार साबित नहीं कर पाए, जिसे शारीरिक या मानसिक क्रूरता माना जा सके.
इस मुकदमे के दौरान आर्थिक विवाद भी सामने आया. अगस्त 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने पायल को अंतरिम maintenance के तौर पर ₹1.5 लाख प्रति माह देने का आदेश दिया था. इसके अलावा दोनों बेटों की पढ़ाई के लिए ₹60,000 प्रति बेटा प्रति माह देने का निर्देश भी दिया गया था. कोर्ट के रिकॉर्ड में बच्चों की कानून की पढ़ाई का जिक्र है.
यही वजह है कि करीब डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक अलग रहने के बावजूद तलाक तुरंत नहीं हो सका. अलग रहना अपने आप में हर मामले में तलाक की कानूनी डिक्री के लिए पर्याप्त नहीं होता; संबंधित वैधानिक grounds और उनके प्रमाण भी महत्वपूर्ण होते हैं.
Supreme Court में आखिर कैसे खत्म हुआ विवाद?
उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2023 के फैसले को Supreme Court में चुनौती दी. अप्रैल 2025 में शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करने को कहा था. इसके बाद मामला मध्यस्थता की प्रक्रिया में गया. 31 जुलाई 2026 को Supreme Court को बताया गया कि मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्षों ने अपने सभी विवाद सुलझा लिए हैं और अब वे विवाह को आपसी सहमति से समाप्त करना चाहते हैं.
उमर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि सभी विवाद amicably settle हो गए हैं और बाकी लंबित मामले वापस लिए जाएंगे. इसके बाद पीठ ने समझौते को रिकॉर्ड करते हुए मामले का निपटारा कर दिया.
यहां Supreme Court की भूमिका को भी समझना जरूरी है. यह मामला अब उस पुराने contested divorce की स्थिति में नहीं रहा, जिसमें एक पक्ष तलाक चाहता था और दूसरा विरोध कर रहा था. दोनों के बीच mediation के बाद settlement हो गया और दोनों ने विवाह समाप्त करने पर सहमति जताई. अदालत ने इसी settlement को रिकॉर्ड करते हुए proceedings समाप्त कीं.
इस कहानी का सबसे बड़ा मोड़ क्या?
उमर अब्दुल्ला और पायल की शादी 1994 में हुई थी और करीब 15 साल बाद 2009 से दोनों अलग रहने लगे. 2011 में separation सार्वजनिक हुआ, फिर तलाक की कानूनी प्रक्रिया चली. Family Court ने तलाक नहीं दिया, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2023 में उस फैसले को बरकरार रखा और मामला Supreme Court पहुंचा. आखिरकार, 2025 में शुरू हुई mediation प्रक्रिया ने उस कानूनी गतिरोध को खत्म करने का रास्ता बनाया और 31 जुलाई 2026 को दोनों ने अपने विवाद आपसी सहमति से समाप्त कर दिए.
उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला की कहानी को सिर्फ एक celebrity-political divorce की तरह देखना अधूरा होगा. यह करीब 32 साल पुराने विवाह, लगभग 17 साल के separation और वर्षों चली matrimonial litigation के बाद mediation से हुए settlement की कहानी है.
इसका सबसे अहम पहलू यह है कि जिस तलाक को Family Court और High Court के स्तर पर लंबे समय तक कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ा, वह आखिरकार Supreme Court में दोनों पक्षों की सहमति और mediation के जरिए समाप्त हुआ.




